10 सालों में इसरो ने किए इतने बड़े काम कि देखने वाले दंग रह गए

1969 में जब नील आर्मस्ट्रांग ने चांद पर अपने पैर रखे, तब भारत में अंतरिक्ष एजेंसी की शुरुआत हुई थी. तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू और प्रसिद्ध वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा के बीच बातचीत के बाद इसकी नींव पड़ी थी.

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: July 23, 2019, 2:30 PM IST
10 सालों में इसरो ने किए इतने बड़े काम कि देखने वाले दंग रह गए
(Photo: ISRO)
Sanjay Srivastava
Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: July 23, 2019, 2:30 PM IST
ये 1957 की बात थी. 59 सेमी के पहले सैटेलाइट स्पुतनिक-1 के प्रक्षेपण ने दुनियाभर में सनसनी मचा दी थी. अंतरिक्ष में जाकर जब उसने सिग्नल भेजने शुरू किए तो दुनिया के लिए ये एक और हैरानी थी.सनसनी भारत में भी महसूस की गई. भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और प्रसिद्ध वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा के बीच मंत्रणा हुई. 1961 में भारतीय अंतरिक्ष विभाग की नींव रखी गई. 1969 में पहली बार जब नील आम्रस्ट्रांग ने चंद्रमा पर पैर रखे तभी इसरो की शुरुआत हुई थी.
इसरो की शुरुआत तो हो गई लेकिन न साधन थे और न मुकम्मल रूपरेखा लेकिन तब से लेकर आज तक देखें तो इसरो ने भारत को अंतरिक्ष और मून मिशन की चार बड़ी महाशक्तियों में शुमार करा दिया है. इसरो अब दुनिया की शीर्ष पांच बड़ी अंतरिक्ष एजेंसियों में गिना जाता है. अमेरिका, रूस, चीन के बाद सबसे संभावनाशील स्पेस एजेंसी. पिछले दस सालों में सबसे बड़ी छलांग लगाने वाली स्पेस एजेंसी.

चंद्रयान-2 के साथ फिर जमी धाक
22 जुलाई को इसरो ने सफलता के साथ चंद्रयान को प्रक्षेपित कर एक बड़ी सफलता हासिल की है. इससे पहले पिछले दस सालों में भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने कई बड़े कामों को बहुत कम बजट में अंजाम दिया है.


  • 22 अक्टूबर 2008 को चंद्रयान-1 भेजा गया

  • 2014 में सफलतापूर्वक मंगल ग्रह पर मंगलयान भेजा. इसरो ने पहली बार में ही मंगलयान सीधे मंगल ग्रह की कक्षा में पहुंचाया. (सिर्फ 450 करोड़ रुपए खर्च)

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  • 2016 में स्वदेश निर्मित स्पेस शटल RLV-TD लांच

  • जून 2016 को रिकॉर्ड 20 सैटेलाइट का प्रक्षेपण.

  • 2017 में भारी रॉकेट GSLV MK3 लांच, जो अपने साथ 3,136 किलो वजन का कम्युनिकेशन सैटेलाइट जीसैट-19 लेकर गया.

  • 2017 में ही PSLV के जरिए एक साथ 104 सैटेलाइट लांच करके वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया.




एक के बाद एक सफलता
पहले चंद्रयान-1, फिर मंगलयान-1 और अब चंद्रयान लांच. इसरो ने पिछले कुछ सालों में हमें लगातार गर्व करने वाले लम्हे दिये हैं. अब गगनयान और फिर मानव को अंतरिक्ष के साथ चंद्रमा भेजने के लक्ष्य पर काम शुरू हो रहा है.

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चंद्रयान-1 ने ही दुनिया को दी थी ये बड़ी खोज
भारत ने नवंबर 2008 में पहले चंद्रयान को चंद्रमा की सतह पर भेजा था. इसी के जरिए पहली बार पूरी दुनिया को पता लगा कि चांद की सतह के नीचे पानी है. चंद्रयान 312 दिनों तक वहां काम करता रहा.

