जानिए, क्यों जापान में लड़कियां खून के धब्बों से सने कपड़े पहन रही हैं

जापानी युवतियां अजीबोगरीब कपड़े और मेकअप में दिखने लगी हैं- सांकेतिक फोटो (pxfuel)
जापानी युवतियां अजीबोगरीब कपड़े और मेकअप में दिखने लगी हैं- सांकेतिक फोटो (pxfuel)

परंपरागत सोच वाले देश जापान में यामी कवई (Yami kawaii in Japan) नाम से एक फैशन ट्रेंड कर रहा है. इसका खुदकुशी से सीधा संबंध है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 11, 2020, 12:56 PM IST
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जापान की सड़कों पर बहुत सी युवतियां अजीबोगरीब कपड़े और मेकअप में दिखने लगी हैं. उनके कपड़ों पर खून के धब्बे होते हैं, आंखों के नीचे काले घेरे और गले में खूनभरी सीरींज. टीशर्ट पर लिखा होता है कि मैं मरना चाहती हूं. ये जापान का नया फैशन है, जिसे यामी कवई (Yami kawaii) कहा जा रहा है. ये फैशन डिप्रेशन (Japan's fashion talks about depression) से जुड़ा हुआ है. बता दें कि जापान में कुछ सालों के भीतर युवतियों में खुदकुशी की दर तेजी से बढ़ी है. जानिए क्या है यामी कवई का खुदकुशी से ताल्लुक.

क्या है ये कल्चर
यामी कवई दो जापानी शब्दों से मिलकर बना है- यामी का मतलब है बीमार और कवई यानी क्यूट. फैशन की इस नई श्रेणी के तहत डिप्रेशन को बोलने को कोशिश की जा रही है. जापान की गलियों में ढेरों लड़कियां इस तरह से तैयार दिखती हैं, जिसमें खून के धब्बों और कलाई पर पट्टी से लेकर मौत की बात लिखी होती है. वे इस तरह से बताना चाह रही हैं कि उनके भीतर भी मौत के इरादे आ रहे हैं और उन्हें मदद चाहिए. साल 2015 में ये टर्म ईजाद हुई थी लेकिन अब जापान में इसकी लोकप्रियता बढ़ी है.

जापान में डिप्रेशन या खुदकुशी के इरादे पर बात करना अच्छा नहीं माना जाता- सांकेतिक फोटो (Pixabay)

जापान में आत्महत्या का प्रतिशत


इसकी वजह है जापानी युवतियों में बढ़ता डिप्रेशन और आत्महत्या. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में नेशनल पुलिस एजेंसी के हवाले से इसपर आंकड़े दिए गए. इसके अनुसार अगस्त महीने में ही देशभर में 1,854 रिपोर्टेड मामले आत्महत्या के थे. ये आंकड़ा पिछले साल के अगस्त से 16% ज्यादा है. इसमें भी महिलाओं में आत्महत्या की दर में 40% की बढ़त है.

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फैशन के जरिए हो रही बात
चूंकि जापान में डिप्रेशन या खुदकुशी के इरादे पर बात करना अच्छा नहीं माना जाता इसलिए वहां इसे जताने के लिए युवाओं ने यामी कवई नाम से फैशन ही निकाल लिया. डीडब्ल्यू से बातचीत के दौरान इस बारे में टोक्यो के फैशन क्रिटिक मिशा जैनेट कहती हैं कि जो लोग यामी कवई फैशन को फॉलो करते हैं, वे एक तरह से बताना चाह रहे हैं कि वे भीतर से कितने परेशान हैं. केवल अपने ही लिए नहीं, बल्कि अपने आसपास डिप्रेशन के दूसरे मरीजों के लिए भी वे इस फैशन का इस्तेमाल कर रहे हैं.

जापान में खुदकुशी की दर इतनी ज्यादा क्यों है, इसपर लगातार पड़ताल हो रही है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


कुल मिलाकर ये फैशन संवाद का जरिया बन गया है. इसकी मदद से मेंटल हेल्थ पर बात हो रही है. सबसे पहले इस तरह के फैशन का जिक्र लेखक Ezaki Bisuko ने किया था. लेखक का बचपन काफी मुश्किलों में बीता था और वे कई तरह की हिंसा का शिकार होने के बाद मेंटल इलनेस से जूझ रहे थे. इसी दौरान उन्होंने स्कूलों बच्चों में फैशन के जरिए इसकी बात की.

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क्यों जापानी युवा आत्महत्या की ओर
जापान में खुदकुशी की दर इतनी ज्यादा क्यों है, इसपर भी लगातार पड़ताल हो रही है. जापान में मरने के इस कदम को जिम्मेदारी उठाने की तरह देखा जा रहा है. इस देश में इन्श्योरेंस नियम खुदकुशी के बाद मरने वाले का कर्ज चुकाते हैं. युवा इसे इसी तरह से लेते हैं कि जब सारे कदम फेल हो जाएं तो मरने पर इन्श्योरेंस कंपनी कर्ज चुका देगी.

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काम का एडिक्शन भी ले रहा जान 
वैसे कोरोना के दौर में जापान में आत्महत्या की दर में कमी आई है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक फरवरी से जून में आत्महत्या की औसत दर में 13.5 कमी दिखी. जापान में आत्महत्या में तेजी से गिरावट के पीछे कई कारण गिनाए जा रहे हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि काम के घंटों का कम होना. बता दें कि हिरोशिमा-नागासाकी झेल चुके और लगातार बाढ़ या भूकंप जैसी आपदाएं झेलते आए इस देश में लोगों में काम की आदत एडिक्शन बन चुकी है. वे दिन के औसतन 16 घंटे काम करते हैं.

जापान में मरने के कदम को जिम्मेदारी उठाने की तरह देखा जा रहा है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


कोरोना का पड़ा अच्छा असर
कोरोना के दौरान कंपनियों ने अच्छा कदम उठाते हुए काम के घंटे जबरन कम कर दिए. काम के घंटों में लगभग 20 प्रतिशत कटौती की गई ताकि कर्मचारी परिवार के साथ वक्त बिताएं. इसके अलावा सरकार ने हरेक को लगभग 940 डॉलर की रकम दी ताकि वो अपनी जरूरत के मुताबिक खर्च करे. यहां तक कि कंपनियों को भी सब्सिडी मिली. इसके बाद देखा गया कि प्री-पेंडेमिक पीरियड की बजाए कोरोना के वक्त में लोगों के दिवालिया होने में गिरावट आई.

हालांकि स्टडी का एक और पहलू भी है. शोधकर्ता के मुताबिक साल 2005 में कैटरिना हरिकेन के बाद भी जापान में आत्महत्या की दर गिरी थी. लेकिन कुछ ही समय बाद ये दोबारा बढ़ गई थी. इसकी वजह ये भी हो सकती है कि डिजास्टर के तुरंत बाद सरकार से और सामाजिक सहायता मिली लेकिन उसके बंद होने के साथ ही खुदकुशी की दर दोबारा बढ़ गई.
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