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राम जन्मभूमि केस : फैसले से पहले ही CJI हो गए रिटायर तो क्या होगा! जानिए किन तरीकों से आ सकता है फैसला

राम जन्मभूमि केस : फैसले से पहले ही CJI हो गए रिटायर तो क्या होगा! जानिए किन तरीकों से आ सकता है फैसला

केस में शामिल एक पक्ष सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कोर्ट में हलफनामा देते हुए केस से हटने की बात कही है. File Photo )

केस में शामिल एक पक्ष सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कोर्ट में हलफनामा देते हुए केस से हटने की बात कही है. File Photo )

एक विशेष केस के लिए क्या चीफ जस्टिस (Chief Justice of India) का कार्यकाल बढ़ाए जाने की गुंजाइश वाकई है? संविधान (Constitution) विशेषज्ञों की राय में जानें कि कैसे संभव होगा अयोध्या मामले (Ayodhya Case- Ram Janmabhumi) पर फैसला.

  • News18Hindi
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राम जन्मभूमि मंदिर (Ram Janmbhoomi) और बाबरी मस्जिद (Babri Masjid) से जुड़े मामले में मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) की एक संविधान पीठ रोज़ाना सुनवाई कर रही है. सुनवाई के 32वें दिन यानी कल गुरुवार को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई (CJI Ranjan Gogoi) ने संकेत दिया कि पीठ की इच्छा है कि 18 अक्टूबर तक सुनवाई पूरी की जा सके. असल में न्यायमूर्ति गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं इसलिए उनका विचार है कि इस तारीख तक सुनवाई पूरी न हुई तो रिटायरमेंट (CJI Retrirement) से उनके फैसले देने की उम्मीद बेहद कम होगी. अब सवाल ये है कि अगर किसी कारण से न्यायाधीश गोगोई के रिटायरमेंट तक ये फैसला नहीं हुआ क्या होगा?

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इस सवाल से कई पहलू सामने आते हैं. मसलन, क्या इस केस (Ram Mandir Case) के लिए किसी तरह, किसी प्रावधान के चलते सीजेआई का कार्यकाल (CJI Term of Office) बढ़ाया जा सकता है? अगर नहीं, तो फिर मामले की सुनवाई (Hearing) और फैसले (Verdict) के लिए क्या प्रावधान हैं? इनमें कितना समय लग सकता है और फैसले की तरफ बढ़ते हुए किस पायदान तक पहुंचकर क्या स्थितियां बन सकती हैं? सबसे पहले चीफ जस्टिस के रिटायरमेंट और कार्यकाल के बारे में जानते हुए इस पूरे विमर्श को समझते हैं.

क्या बढ़ सकता है CJI का कार्यकाल?
इस सवाल के जवाब में सबसे पहले आपको ये जानना चाहिए कि नियमानुसार सुप्रीम कोर्ट के जज के लिए 65 वर्ष की उम्र जो तय है, उसके मुताबिक़ ही जस्टिस गोगोई रिटायर हो रहे हैं यानी विशेष परिस्थिति का रिटायरमेंट नहीं है. वहीं, अबसे पहले कभी नहीं हुआ है कि सुप्रीम कोर्ट के किसी जज का कार्यकाल बढ़ाया गया हो. अब अगर उनका कार्यकाल बढ़ाने की बात आती है तो आधार क्या होगा?

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आगामी 17 नवंबर को रिटायर होने जा रहे चीफ जस्टिस रंजन गोगोई.


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एक मीडिया रिपोर्ट में भारतीय संविधान के आर्टिकल 128 का हवाला देकर लिखा गया है कि राष्ट्रपति की सहमति से जस्टिस गोगोई को केवल इस मामले की सुनवाई के लिए अतिरिक्त समय दिया जा सकता है लेकिन वे न तो किसी और मामले में दखल दे सकेंगे और न ही उनके पास चीफ जस्टिस की हैसियत होगी. लेकिन जानिए कि यह बात कितनी सही है और इसकी कितनी गुंजाइश है.

