क्या है अपस्कर्टिंग, जिसे लेकर यूरोप में मचा है हंगामा

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: August 28, 2019, 9:23 PM IST
क्या है अपस्कर्टिंग, जिसे लेकर यूरोप में मचा है हंगामा
इसी साल इंग्लैंड में अप​स्कर्टिंग के खिलाफ कानून पर मुहर लगी.

महिलाओं के खिलाफ होने वाला एक ऐसा अपराध (Crime Against Women), जिसमें कई बार पीड़िता को पता भी नहीं चलता कि उसका शोषण हुआ. इंग्लैंड (England) में इसी साल इसके खिलाफ कानून बना लेकिन जर्मनी (Germany) में अब तक नहीं.

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एक ऐसा अपराध, जो किसी महिला के साथ कहीं भी हो सकता है जैसे सीढ़ियां चढ़ते वक्त, बस या ट्रेन में यात्रा करते वक्त या राह चलते भी. विडंबना ये भी है कि ज़रूरी नहीं कि हर बार अपराध के समय युवती या महिला को तुरंत पता चल ही जाए कि उसके साथ शोषण (harassment) हुआ है. इस तरह के एक खास किस्म के अपराध को अपस्कर्टिंग (Upskirting) कहा जाता है, जिसे लेकर यूरोप में हंगामा (Europe) मचा हुआ है क्योंकि यहां कई महिलाएं रोज़मर्रा के जीवन में पीड़ित हैं लेकिन इसके खिलाफ कोई ठोस कानून (Criminal Law) नहीं है.

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यूरोप में महिलाओं का स्कर्ट पहनकर घूमना आम बात है. अब स्कर्ट पहनी किसी महिला या युवती की ऐसी तस्वीर चुपके से खींच लेना (Without Consent) जो अश्लील (Obscene Photo) हो यानी मोबाइल फोन से (आम तौर से सेल्फी स्टिक के ज़रिए) को महिला के पैरों के पास रखकर कपड़ों के भीतर की तस्वीर खींचना, इसे अपस्कर्टिंग कहते हैं. इसी साल की शुरूआत में इंग्लैंड में इस अपराध के खिलाफ सख्त कानून का प्रावधान (UK Law) किया गया लेकिन जर्मनी में अब भी यह गैरकानूनी नहीं माना जा रहा है. जर्मनी में दो युवतियों ने इसे अपराध और इसके लिए सख्त सज़ा के प्रावधान बनाए जाने की मांग को लेकर मुहिम (Online Campaign) छेड़ दी है.

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क्या है पीड़ितों की तकलीफ?
अपस्कर्टिंग के खिलाफ सख्त कानून की मांग कर रही 28 वर्षीय हैना सिडेल का कहना है कि पहली बार उनके साथ इस तरह का शोषण 13 साल की उम्र में हुआ था और फिर 16 साल की उम्र में भी. यूरोप में महिलाएं कई बार इस तरह के शोषण की शिकार होती हैं लेकिन उन्हें समय पर पता तक नहीं चल पाता.

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डीडब्ल्यू नामक वेबसाइट ने ये फोटो जारी कर समझाया है कि किस तरह से अपस्कर्टिंग को अंजाम दिया जाता है.

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हैना कहती हैं 'आप कहीं हों, ये आपके साथ हो सकता है. और आपको पता भी नहीं है कि इन तस्वीरों का क्या होगा? ये किसी पॉर्न साइट पर जाएंगी या किसी इंटरनेट फोरम पर या कोई अपनी कुंठा की संतुष्टि के लिए इनका क्या प्रयोग करेगा?' हैना अपनी तरह एक और पीड़िता इडा मैरी के साथ मिलकर इस अपराध को यौन शोषण की श्रेणी के अपराध के रूप में दर्ज करने के लिए संघर्षरत हैं.

इंग्लैंड में कैसे बना कानून?
इसी साल इंग्लैंड और वेल्स में इस अपराध को सेक्सुअल हैरसमेंट वाले अपराध की श्रेणी में माना गया लेकिन इसके लिए लंबी जंग लड़ी गई. पहले अपस्कर्टिंग को सार्वजनिक अश्लीलता और वॉइयूरिज़म यानी दर्शनसुख की श्रेणी में रखने की वकालत हुई लेकिन सार्वजनिक अश्लीलता के आरोप साबित करने के लिए किसी चश्मदीद की ज़रूरत होती थी और दर्शनसुख के आरोप ​साबित करने के लिए वीडियो को ही दायरे में रखा गया था.

अपस्कर्टिंग की एक शिकार ने इसे गंभीर अपराध की श्रेणी में दर्ज करवाने के लिए लड़ाई लड़ी और आखिरकार इस साल जनवरी में इंग्लैंड ने इसे गैरकानूनी घोषित कर दोषसिद्ध होने पर दो साल तक की सज़ा का प्रावधान किया. इसके साथ ही ऐसे आरोपी को सेक्स अफेंडर की सूची में दर्ज किए जाने संबंधी प्रावधान बनाया गया.

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जर्मनी की अपस्कर्टिंग की शिकार रहीं हैना और मैरी ने मिलकर इस अपराध के खिलाफ एक मुहिम छेड़ी है.


किन देशों ने माना गंभीर अपराध?
जर्मनी सहित यूरोप के कई देश अपस्कर्टिंग को गंभीर यौन अपराध मानने के लिए जहां संघर्ष कर रहे हैं, वहीं कुछ देशों में यह यौन शोषण के दायरे का अपराध माना जाता है. अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के कई राज्यों समेत भारत में अपस्कर्टिंग गैरकानूनी है. स्कॉटलैंड में 2010 में इसे लेकर कानून बनाया गया था. न्यूज़ीलैंड में भी इस अपराध को लेकर प्रावधान हैं.

अपस्कर्टिंग की तस्वीरों के तथ्य
स्कर्ट के भीतर की तस्वीरें खींचने को लेकर ऐसी रिपोर्ट्स आ चुकी हैं कि ये कई बार बेहद अश्लीलता की हद तक गया है. इंडिपेंडेंट की खबर के अनुसार इस तरह की तस्वीरें खींचने के लिए कुछ युवकों को समय समय पर जूतों में गुप्त कैमरे फिट किए हुए तक पकड़ा गया है. इसके अलावा, अपस्कर्टिंग फोटो को लेकर खास तौर से वेबसाइट्स भी सक्रिय हैं. एक और खास तथ्य है कि फोन कैमरा से फोटो क्लिक करते हुए आवाज़ आए तो गुप्त फोटोग्राफी काबू की जा सकती है इसलिए सिर्फ ऐसे ही फोन जापान में कानूनी हैं.

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First published: August 28, 2019, 9:23 PM IST
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