ये लक्षण दिखें तो समझिए मौत करीब है

कई बार ऐसा भी देखा गया है कि मरने से पहले ऐसे लोगों की याद्दाश्त वापस आ जाती है, जो बहुत पहले ही सबकुछ भूल चुके होते हैं.

News18Hindi
Updated: November 9, 2018, 8:08 AM IST
ये लक्षण दिखें तो समझिए मौत करीब है
प्राकृतिक मौत के वक्त इंसानों में आ जाते हैं कई सारे बदलाव
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Updated: November 9, 2018, 8:08 AM IST
हाल ही में पाकिस्तान में रहने वाली ईसाई महिला आसिया बीबी को 8 साल के मौत के इंतजार के बाद रिहा किया गया है. इससे पहले उन्हें पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने ईशनिंदा के एक आरोप में बरी कर दिया था. लेकिन उनके लिए अपनी मौत का इंतजार करते ये 8 साल कैसे रहे होंगे, सोचने वाली बात है. मौत, हमारी दुनिया के सबसे डरावने और रहस्यमयी विषयों में से एक रही है. बल्कि ज्यादातर सभ्यताओं में लोग इस शब्द को दोहराना भी बुरा मानते हैं.

हमने भी अपने आस-पास या स्क्रीन पर लोगों को मरते हुए देखा है और उससे जुड़े कई सारे मिथकों को भी सुन रखा है. ऐसे में मौत कैसी होती है, इसके लक्षण क्या होते हैं, इसे जानने की इच्छा सबमें होती है. 'मौत' विषय पर बियांका नोगार्डी ने एक किताब लिखी है. जिसका नाम था, 'द इंड: द ह्यूमन एक्सपीरियंस ऑफ डेथ'. इस किताब को लिखने के दौरान उन्होंने ऐसे बहुत से लोगों को भी ऑब्जर्व किया जिनकी मौत होने वाली थी. हम आपको बता रहे हैं कि प्राकृतिक मौत के लक्षण क्या-क्या होते हैं -

>> अक्सर मौत के समय के करीब आने के साथ लोगों की खुराक कम होती जाती है. कई बार जब मौत बहुत ज्यादा पास आ जाती है तो उनका किसी पेय पदार्थ को पीना भी बंद हो जाता है.

>> लोग मौत के करीब आने पर ज्यादा से ज्यादा सोना शुरू कर देते हैं. और कई सारे मामलों में देखा गया है कि वे बेहोश हो जाते हैं और कुछ देर में बेहोशी से वापस भी आ जाते हैं.

>> कई बार जिनकी मौत होने वाली होती है, उनकी सांसें तेज-तेज या धीरे-धीरे चलने लगती हैं. बहुत प्रमुखता से ऐसा बदलाव न भी हो तो भी उनकी सांसों में अंतर साफ महसूस हो जाता है.

>> जिसकी मौत होने वाली होती है, आप उसकी सांसों को साफ सुन सकते हैं. आपको ऐसे शख्स के पास कई बार लग सकता है कि उसने सांस लेना बंद कर दिया है लेकिन वह फिर से सांस लेने लगता है. ऐसा उनके गले में लार जाम हो जाने के चलते होता है.

>> जो लोग मरने वाले होते हैं, उनके अंग खासकर, हाथ या पैर ठंडे पड़ने लगते हैं.
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>> इसके अलावा मरने वाले लोगों के अंगों का रंग भी गुलाबी से बदलकर चमकीला गुलाबी या हल्के ग्रे जैसा होने लगता है.

>> कई बार मरने वाले लोगों का शरीर चिपचिपा भी होने लगता है या उनके बालों के पास से चिपचिपी चीज निकलती है.

>> कई बार भले ही मरने वाला कोई प्रतिक्रिया न कर रहा हो लेकिन ऐसे सबूत वैज्ञानिकों ने जुटाए हैं कि वह तब भी आसपास के लोगों को सुन सकता है. वे मानते हैं कि यह कुछ-कुछ वैसी ही अवस्था होती है जैसी वह सपने में हो.

>> यह भी पाया गया है कि इस अवस्था में लोग किसी स्पर्श के लिए बहुत ज्यादा सेंसेटिव हो जाते हैं. ऐसे में अच्छा होता है अगर उन्हें धीरे से छुआ जाये.

>> एक खास बात वैज्ञानिकों को यह पता चली है कि मौत के तुरंत पहले मरने वालों के चाहने वालों को एक तोहफा मिल सकता है. माने अगर किसी को अल्जाइमर, डाइमेंसिया या ब्रेन ट्यूमर जैसी बीमारी है. जिसके चलते वह अपने चाहने वालों से कई दिनों से अच्छे से बात नहीं कर सका है तो हो सकता है मौत से तुरंत पहले उसे सारी बातें याद आ जाएं. इसे मेडिकल भाषा में 'लाइटनिंग अप' या 'टर्मिनल ल्यूसिडिटी' भी कहते हैं. 1833 से ही यह शब्द प्रयोग में है. ऐसे में मरने वाले लोगों को पूरी तरह से पहचानने लगते हैं. यहां तक कि वैज्ञानिक मानते हैं कि वे मरने से तुरंत पहले आपकी किसी बात पर हंस सकते हैं या खुद भी मज़ाक कर सकते हैं.

>> कई मामलों में ऐसा भी देखा गया है कि जिन लोगों की मौत होने वाली होती है, वे कमरे में किसी खास या अज्ञात के मौजूद होने की बात करते हैं. इसके अलावा कई बार वे किसी ऐसे से बात भी करते हैं जो बहुत पहले ही मर चुका होता है. यह व्यक्ति कोई भाई-बहन, पति-पत्नी या दोस्त हो सकता है. कई बार लोग देवी-देवातओं से भी बात करते हैं. लेकिन इनपर हुए अध्ययनों में पाया गया है कि वे ऐसा सपने जैसी अवस्था में ही कर रहे होते हैं. और ऐसा होना उनके लिए बहुत ही सकारात्मक अहसास होता है.

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