कभी बांग्लादेश के पास नहीं थे क्रिकेट टीम को पानी पिलाने के पैसे, आज कैसे कर रहा है खूब कमाल

एक जमाना था जब बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के पास अपनी नेशनल टीम को पानी पिलाने के पैसे नहीं होते थे, लेकिन अब सब कुछ बदल चुका है. पैसा आ रहा है, देश में क्रिकेट की ठोस संरचना बन चुकी है.

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: June 18, 2019, 3:05 PM IST
कभी बांग्लादेश के पास नहीं थे क्रिकेट टीम को पानी पिलाने के पैसे, आज कैसे कर रहा है खूब कमाल
शाकिब अल हसन वर्ल्ड कप में दो शतक के साथ सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं
Sanjay Srivastava
Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: June 18, 2019, 3:05 PM IST
बांग्लादेश क्रिकेट टीम यूं तो पिछले कुछ वर्ल्ड कप में लगातार ही कमाल कर रही है. लेकिन इंग्लैंड में हो रहा मौजूदा वर्ल्ड कप उसके लिए वाकई खास है. जिस तरह टांटन में बांग्लादेश ने 322 रन बनाकर वेस्टइंडीज की सात विकेट से छुट्टी कर दी, उसने तो वर्ल्ड क्रिकेट को हैरान कर दिया. बांग्लादेश को अब तक उठापटक करने वाली टीम जरूर माना जाता था, लेकिन अबकी बार माना जा रहा है कि वो पहली बार वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंच सकते हैं. आखिर क्या है इस देश की तरक्की का राज.

आमतौर पर वन-डे क्रिकेट में जब कोई टीम 300 से ज्यादा रनों के टारगेट का पीछा करने उतरती है तो जीत तक पहुंचना उसके लिए कतई आसान नहीं होता. और अगर सामने वेस्टइंडीज जैसी टीम हो तो वाकई ये मुश्किल ही होता है, क्योंकि उनके पास वाकई खतरनाक गेंदबाज हैं. दिलचस्प बात एक ये भी है कि बांग्लादेश ने जीत केवल तीन विकेट खोकर हासिल की और 8.3 ओवर्स के बाकी रहते हुए.

एक जमाना था जब बांग्लादेश के आजाद होने के बाद जब 1972 में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड का गठन हुआ तो बोर्ड के पास इतना पैसा भी नहीं होता था कि नेशनल टीम के लिए पानी की भी व्यवस्था कर सकें. गृह युद्ध की विभीषिका से जूझकर आजाद हुए बांग्लादेश के लिए क्रिकेट ही क्यों सबकुछ बहुत मुश्किल था. देश में जबरदस्त गरीबी थी. क्रिकेट टीम भी वहां इसके बाद तभी बन पाई थी जब ढाका स्थित ब्रिटिश हाईकमीशन ने कुछ क्रिकेट किट बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड को दिये.

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जब ये हिस्सा पूर्वी पाकिस्तान कहलाता था 
1971 में बांग्लादेश के आजाद होने से पहले ये हिस्सा पूर्वी पाकिस्तान था यानि पाकिस्तान का हिस्सा. उस समय यहां क्रिकेट खेली जाती थी लेकिन पाकिस्तान के क्रिकेट ढांचे में यहां की टीमों को कोई तवज्जो नहीं मिलती थी. 25 सालों तक पाकिस्तान के साथ रहने का उनका दौर देश के सबसे खराब समय के रूप में शुमार किया जाता है. इतने बरसों में यहां के केवल एक ही खिलाड़ी को पाकिस्तान टीम में जगह मिल पाई थी.

