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अगर गलती से आपको HIV पॉजिटिव ब्लड चढ़ा दिया जाए तो आप क्या करेंगे?

News18Hindi
Updated: January 3, 2019, 11:39 PM IST
अगर गलती से आपको HIV पॉजिटिव ब्लड चढ़ा दिया जाए तो आप क्या करेंगे?
एक बार शरीर में आने के बाद HIV का वायरस कभी बाहर नहीं निकलता

रक्तदान करने वाले को डोनर कहा जाता है. डोनर से निकालने के पहले उसके शरीर से थोड़ा सा रक्त निकालकर उसे 5 बीमारियों के लिए खास तौर पर चेक किया जाता है. ये 5 बीमारियां हैं- HIV, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, सिफिलिस और मलेरिया

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  • Last Updated: January 3, 2019, 11:39 PM IST
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हाल ही की घटना है. 3 दिसंबर 2018 को तमिलनाडु के एक गांव में एक प्रेग्नेंट महिला को खून चढाने की जरूरत पड़ी. उसे खून चढ़ाया गया. खून देने वाला लड़का 19 साल का था. वो इससे पहले भी खून दे चुका था. खून देने के कुछ ही दिनों बाद उसने अपने खून की जांच करवाई तो पता चला उसका खून HIV-पॉजिटिव था! उसने तुरंत डॉक्टर से अपने रक्तदान की बात बताई. किसी तरह से उस महिला का पता लगाया गया. डॉक्टरों ने उसका ARV ट्रीटमेंट शुरू कर दिया है. इस ट्रीटमेंट के बारे में हम आपको बाद में बताएंगे, लेकिन पहले यह जानना जरूरी है कि अगर कभी आपके साथ ऐसा हो जाए तो इसका क्या इलाज है.

क्या होती है रक्तदान की प्रक्रिया:

अगर आपने कभी रक्तदान किया है तो आप जानते होंगे कि इसकी क्या प्रक्रिया होती है. रक्तदान से पहले आपसे एक फॉर्म भरवाया जाता है. इस फॉर्म में आपको अपनी मेडिकल हिस्ट्री भरनी पड़ती है. आपका वजन, पुरानी बीमरियां, एंटी-बायोटिक का सेवन वगैरह बहुत सी बातें आपको इसमें सत्यापित करनी होती हैं.

इसके बाद आपके शरीर से एक से दो यूनिट रक्त निकाला जाता है. इस निकाले गए रक्त को एक केमिकलयुक्त थैली में रखा जाता है. यह केमिकल रक्त के थक्के बनने से बचाता है. इसके बाद इस रक्त की जांच की जाती है.

क्या है रक्त जांच की प्रक्रिया:

रक्तदान करने वाले को डोनर कहा जाता है. डोनर से निकालने के पहले उसके शरीर से थोड़ा सा रक्त निकालकर उसे 5 बीमारियों के लिए खास तौर पर चेक किया जाता है. ये 5 बीमारियां हैं- HIV, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, सिफिलिस और मलेरिया. जब वो डोनर इन सभी बीमारियों से मुक्त होता है, तभी उसका रक्त निकाला जाता है.

'वंदे मातरम' से क्यों है मुस्लिमों को परहेजपूरे देश में नेशनल एड्स कंट्रोल आर्गेनाईजेशन (NACO) द्वारा दिए गए रक्त चेक करने वाले इंस्ट्रूमेंट प्रयोग किए जाते हैं. यह यंत्र WHO के सभी परिमाणों पर सही बैठने वाले होते हैं. इसके बाद इस रक्त को फिर से चेक किया जाता है. उसके बाद ही इसे किसी के शरीर में चढ़ाया जाता है.

रक्त की जांच का कितना बड़ा नेटवर्क:

NACO रक्त निकालने के बाद उसका क्वालिटी चेक करवाता है. इसके लिए तमिलनाडु में CMC वेल्लूर हॉस्पिटल में उसका टाई-अप है. इसके अलावा सरकार द्वारा तमिलनाडु में ही 89 प्राइवेट ब्लड बैंक हैं जहां हर साल 8 लाख से ज्यादा लोग रक्तदान करते हैं.

ये हैं HIV का वायरस


फिर गलती कहां होती है?

इतने अच्छे प्रबंधों के बाद भी गलती कहां और कैसे होती है? प्रेग्नेंट महिला को HIV पॉजिटिव रक्त चढाने के मामले की जांच चल रही है. इस तरह के मामलों में 2 तरह से गलती हो सकती है. पहला यह कि इंसानी तौर पर रक्त की जांच में गलती रह गई हो या दूसरा कि जांच करने वाले यंत्रों में कुछ गड़बड़ी थी. कई बार रक्त इकठ्ठा करने वालों की लापरवाही से नेगेटिव की जगह पॉजिटिव हो जाना भी संभव हो सकता है.

HIV और AIDS में क्या अंतर होता है?

यह सवाल आपमें से बहुत लोगों के मन में होता है. क्या HIV+ होना ही AIDS होना है? जी नहीं. यदि किसी व्यक्ति का रक्त HIV पॉजिटिव है तो जरूरी नहीं उसे AIDs हो जाएगा. इसे ऐसे समझिए कि जब रक्त में HIV नाम का वायरस आ जाता है तो उस रक्त को HIV पॉजिटिव रक्त कहते हैं. लेकिन जब यह वायरस रक्त में फैलकर व्यक्ति को इस स्थिति में पहुंचा देता है कि उसके शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता ही ख़त्म हो जाती है, तब उस स्थिति को AIDS (अक्वायर्ड इम्यूनोडेफिशियेंसी सिंड्रोम) कहते हैं. HIV पॉजिटिव होने के बाद कोई व्यक्ति AIDS की स्थिति में 2 महीने में भी पहुंच सकता है तो कोई 40 साल तक भी इसके साथ रह सकता है. इसका अभी तक कोई इलाज नहीं है. हां लेकिन अब ऐसी दवाएं बना ली गई हैं जो इस वायरस के बढ़ने को रोकती हैं.

 क्या है ARV ट्रीटमेंट जो अब उस प्रेग्नेंट महिला को दिया जा रहा है:

यह इलाह बहुत सी दवाओं का कॉम्बिनेशन है. अगर शुरुआत में ही पता चल जाए कि किसी का रक्त HIV+ है तो उसे यह दवाएं दी जाती हैं. यह दवाएं ना ही HIV वायरस को मार सकती हैं ना ही शरीर से बाहर निकाल सकती हैं. लेकिन यह उसकी वृध्दि को रोक देती हैं. इससे पेशेंट एक अच्छी और स्वस्थ जिंदगी बिता सकता है.

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First published: January 3, 2019, 11:27 PM IST
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