'बांसुरी सुन ज़्यादा दूध देती है गऊ माता', क्या है भाजपा नेता के दावे का सच?

असम (Assam) राज्य के एक बीजेपी विधायक (BJP MLA) ने दावा किया तो सोशल मीडिया पर गाय (Cow) फिर चर्चा में है. जानिए कि गाय पर संगीत के असर से जुड़ा कोई शोध हुआ है या नहीं, अगर हां तो क्या नतीजा निकला.

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Updated: August 28, 2019, 6:15 PM IST
'बांसुरी सुन ज़्यादा दूध देती है गऊ माता', क्या है भाजपा नेता के दावे का सच?
गायों पर संगीत के असर को लेकर शोध हुए हैं.
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Updated: August 28, 2019, 6:15 PM IST
भाजपा के नेताओं का 'गाय प्रेम' जगज़ाहिर है और एक बार फिर एक भाजपा नेता (BJP Leader) ने गाय को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिस पर मिली जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. असम में भाजपा के विधायक दिलीप कुमार पॉल (Dilip Kumar Paul) ने सिलचर में एक लोक उत्सव (Folk Festival) के मौके पर दावा किया कि अगर 'श्रीकृष्ण (Lord Krishna) की तरह बांसुरी बजाई जाए, तो गायें ज़्यादा दूध देती हैं'. इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तरह तरह की बातें हो रही हैं लेकिन इस दावे की हकीकत क्या है? आइए आपको बताते हैं कि सचमुच इस दावे के पीछे कोई अध्ययन है या ये बेबुनियाद है.

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अस्ल में, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के करीबी माने जाने वाले पॉल ने एक मीडिया समूह से ये भी कहा कि वो कोई 'वैज्ञानिक' नहीं हैं लेकिन उन्होंने भारतीय परंपराओं (Indian Traditions) को समझा है और उनका दावा है कि 'आजकल के वैज्ञानिक' भी इस बात को मान रहे हैं. आपने सुना होगा कि पौधों के विकास में संगीत को लेकर कुछ शोध (Research) हुए हैं लेकिन क्या आप जानवरों, खास तौर से गाय के साथ संगीत के जुड़ाव (Music Impact on Cow) को लेकर हुए शोधों के बारे में कितना जानते हैं?

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संगीत सुनकर ज़्यादा दूध देती है गाय?
वास्तव में, इस विषय पर सालों पहले हुआ एक अध्ययन मिलता है. यूके की लिसेस्टर यूनिवर्सिटी के शोधार्थी मनोवैज्ञानिकों ने डेरी की गायों पर संगीत के प्रभाव से जुड़ा हुआ एक शोध किया था, जिसमें पाया गया था कि अगर शांति व आराम देने वाला संगीत बजाया जाए, तो गायें तीन प्रतिशत तक ज़्यादा दूध देती हैं. इसके उलट कानफाड़ू या शोर-शराबे वाले संगीत को सुनकर गायों के दूध देने की मात्रा पर कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन गायों में हल्की सी बेचैनी देखी जाती है.

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गायों पर संगीत के असर को लेकर ब्रिटेन में एक शोध अध्ययन हो चुका है. (तस्वीर मॉडर्नफार्मर से साभार.)

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क्या है तनाव की थ्योरी?
आप जानते हैं या नहीं, लेकिन जानवरों को भी तनाव होता है. वैज्ञानिक आधार ये है कि शांति देने वाला संगीत सुनते हुए दूध दे रही गायों में एक हॉर्मोन ऑक्सिटोसिन का स्राव होता है जो दूध देने की प्रक्रिया से जुड़ा है. अगर संगीत ऐसा है जो गायों को विचलित नहीं करता है तो गायें मगन होकर दूध देती हैं क्योंकि तनाव में नहीं होतीं.

किस तरह का संगीत है गायों को पसंद?
शोध के मुताबिक जिस संगीत को सुनकर गायों ने तीन प्रतिशत तक ज़्यादा दूध दिया था, उसमें 'एवरीबडी हर्ट्स', 'ब्रिज ओवर ट्रबल्ड वॉटर' जैसे कुछ और गानों के साथ ही क्लासिकल संगीत के कुछ पीस शामिल थे जैसे बीथोवन और मोज़ार्ट आदि की मशहूर सिंफनी.

क्या कोई बांसुरी कनेक्शन भी मिला?
जी हां. आपको ताज्जुब होगा लेकिन इस शोध में बांसुरी वादन सुनने वाली गायों के ज़्यादा दूध देने की बात सामने आई. मॉडर्न फार्मर नाम की एक पत्रिका ने अपने लेख में इस स्टडी के हवाले से लिखा था कि मोज़ार्ट रचित बांसुरी और हार्प वादन के कॉंसर्ट का पीस डेरी की गायों को सुनाया गया था, जिसके बाद गायों से दूध ज़्यादा मिला.

और कोई सबूत?
इस शोध के अलावा मॉडर्न फार्मर मैगज़ीन की मानें तो ब्रिटिश कोलंबिया डेरी एसोसिएशन ने 2012 ने गायों के दूध उत्पादन पर संगीत के प्रभाव से जुड़ी एक थ्योरी को लेकर एक मुकाबला आयोजित करवाया था. ये भी कहा गया कि अमेरिका की कई डेरियों में रेडियो पर अंग्रेज़ी या स्पैनिश भाषा का संगीत बजाया जाता है. कुछ डेरी संचालकों के हवाले से ये भी कहा गया कि गायें संगीत सुनकर ज़्यादा दूध देती हैं.

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गाय के दूध उत्पादन पर बांसुरी वादन का प्रभाव पड़ने वाला बयान देने वाले असम के विधायक दिलीप कुमार पॉल.


इसके बावजूद कुछ सवाल हैं जैसे क्या हर जगह की हर गाय पर एक खास तरह के संगीत का ही प्रभाव पड़ेगा, कैसे तय किया जाएगा कि कौन सा संगीत कहां की गायों के लिए बेहतर है या ये कि इस थ्योरी के लिए कितनी गायों पर शोध किया गया. इन तमाम सवालों के चलते इस थ्योरी पर कुछ लोग यकीन करते हैं, लेकिन कुछ नहीं भी.

और कैसे रहे गायों को लेकर दावे
इस पूरी कहानी के बाद भाजपाई नेता पॉल के बयान को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता क्योंकि ये बात बिल्कुल बेबुनियाद तो नहीं है, हालांकि इस बारे में व्यापक और पुख्ता शोधों की गुंजाइश अब भी महसूस की जा रही है. दूसरी ओर, पॉल से पहले उत्तराखंड के सीएम ​त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दावा किया था कि गाय इकलौता जीव है जो ऑक्सीज़न छोड़ता है. इससे पहले साध्वी प्रज्ञा के नाम से मशहूर भोपाल सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने गौमूत्र से उनके कैंसर के ठीक होने का दावा किया था. हालांकि इन दावों के पीछे किसी वैज्ञानिक आधार की कोई पुष्टि नहीं हुई थी.

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First published: August 28, 2019, 6:15 PM IST
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