बांग्लादेश ने 1999 में अपना पहला वर्ल्ड कप खेला और पाकिस्तान को हराकर सनसनी मचा दी

1999 में पहला वर्ल्ड कप खेला
वर्ष 1975 में जब पहला वर्ल्ड कप शुरू हुआ तो बांग्लादेश की टीम इसमें हिस्सा लेना चाहती थी लेकिन उसे इसकी अनुमति नहीं मिली. 1979 के दूसरे वर्ल्ड कप में वो क्वालिफाई नहीं कर पाई. वो मलेशिया और डेनमार्क जैसी टीमों से हार गई थी. उठने गिरने का सिलसिला 1999 तक चलता रहा. 1999 में उन्हें पहली बार वर्ल्ड कप खेलने का मौका मिला. इसी वर्ल्ड कप में उन्होंने जब पाकिस्तान की टीम को हरा दिया तो सनसनी फैल गई.

72 मैचों में 71 में हार मिली थी 
इसके बाद 2000 में बांग्लादेश को आईसीसी में सदस्यता मिल गई. लेकिन 1999 से 2004 का समय ऐसा था कि अब बांग्लादेश के क्रिकेटर उसे याद भी नहीं करना चाहते. पैसा तो नहीं ही था. साथ ही इन पांच सालों में बांग्लादेश टीम विदेशी टीमों के साथ जो 72 मैच खेले, उसमें 71 में उसे हार नसीब हुई. कुल मिलाकर ये बहुत ज्यादा हतोत्साहित करने वाली बात थी. लेकिन इसके अगले सालों में उसे ऐसी छिटपुट जीत मिलने लगी, जो उसे उत्साहित कर सकती थी.
सबसे बड़ी बात ये भी थी भारतीय क्रिकेट बोर्ड उसकी मदद कर रहा था. आईसीसी के जरिए बांग्लादेश क्रिकेट को अपने पैरों पर खड़ा करने की कोशिश की जा रही थी. उसे आईसीसी से वित्तीय सहायता भी दी जा रही थी. इससे बांग्लादेश में क्रिकेट का ढांचा बनना शुरू हो गया. घरेलू क्रिकेट प्रतियोगिता की व्यवस्था की गई.

बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के पास 2011 के बाद जब धन आना शुरू हुआ तो वहां क्रिकेट की रंगत भी बदलने लगी


बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के पास पैसा आया 2011 के बाद  
सही मायनों में श्रीलंका क्रिकेट के पास पैसा आया 2011 के उस वर्ल्ड कप के बाद, जिसे भारत ने श्रीलंका और बांग्लादेश के साथ मिलकर आयोजित किया था. हालांकि इस वर्ल्ड कप में बांग्लादेश की टीम पहले ही राउंड के बाद बाहर हो गई थी लेकिन वर्ल्ड कप आयोजन से हुई आमदनी में उसे जो हिस्सा मिला, उसने टीम को बदलने में गजब की भूमिका निभाई.  अब तो बांग्लादेश का क्रिकेट बोर्ड दुनिया में क्रिकेट खेलने वाले सबसे धनी पांच क्रिकेट बोर्डों में गिना जाता है.

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श्रीलंका टीम ने ना केवल मोटा पैसा देकर बड़ा कोच रखना शुरू किया बल्कि टीम का इंटरनेशनल एक्सपोजर भी बढ़ने लगा. ब्राडकास्ट राइट से भी बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के पास पैसा आना शुरू हुआ. कुछ स्पांसर भी साथ आ गए.

2007 वर्ल्ड कप में भारत और दक्षिण अफ्रीका को हराया था
पता नहीं कितने लोगों को याद है या नहीं कि वर्ष 2007 के वर्ल्ड कप में बांग्लादेश ने एक नहीं बल्कि दो दिग्गज टीमों को हराकर बड़ी उलटफेर की थी. ये टीमें थीं भारत और दक्षिण अफ्रीका. इसके बाद 2015 में उसने इंग्लैंड को पटखनी दी. 2017 में अपने ग्रुप में आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और इंग्लैंड जैसी टीमों के रहते उसने सेमीफाइनल में जगह बनाई.

