कश्मीर पर UNSC की क्लोज-डोर मीटिंग में पाकिस्तान को ही नहीं मिलेगी एंट्री

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: August 16, 2019, 7:21 PM IST
कश्मीर पर UNSC की क्लोज-डोर मीटिंग में पाकिस्तान को ही नहीं मिलेगी एंट्री
कश्मीर पर UNSC की मीटिंग में खुद PAK को ही एंट्री नहीं

आमतौर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) में क्लोज डोर मीटिंग (Close-Door Meeting) बहुत कम होती हैं. इन्हें तब बुलाया जाता है जब किसी मुद्दे पर सदस्य देशों का गुपचुप रुख देखना हो

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पाकिस्तान (Pakistan) ने पिछले दिनों संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) को एक पत्र लिखकर कश्मीर (Kashmir) में भारतीय सरकार की कार्रवाई पर आपत्ति जताई और इस पर मीटिंग बुलाने की मांग की. पाकिस्तान की इस आपत्ति पर उसके दोस्त माने जाने वाले चीन (China) ने कहा, ये मीटिंग क्लोज-डोर (Close-Door Meeting) होनी चाहिए यानी गुप्त मीटिंग. लेकिन इस मीटिंग में शिकायत करने वाले पाकिस्तान को ही प्रवेश नहीं मिलेगा.

आखिर क्या होती है क्लोज डोर मीटिंग? आमतौर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में क्लोज-डोर मीटिंग बहुत कम ही होती हैं. ये मीटिंग जब भी होती है, तो इसे असाधारण ही माना जाता है. पिछली बार ऐसी मीटिंग 2015 में यमन में अप्रत्याशित हिंसा को लेकर दो बार जल्दी-जल्दी हुई थी. उसके बाद अब कश्मीर मामले पर ऐसा होने जा रहा है.

क्लोज डोर का अगर अर्थ समझें तो कैंब्रिज डिक्शनरी कहती है, ऐसी मीटिंग जिसमें हर कोई आमंत्रित नहीं होता और ना ही ये पब्लिक के लिए होती है. अगर इसे संयुक्त राष्ट्र के हिसाब से समझा जाए तो मतलब है ऐसी मीटिंग जिसमें खास लोग ही शिरकत करेंगे. यहां पर खास लोगों से मतलब सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य और दो साल के कार्यकाल वाले अस्थायी सदस्य. यानी संयुक्त राष्ट्र के सभी देश इस मीटिंग में नहीं होंगे.

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क्या होती है क्लोज-डोर मीटिंग
संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में जब भी क्लोज डोर मीटिंग होती है जब इसमें इन्हीं दो तरह के सदस्यों की भूमिका होती है. इस मीटिंग की अध्यक्षता सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष देश करता है. ये अध्यक्ष देश स्थायी और अस्थायी देशों के बीच से चुना जाता है. वो ये तय करता है कि ऐसी मीटिंग की जरूरत है या नहीं. इस समय अस्थायी सदस्य पोलैंड संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष है. ये मीटिंग उसी के जरिए बुलाई गई है.

क्लोज-डोर मीटिंग में संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद के स्थायी और अस्थायी सदस्य हिस्सा लेते हैं

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क्यों पाकिस्तान वहां नहीं होगा
अब हम असल मुद्दे पर आते हैं कि क्या इस मीटिंग में शिकायतकर्ता पाकिस्तान को रखा जाएगा या नहीं. तर्क तो ये कहता है कि जिसने शिकायत की उसे इस मीटिंग में मौजूद रहकर अपनी शिकायत के बारे में बताना चाहिए और जिसके खिलाफ शिकायत की गई है, उसे भी अपना पक्ष रखने के लिए वहां होना चाहिए.

