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दिल्ली से ज्यादा है यूपी और बिहार के वोटों की कीमत, जानें क्यों?

दिल्ली से ज्यादा है यूपी और बिहार के वोटों की कीमत, जानें क्यों?

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

भले ही इस पर यकीन न हो लेकिन दिल्ली के वोटों की कीमत यूपी और बिहार से कम है.

    भारतीय संविधान में एक व्यक्ति, एक वोट का सिद्धांत होने के बावजूद भारत में अलग-अलग राज्यों में लोगों के वोटों का दाम अलग-अलग होता है. भारत में अलग-अलग लोकसभा सीटों पर जनसंख्या अलग-अलग गति से बढ़ी है. हालांकि 1976 से ही सभी भारत में लोकसभा सीटों की संख्या उतनी ही है. हालांकि हर लोकसभा सीट पर आज से चार दशक पहले जितने लोग थे, उनसे कहीं ज्यादा हो चुके हैं. इसका एक मतलब यह भी है कि बड़ी लोकसभा सीटों और बड़े राज्यों का सही प्रतिनिधित्व संसद में नहीं हो पा रहा है.

    1977 के मुकाबले हर सीट पर बढ़ चुके हैं तीन गुना लोग
    1976 में लोकसभा सीटों को राज्यों के आधार पर बांटे जाने से रोक दिया गया था. ऐसा कदम इसलिए उठाया गया था ताकि जिन राज्यों में जनसंख्या तेजी से नहीं बढ़ रही, उन्हें तेजी से जनसंख्या बढ़ने वाले राज्यों के मुकाबले नुकसान न हो. आज भी लोकसभा सीटों का जो विभाजन है, वह 1971 की जनसंख्या पर आधारित है. लोकसभा सीटों की 543 की संख्या को 1977 से ही बिल्कुल तय रखा गया है.

    1977 में जहां हर लोकसभा सीट औसतन 10.1 लाख नागरिकों और 5.9 लाख वोटर्स का प्रतिनिधित्व करती थी. लेकिन जैसे-जैसे अलग-अलग राज्यों की जनसंख्या में अलग-अलग स्तर पर बढ़ोत्तरी होती गई, लोकसभा सीटों का यह प्रतिनिधित्व का औसत भी बिगड़ता गया. 2019 में हर लोकसभा सीट औसतन 24.2 लाख नागरिकों और 15.6 लाख वोटर्स का प्रतिनिधित्व करती थी.

    लक्षद्वीप में है वोट की सबसे ज्यादा कीमत
    हर सीट पर औसत वोटर्स की संख्या को देखते हुए लक्षद्वीप की सीट पर सबसे कम वोटर हैं. लक्षद्वीप की सीट पर जितने वोटर हैं, उसके मुकाबले देश के औसत 30 गुना ज्यादा है. सीधे शब्दों में कहें तो एक औसत भारतीय का वोट जितना मायने रखता है, लक्षद्वीप के किसी वोटर का वोट उससे तीस गुना ज्यादा मायने रखता है.

    वो सीटें जिनपर यह खाई सबसे ज्यादा है
    2014 में भारत की सबसे बड़ी लोकसभा सीट (जनसंख्या के हिसाब से) तेलंगाना की मलकानगिरी थी. इस सीट पर वोटर्स की संख्या 32 लाख से भी ज्यादा थी. और देश की सबसे कम वोटर्स वाली लोकसभा सीट लक्षद्वीप थी. जहां पर करीब 50 हजार वोटर्स थे.

    यानि मलकानगिरी में लक्षद्वीप के मुकाबले करीब 64 गुना ज्यादा वोटर्स थे. इसका एक मतलब यह भी हुआ कि लक्षद्वीप का एक वोट मलकानगिरी के 64 वोटों के बराबर है. यानि लक्षद्वीप के एक वोट का संसद में प्रभाव, मलकानगिरी के साठ से भी ज्यादा वोटों को बराबर होगा.

    सबसे निचले पायदान पर आने वालों में दिल्ली भी शामिल है. जहां पर देश के औसत के मुकाबले हर सीट पर करीब 3 लाख वोटर ज्यादा हैं. इसका मतलब यह हुआ कि दिल्ली के 10 वोटर जितना प्रभाव रखते हैं, देशभर की बात करें तो मात्र 8 वोटर इतना प्रभाव रखते हैं.

    सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में वोट्स की इतनी है कीमत-

    दमन और दीव- 13.9
    दादरा और नगर हवेली- 6.9
    अंडमान और निकोबार- 5.6
    अरुणाचल प्रदेश- 4.2
    सिक्किम- 3.9
    गोवा- 2.9
    चंडीगढ़- 2.7
    मिजोरम- 2.1
    मेघालय, पुद्दुचेरी, मणिपुर- 1.7
    नगालैंड- 1.4
    केरल, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, त्रिपुरा- 1.3
    आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, उत्तराखंड, असम, पंजाब, झारखंड- 1.1
    भारत (औसत), बंगाल, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, तेलंगाना- 1
    बिहार, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, यूपी, महाराष्ट्र, राजस्थान- 0.9
    दिल्ली- 0.8

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    Tags: Election, Election commission, General Election 2019, Lok Sabha Election 2019, Voter ID, Voter List

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