Birthday Karl Marx : प्रेमिका जेनी को लव लेटर में क्या लिखा था मार्क्स ने

कार्ल मार्क्स का एक भावनात्मक पक्ष था और ये भी उनके चिंतन की तरह ही मजबूत था.

कार्ल मार्क्स का एक भावनात्मक पक्ष था और ये भी उनके चिंतन की तरह ही मजबूत था.

जर्मन फिलास्फर और इकोनॉमिस्ट कार्ल मार्क्स का आज जन्मदिन है. वो 05 मई 1818 को जर्मनी के प्रुशिया में पैदा हुए थे. कार्ल के चिंतन का असर दुनियाभर में बड़े वर्ग तक पड़ा. उनका ये चिंतन कालजयी बन गया कि दुनिया में दो ही वर्ग हैं-पूंजीवादी और श्रमिक. मार्क्स का एक और भावनात्मक पक्ष भी था, जिसे देखने की कोशिश करते हैं.

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कार्ल मार्क्‍स का का जन्म 05 मई 1818 को जर्मनी के ट्रिएर नाम के शहर में था, जो प्रुशिया में आता था. आमतौर पर उनका नाम आते ही जेहन में एक धीर गंभीर दार्शनिक,लेखक और चिंतक की छवि उभरती है. मार्क्स का अपना एक भावनात्मक पक्ष भी था. उन्होंने अपनी प्रेमिका जेनी से टूटकर प्यार किया. बाद में उससे शादी भी की.

वे एक सच्‍चे कामरेड होने के साथ साथ बेहद संवेदनशील प्रेमी,पति,पिता और मित्र भी थे.  उनका जीवन बेहद उतार चढ़ाव भरा था. इसके बावजूद उनके दिल में इंसानियत के लिए और हर इंसानी रिश्‍ते के लिए अथाह प्‍यार भरा था.

पत्नी के निधन के दो साल बाद ही मृत्यु 

ये बात उनके लिखे पत्रों से भी पता लगती है. प्रेमिका जेनी के बगैर वो रह नहीं पाते थे. जब उससे अलग होते थे तो उसे पत्र लिखते थे. बाद में उन्होंने जेनी से शादी की. जेनी का निधन 1881 में हुआ. इसके दो साल बाद मार्क्स की भी इंग्लैंड में मृत्यु हो गई.


मार्क्‍स को जेनी से बहुत प्‍यार था. उनकी 07 संतानें हुईं. उन्होंने जेनी से बेइंतिहा प्यार के चलते अपनी हर लड़की के नाम के साथ जेनी जरूर जोड़ा.  21 जून  1865 काे जेनी के लिए लिखा गया कार्ल मार्क्स का लव लेटर.

मार्क्स का लव लेटर



मेनचेस्टर, 21 जून  1865

मेरी दिल अज़ीज़,

देखो, मैं तुम्हें फिर से खत लिख रहा हूँ. जानती हो क्यों? क्योंकि मैं तुमसे दूर हूँ और जब भी मैं तुमसे दूर होता हूँ तुम्हें अपने और भी करीब महसूस करता हूँ. तुम हर वक़्त मेरे जेहन में होती हो और मैं बिना तुम्हारे किसी भी प्रतिउत्तर के तुमसे कुछ न कुछ बातें करता रहता हूँ,

ये जो छणिक दूरियां होती हैं न प्रिय, ये बहुत सुन्दर होती हैं. लगातार साथ रहते-रहते हम एक-दूसरे में, एक-दूसरे की बातों में, आदतों में इस कदर इकसार होने लगते हैं कि उसमें से कुछ भी अलग से देखा जा सकना संभव नहीं रहता. फिर छोटी छोटी सी बातें, आदतें बड़ा रूप लेने लगती हैं, चिडचिड़ाहट भरने लगती हैं. लेकिन दूर जाते ही वो सब एक पल में कहीं दूर हो जाता है, किसी करिश्मे की तरह दूरियां प्यार की परवरिश करती हैं ठीक वैसे ही जैसे सूरज और बारिश करती है नन्हे पौधों की. ओ मेरी प्रिय, इन दिनों मेरे साथ प्यार का यही करिश्मा घट रहा है. तुम्हारी परछाईयां मेरे आसपास रहती हैं, मेरे ख्वाब तुम्हारी खुशबू से सजे होते हैं. मैं जानता हूँ कि इन दूरियों ने मेरे प्यार को किस तरह संजोया है, संवारा है.

जेनी और युवा मार्क्स


जिस पल मैं तुमसे दूर होता हूँ मेरी प्रिय, मैं अपने भीतर प्रेम की शिद्दत को फिर से महसूस करता हूँ, मुझे महसूस होता है कि मैं कुछ हूँ. ये जो पढ़ना-लिखना है, जानना है, आधुनिक होना है ये सब हमारे भीतर के संशयों को उजागर करता है, तार्किक बनाता है लेकिन इन सबका प्यार से कोई लेना-देना नहीं. तुम्हारा प्यार मुझे मेरा होना बताता है, मैं अपना होना महसूस कर पाता हूँ तुम्हारे प्यार में.

इस दुनिया में बहुत सारी स्त्रियाँ हैं, बहुत खूबसूरत स्त्रियाँ हैं लेकिन वो स्त्री सिर्फ तुम ही हो जिसके चेहरे में मैं खुद को देख पाता हूँ. जिसकी एक एक सांस, त्वचा की एक एक झुर्री तुम्हारे प्यार की तस्दीक करती है, जो मेरे जीवन की सबसे खूबसूरत याद है. यहाँ तक कि मेरी तमाम तकलीफों और जीवन में होने वाले तमाम अपूरणीय नुकसान भी उन मीठी यादों के साये में कम लगने लगते हैं.

मैं तुम्हारी उन प्रेमिल अभिव्यक्तियों को याद करता हूँ, तुम्हारे चेहरे को चूमते हुए अपने जीवन की तमाम तकलीफों को, दर्द को भूल जाता हूँ...

विदा, मेरी प्रिय. तुम्हें और बच्चों को बहुत सारा प्यार और चुम्बन...

तुम्हारा

मार्क्स
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