हैरान मत होइए, इस मीटिंग में ना तो पाकिस्तान को बुलाया जा रहा है और ना ही भारत को. क्योंकि क्लोज-डोर मीटिंग के संविधान और नियमों के अनुसार इस तरह की मीटिंग में वही देश होंगे जो सुरक्षा परिषद के सदस्य होंगे, इसके अलावा और कोई नहीं. फिर इससे पाकिस्तान को फायदा क्या होगा.

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फिर पाकिस्तान इस मीटिंग पर क्यों सहमत हो गया
दरअसल पाकिस्तान और चीन का ये मिलाजुला और काफी शातिर अभियान है. पाकिस्तान को मालुूम है कि अगर भारत को अपना पक्ष रखने का मौका मिला तो वहां पर पाकिस्तान के तर्क हल्के पड़ जाएंगे. भारत को पूरा हक है कि उसके पास जो कश्मीर है, उसमें वो अपने संविधान के दायरे में कदम उठा सकता है. उसी के तरह भारत ने आर्टिकल 370 में बदलाव किया है. लिहाजा भारत के नहीं रहने पर चीन ये जिम्मा संभालेगा कि पाकिस्तान का पक्ष मजबूत तरीके से रखे और सुरक्षा परिषद में भारत के खिलाफ माहौल बनाए.

पाकिस्तान चाहता है कि यूएन में क्लोज-डोर मीटिंग के जरिए कश्मीर मसले पर इंटरनेशनल दबाव बनाया जाए.


क्या सार्वजनिक होंगी क्लोज-डोर मीटिंग की बातें 
एक बात और संयुक्त राष्ट्र की क्लोज-डोर मीटिंग में जो बातें होती हैं, वो ना तो सार्वजनिक की जाती हैं और ना ही उनका कोई रिकॉर्ड रखा जाता है, यानी सभी सदस्यों को पूरी आजादी होती है कि वो खुलकर संबंधित मुद्दों पर बात करें. चीन और पाकिस्तान चाहते हैं कि इस मीटिंग के जरिए भारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय जनमत बनाया जाए, जो अब तक नहीं बन पाया है.

कौन से देश किस ओर होंगे
अब ये देखते हैं कि इस मीटिंग में कौन से देश भारत के साथ होंगे और कौन से पाकिस्तान के साथ. जिन पांच स्थायी सदस्यों को वीटो पॉवर है, उनमें चीन, अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस शामिल हैं. इसमें चीन खुलकर पाकिस्तान के पक्ष में है जबकि ऐसा लगता है अमेरिका को भारत का साथ देना चाहिए. रूस और ब्रिटेन की अब तक की प्रतिक्रिया पाकिस्तान के पक्ष में नहीं रही है. फ्रांस इस मामले में न्यूट्रल है.
वहीं दस अस्थायी देशों में बेल्जियम, कोट डि आइवरी, डोमनिक गणराज्य, गिनीया, जर्मनी, इंडोनेशिया, कुवैत, पेरू, पोलैंड और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं. कहा जा रहा कि कुवैत और इंडोनेशिया पाकिस्तान के साथ हैं, लेकिन शेष देशों ने अपनी कोई प्रतिक्रिया जाहिर नहीं की, हालांकि पाकिस्तान इन सभी से एप्रोच कर चुका है.

संयुक्त राष्ट्र संघ में इस तरह की क्लोज-डोर मीटिंग्स बहुत कम होती हैं


क्या होगा इस मीटिंग से
इस मीटिंग के जरिए पाकिस्तान की कोशिश भारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की होगी. उसे लगता है कि चीन मीटिंग में उसका पक्ष रखेगा. लेकिन ये भी संभव है कि अगर अमेरिका ने अपना प्रभाव दिखाया तो ज्यादातर इस मामले पर पाकिस्तान के साथ जाने की बजाए यही कहेंगे कि इस मसले को भारत-पाकिस्तान खुद बातचीत के जरिए सुलझाएं. या ये भी हो सकता है कि इस मीटिंग का लब्बो लुआब ये निकले कि ये भारत का इंटरनल मामला है.

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First published: August 16, 2019, 6:30 PM IST
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