बांग्लादेश के क्रिकेटरों को सबसे ज्यादा फायदा विदेशी लीग में खेलने का हुआ


सबसे ज्यादा फायदा इससे हुआ 
दरअसल बांग्लादेश क्रिकेट को सबसे ज्यादा फायदा इंडियन प्रीमियर लीग और दूसरे देशों में लीग शुरू होने के साथ अपने देश में बांग्लादेश प्रीमियर लीग से हुआ. इसमें उनके खिलाड़ियों को बड़े पैमाने पर एक्सपोजर मिलने लगा. टैलेंट सामने आने लगे. एक काम बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने हमेशा अच्छा किया कि उन्होंने अपनी नेशनल टीम के लिए बेहतरीन कोच रखा. इसने टीम को प्रोफेनलिज्म दिया और फिटनेस के स्तर पर भी बेहतर करने का काम किया.

इस वर्ल्ड कप में 
वर्ष 2019 के वर्ल्ड कप में जब बांग्लादेश की टीम आ रही थी तो इस प्रतियोगिता के मौजूदा फारमेट को देखने के बाद कहा जा रहा था कि इस बार बांग्लादेश जैसी टीम के सबसे बेहतर करने का मौका है. लिहाजा ये टीम अब वही कर भी रही है. पहले ही मैच में उन्होंने इस बार साउथ अफ्रीका को हराकर अपने इरादे जता ही दिये थे लेकिन इसके बाद उन्हें इंग्लैंड और न्यूजीलैंड से हार का सामना करना पड़ा जबकि श्रीलंका के खिलाफ मैच बारिश से धुल गया.

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सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए बांग्लादेश को हर हाल में वेस्टइंडीज से मैच जितना जरूरी था ताकि उसकी उम्मीदें जिंदा रहें. हालांकि जब वेस्टइंडीज ने पहले बैटिंग करते हुए आठ विकेट पर 321 रन का स्कोर खड़ा किया तो शायद ही किसी को बांग्लादेश की जीत की उम्मीद थी. तारीफ करनी होगी कि बांग्लादेश के क्रिकेट ढांचे में अब एक से एक अच्छे क्रिकेटर पैदा हो रहे हैं.

मौजूदा वर्ल्ड कप में बांग्लादेश की टीम


आलराउंडर शाकिब हसन के बारे में क्या कहिएगा. वो वर्ल्ड कप में दो शतक लगा चुके हैं. इस प्रतियोगिता में सबसे ज्यादा 384 रन उनके नाम हैं. दूसरे क्रिकेटर भी बल्ले और गेंद से कमाल कर रहे हैं.

क्रिकेटरों की सेलरी 
बांग्लादेश की तरक्की का राज यही है कि अब उनकी घरेलू क्रिकेट की संरचना शेप ले चुकी है. क्रिकेटर जमकर मेहनत करते हैं. उनकी सेलरी हालांकि अब भी बहुत ज्यादा नहीं है लेकिन पिछले साल ही बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने उन्हें सेलरी में करीब 60 फीसदी की छलांग दी है. ग्रेड ए क्रिकेटरों को एक टेस्ट मैच खेलने के लिए तीन लाख रुपए, वन-डे के लिए 1.74 लाख और टी20 के लिए 87,303 रुपए मिलते हैं.
हालांकि बांग्लादेश के ज्यादातर क्रिकेटर लीग के जरिए कहीं ज्यादा पैसा कमा रहे हैं.

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बांग्लादेश में अब युवा क्रिकेटर बनने का सपना देखता है
लिहाजा बांग्लादेश जैसे गरीब देश के लिए क्रिकेटर बनना हर किशोर का सपना होता है. बांग्लादेश में भी भारत की तरह बच्चे गली-मौहल्लों और मैदानों में क्रिकेट खेलते दिख जाते हैं. कभी यहां फुटबॉल को लेकर जबरदस्त दीवानगी थी लेकिन उसकी जगह अब क्रिकेट ले रही है. जाहिर है जब किसी देश में ज्यादा से ज्यादा किशोर और युवा किसी खेल को खेल रहे हों और उसकी संरचना बन चुकी हो तो एक से एक बेहतरीन टैलेंट भी सामने आते हैं. बांग्लादेश में अब वही हो रहा है. माना जा रहा है कि हर साल के साथ अब बांग्लादेश की छलांग भी बेहतर होती जाएगी.

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