अब भी काम कर रहा है मंगलयान 
मंगलयान-1 की कामयाबी ने एक झटके में इसरो के प्रति लोगों की निगाहें बदल दीं. इसे वर्ष 2014 में जब लांच किया गया तो ये उस समय की सबसे बड़ी वैज्ञानिक सफलता था. इसकी उम्र केवल छह महीने मानी गई थी लेकिन ये अब यानि अब भी काम कर रहा है यानि पांचवें साल के करीब पहुंच चुका है.

Indian Space Research Organization, ISRO, Chairman, Ministry of Personnel, Approval

झटके के बाद भरपाई
अंतरिक्ष में सैटेलाइट लांच करने के लिए इसरो के पास जबरदस्त बुकिंग है. भारत की कोशिश ग्लोबल कामर्शियल सैटेलाइट लांच मार्केट में बड़ा खिलाड़ी बनने की थी. वो पूरी हो चुकी है.

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इसरो की सस्ती लांच सेवाएं
यूरोप, एशिया और लातीन अमेरिका के तमाम देशों को अपने सैटेलाइट लांच के लिए नए और सस्ते विकल्प की तलाश है. रिपोर्टों का कहना है कि भारत अन्य एजेंसियों की तुलना में 75 फीसदी कीमत पर लांच सेवाएं उपलब्ध कराता है. अब तक लांच मार्केट के आधे हिस्से पर यूरोपीय एजेसियों का कब्जा था. बाकी का हिस्सा मुख्य तौर पर रूस, अमेरिका और चीन में बंटता था लेकिन यकायक भारत के पास आने वाले ग्राहकों की संख्या बढी है. आने वाले समय में इसमें और तेजी देखने को मिलेगी.

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अंतरिक्ष अनुसंधान नए दौर में
अंतरिक्ष से संबंंधित सारे अनुसंधान अब नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं. माना जा रहा है कि आने वाले बरसों में केवल सैटेलाइट लांच की ही होड़ नहीं बढनी बल्कि अंतरिक्ष में मानवीय आवागमन भी बढेगा. सभी स्पेस एजेंसियां खुद को उसके लिए भी तैयार कर रही हैं. माना जा रहा है कि तीन-चार दशकों बाद जब पृथ्वी से प्राकृतिक संसाधन खत्म होने लगेंगे तब मानव को अंतरिक्ष और नए नए अनुकूल ग्रहों की ओर देखना होगा.

इसरो ना केवल दुनिया की पांच बड़ी स्पेस एजेंसीज में शामिल हो चुकी हैं बल्कि उसकी सेवाएं भी सबसे सस्ती हैं


सबकुछ स्वदेशी
सबसे अच्छी बात है कि इसरो ने खुद को स्वदेशी तकनीक और देसी प्रतिभाओं के बल पर खड़ा किया है। प्रक्षेपण और नई योजनाओं की जटिलता को उसके वैज्ञानिक अपने मौलिक अंदाज में सुलझाते हैं. साल दर साल भारत ने जिस तरीके से अंतरिक्ष में अपना दबादबा बढाया है, वो देश के दूसरे विभागों और प्रोजेक्ट्स के लिए उदाहरण है कि अगर हम चाहें तो क्या नहीं कर सकते. लिहाजा ये गर्व करने का समय तो है साथ ही ये सीखने का भी हमारा एक सरकारी तंत्र इतनी कुशलता और पेशेवर तरीके से भी काम करता है.

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सीमित बजट में बेहतरीन काम 
ये माना जाता रहा है कि इसरो बहुत सीमित बजट में तमाम प्रोजेक्ट्स पर काम करता है और समय से उन्हें अंजाम देता है. चंद्रयान-2 की लागतर महज 978 करोड़ थी, जबकि दूसरे देशों के ये मिशन कहीं ज्यादा धन खर्च करके पूरे हुए. फिर इसरो को जो हर साल जो बजट मिलता है, वो नासा और चीन के अंतरिक्ष प्रोग्राम की तुलना में कई गुना कम है लेकिन इसके बाद भी इसरो ने धाक जमा दी है.

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First published: July 12, 2019, 1:30 PM IST
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