क्या हैं नेपाल की Menstruation Huts, जिन्हें लेकर विवाद हो गया है

छाउपडी प्रथा के तहत नेपाल के कई समुदाय पीरियड के वक्त महिलाओं को अपवित्र मानते हैं. वे इस दौरान महिला को उसके घर से दूर एकांत झोपड़ी में रहने के लिए छोड़ देते हैं.

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Updated: February 8, 2019, 6:57 PM IST
क्या हैं नेपाल की Menstruation Huts, जिन्हें लेकर विवाद हो गया है
सांकेतिक तस्वीर
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Updated: February 8, 2019, 6:57 PM IST
नेपाल की ‘छाउपडी’ प्रथा एक बार फिर चर्चा में है. छाउपडी प्रथा के तहत नेपाल के कई समुदाय पीरियड के वक्त महिलाओं को अपवित्र मानते हैं. वे इस दौरान महिला को उसके घर से दूर एकांत झोपड़ी में रहने के लिए छोड़ देते हैं. यह प्रथा नेपाल में गैर-कानूनी घोषित की जा चुकी है. नेपाल सरकार ने ‘छाउपडी’ को पिछले साल अगस्त में अपराधिक करार दिया था. इसके दोषियों को तीन महीने की जेल की सजा या 3,000 रुपए जुर्माने का प्रावधान था.

कानून बनाने और जागरूकता अभियान चलाने के बाद भी यह परंपरा देश के दूर-दराज के इलाकों में अब भी प्रचलित है.

अब क्यों चर्चा में है
फिलहाल यह इसलिए चर्चा में है क्योंकि ‘छाउपडी’ प्रथा के तहत झोपड़ी में रह रही 35 वर्षीय महिला और उसके दो बेटों की मौत हो गई है. यह घटना नेपाल के बाजुरा जिले की है. जिन बच्चों की मौत हुई उनमें एक 9 और दूसरा 12 साल का था. ‘छाउपडी’ की वजह से इस साल मरने वाली ये चौथी औरत थी.

काठमांडू पोस्ट की खबर के मुताबिक, मरने वाली महिला के पीरियड का चौथा दिन था. उन्होंने ठंड की वजह से झोपड़ी को गर्म रखने के लिए अंदर आग जला रखी थी. कहा जा रहा है झोपड़ी बिना खिड़की वाली थी. महिला और बच्चों की मौत दम घुटने की वजह से हुई है.



खबर में कहा गया है, ग्रामीणों को संदेह है कि झोपड़ी को गर्म रखने के लिए उन्होंने अंदर आग जलाई थी. उनकी मौत अलाव के धुएं से दम घुटने की वजह से हुई होगी. हालांकि शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है.

पिछले साल भी 21 साल की एक महिला और 15 साल की एक किशोरी की मौत की खबर पीरियड के दौरान ही झोपड़ी में रहने के दौरान होने की खबर आई थी.
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देश के कई हिस्सो में पहले पीरियड को लेकर अलग-अलग तरह की परंपराएं प्रचलित हैं. आइए जानते हैं क्या हैं वे परंपराएं.

जब सेनेट्री पैड्स जैसी कोई चीज नहीं थी तो महिलाओं को पांच दिनों (या एक सप्ताह) तक खुले में खून बहने के लिए मजबूरन रहना पड़ता था. इस दौरान उन्हें राहत देने के लिए कुछ रस्में शुरू की गईं, जिससे उन दिनों में उनके शरीर को आराम मिल सके. बदलते वक्त और विज्ञान की प्रगति के साथ पीरियड के लिए उचित उपाय तो उपलब्ध हुए, लेकिन कुछ पिछड़े इलाकों में ये परंपराएं आज भी हैं.

कर्नाटक
कर्नाटक  में 'पहले पीरियड' के दौरान घर और पड़ोस की औरतें लड़की की आरती उतारती हैं और गाने गाती है. उसके बाद लड़की को तिल और गुड़ से बनी डिश चिगली उंडे (Chigali Unde) खाने के लिए दी जाती है. माना जाता है कि इसे खाने से पीरियड में खून का बहाव बिना किसी रुकावट के होगा. इस दौरान पूजा में चढ़ाए जाने वाले नारियल और पान के पत्ते घर आए मेहमानों को दिए जाते हैं.



तमिलनाडु
यहां पर 'पहले पीरियड' के दौरान निभाई जाने वाली परंपरा कर्नाटक से बिलकुल अलग है. यहां की परंपरा बड़े स्तर पर, ठाठ-बाट से मनाई जाती है. इस परंपरा का नाम 'मंजल निरट्टू विज्हा' (Manjal Neerattu Vizha) है. ये रस्म किसी शादी के समारोह की तरह ही अदा की जाती है. इस दौरान लड़की को सिल्क की साड़ी पहनाई जाती है.



असम
असम में 'पहले पीरियड' के दौरान निभाई जाने वाली परंपरा को 'तुलोनी बिया' (Tuloni Biya) कहा जाता है. इस दौरान लड़की परिवार से अलग एक कमरे में रहती है, जहां पुरुषों को जाने की मनाही होती है. पुरुष चार दिन तक न उस कमरे में जा सकते हैं और न ही उस लड़की का चेहरा देख सकते हैं. दो जोड़ा छाली (betel nut) को लाल कपड़े में बांधकर पड़ोसी के यहां रख दिया जाता है. सात विवाहित महिलाएं (जो विधवा न हो) लड़की को नहलाती हैं. फिर वह पड़ोसी के घर में रखी छाली की पूजा करती है. लड़की को दुल्हन की तरह गहनें और जोड़े पहनाकर सजाया जाता है.



केरल
'पहले पीरियड' के शुरुआती तीन दिन तक लड़की को सबसे अलग रहना होता है. उसे एक ऐसे कमरे में रखा जाता है जहां एक दिया (लैंप) जल रहा हो. उस दिये के पास पीतल के एक बर्तन में नारियल के फूल रखे जाते हैं. माना जाता है कि उस फूल में जितनी कलियां खिलेंगी लड़की को उतने बच्चे होंगे.

असम में निभाई जाने वाली 'तुलोनी बिया' का एक और वीडियो-



क्या है पीरियड
पीरियड से हर लड़की को गुज़रना पड़ता है. पीरियड के समय स्त्री के शरीर में हॉर्मोंस रिलीज होते हैं. इन हॉर्मोंस को साइंस की भाषा में egg कहते हैं. जब ये एग टूटता है तो उसमें जमा खून और टिश्यूज वजाइना के जरिए शरीर से बाहर निकलते हैं. इस नैचुरल प्रकिया को पीरियड (माहवारी) कहते हैं. पीरियड को लड़की के यौवन की शुरुआत के रूप में भी चिह्नित किया जाता है.

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