क्या होता है वाटर कैनन सेल्यूट, जो राफेल को दिया गया

क्या होता है वाटर कैनन सेल्यूट, जो राफेल को दिया गया
अंबाला एयरपोर्ट पहुंचते ही राफेल विमानों का वाटर कैनन सलामी से स्वागत हुआ. (Photo Credit- IAF)

जब राफेल (Rafale) भारत पहुंचा तो अंबाला एयरबेस (Ambala Airbase) पर उन्हें वाटर कैनन सलामी (Water Cannon Salute) दी गई जो पूरी दुनिया में विमानों के साथ होता है.

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दो दिन पहले ही फ्रांस से 5 राफेल लड़ाकू विमान (Rafale Fighter Plane) भारत पहुंचे. 7 हजार किमी का सफर तय करके ये विमान भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के अंबाला एयरबेस पर पहुंचे. इनके आने से देश की वायुसेना की ताकत कई गुना बढ़ गई है. इन विमानों के आने पर उनका वाटर कैनन सेल्यूट  (Water Cannon Salute) से स्वागात हुआ.

कैसे होता है यह सेल्यूट
जब विमान अंबाला के एयरबेस पर उतरे तो गेट के पहुचने से रनवे के दोनो तरफ से फायरब्रिगेड के उकरणों से पानी की बौछार की गई जिससे पानी की तेज धार ने एक आर्च बनाया जिसके नीचे से ये विमान गुजरे. विमानों का स्वागत करने की एक परंपरा है जिसे वाटर कैनन सेल्यूट कहा जाता है. कई बार यह एक इंद्रधनुष की तरह भी दिखाई देता है और एक आकर्षक नजारा बन जाता है.

कब दी जाती है इस तरह की सलामी
आमतौर पर वाटर सलामी किसी सीनियर पायलट या एयर ट्रैफिक कंट्रोल के रिटायर होने पर, किसी एयरपोर्ट पर एयरलाइन की पहली या आखिरी उड़ान पर, किसी खास एयरक्राफ्ट की पहली या आखिरी उड़ान या किसी यादगार क्षण के लिए दी जाती है. अब यह वायुसेना में एक परंपरा बन गई है कि जब भी कोई नया विमान सेना में कार्य शुरू करता है तो उसे वाटर कैनन सलामी दी जाती है.



पहले भी दी जाती रही है इस तरह की सलामी
इससे पहले इसी साल जनवरी में जब तंजौर में ब्रह्मोस मिसाइल से सुसज्जित छह Su-30 MKI लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना में शामिल किए गए थे, तब भी उन्हें वाटर कैनन सलामी दी गई थी. इससे पहले दिसंबर 2019 में भारतीय वायुसेना के मिग-27 विमानों का दस्ते की विदाई के समय भी से वाटर सलामी दी गई थी. मिग-27 विमान भारतीय वायुसेना में 34 साल बाद रिटायर हुए थे.



पूरी दुनिया में दिया जाता है यह सैल्यूट
इतना ही नहीं अमेरिका, चीन, यूके, और अन्य कई देशों में भी वाटर कैनन सेल्यूट देने की परंपरा है. अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जब राष्ट्रपति बनने के बाद साल 2016 में पहली आधिकारिक उड़ान भरी थी तब उस समय भी उन्हें वाटर सेल्यूट दिया गया था.

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23 साल बाद खरीदे भारत ने विदेशी लड़ाकू विमान
भारतीय वायुसेना में 23 साल बाद कोई विदेशी नए लड़ाकू विमान की खरीद हुई है. इससे पहले  भारत ने साल 1997 में रूस से सुकोई लड़ाकू विमान खरीदे थे. इस बार भारत ने फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदे हैं जिसकी पहली खेप 5 विमानों के रूप में बुधवार को भारत पहुंचे हैं. बाकी विमान साल 2021 के अंत तक भारत पहुंचा दिए जाएंगे.

Rafale
राफेल विमान भारत के लिए निभाएंगे निर्णायक भूमिका (फाइल फोटो)


वायुसेना की ताकत को बढ़ाएगा राफेल
राफेल के आने से भारतीय वायुसेना की ताकत में बड़ा इजाफा होना माना जा रहा है. यह कई तरह की भूमिका निभा सकता है और मुश्किल से मुश्किल हालातों में अपने सेना का सहयोग कर लक्ष्य का संधान कर सकता है. इसकी सटीकता, राडार से न पकड़े जाने की क्षमता, हवा में ही ईंधन भरवाने की क्षमता, जैसी कई खूबियां हैं जो अपनी वायुसेना को दुश्मन के खिलाफ हर मौके पर सजग रखती हैं.

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इस वाटर कैनन सलामी जहाजों और अन्य जगहों पर भी दी जाती है जिसमें पानी फायरबोट्स की जरिए छोड़ा जाता है. यहां भी किसी जहाज की पहली और आखरी यात्रा या अन्य  समारोह के मौके पर इस तरह की सलामी दी जाती है. कई लोगों का मानना है कि वाटर कैनन सेल्यूट वास्तव में जलसेनाओं में ही शुरू हुआ था. लेकिन अब यह केवल जलसेना, वायुसेना या वायुसेवाओं तक सीमित नहीं रह गया है.
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