'मुझे नहीं लगता कि कार्यकाल बढ़ेगा'
सुप्रीम कोर्ट के पद्मश्री से सम्मानित सीनियर एडवोकेट डॉ. ब्रह्मदत्त ने न्यूज़18 के साथ बातचीत करते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि जस्टिस गोगोई का कार्यकाल बढ़ाए जाने की गुंजाइश होगी. इसके पीछे तर्क देते हुए संविधान के जानकार डॉ. ब्रह्मदत्त ने कहा -

आर्टिकल 128 में व्यवस्था है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के किसी जज का कार्यकाल किसी विशेष मामले की सुनवाई के चलते बढ़ाने की प्रक्रिया को अंजाम दे सकते हैं. वो भी केवल सिटिंग का अधिकार मिलता है. लेकिन, यहां तो बात खुद सीजेआई के कार्यकाल की है!


डॉ. ब्रह्मदत्त ने साफ कहा कि अगर सीजेआई का कार्यकाल बढ़ाए जाने की कोई स्थिति बनी तो वह अति विशेष होगी क्योंकि इसके लिए बेहद जस्टिफाइड तर्क और अति विशिष्ट व्यवस्था की ज़रूरत होगी. कुल मिलाकर जस्टिस गोगोई के कार्यकाल बढ़ाए जाने की गुंजाइश न के बराबर है इसलिए अब ये जानें कि उनके रिटायरमेंट तक फैसला न हुआ तो क्या होगा.

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कुष्ठ रोगियों से जुड़े सामाजिक कार्यों के लिए पद्मश्री से नवाज़े गए वरिष्ठ अधिवक्ता और संविधान विशेषज्ञ डॉ. ब्रह्मदत्त.


नई बेंच करेगी आगे की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट के प्रतिष्ठित एडवोकेट प्रशांत पटेल ने न्यूज़18 से बातचीत करते हुए कहा कि मौजूदा पीठ अगर जस्टिस गोगोई के रिटायरमेंट से पहले इस केस में फैसला नहीं दे पाती है, तो इस मामले की सुनवाई के लिए नई बेंच बनाई जाएगी और यह उसका विशेषाधिकार होगा कि वह कैसे इस मामले की सुनवाई करना चाहे. वहीं, डॉ. ब्रह्मदत्त ने भी यही व्यवस्था बताते हुए कहा कि दूसरी बेंच सुनवाई को आगे बढ़ाएगी.

फैसला लिखने और सुनाने के पेंच
डॉ. ब्रह्मदत्त के अनुसार अगर एक बार सुनवाई पूरी हो गई और बेंच ने केस को निष्कर्ष तक पहुंचा दिया तो दोबारा ओपन नहीं किया जाएगा. वहीं एडवोकेट पटेल ने इस बारे में विस्तार से बताते हुए कहा चूंकि फैसला हज़ारों पेज तक का हो सकता है इसलिए उसके लेखन में समय लगता है, उसे सुनाने में नहीं. जस्टिस गोगोई के कार्यकाल रहते अंतिम दिन तक भी अगर फैसला लिखे जाने का काम लगभग पूरा भी हो गया तो जस्टिस गोगोई ही फैसला सुनाएंगे.

साथ ही, पटेल ने बताया कि इस मामले की सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई में बनी पांच सदस्यीय पीठ का फैसला बहुमत के आधार पर होगा. और अगर किसी जज का फैसला पीठ के फैसले से अलग रहा तो, वह अलग से अपना फैसला पढ़ सकता है.

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तो क्या जस्टिस गोगोई सुना सकेंगे फैसला?
अगर 18 अक्टूबर या उसके आसपास तक सुनवाई पूरी हो जाती है तो चीफ जस्टिस गोगोई के फैसला सुनाने की उम्मीद बढ़ जाएगी. डॉऋ ब्रह्मदत्त के शब्दों में आपको ये समझना ज़रूरी है कि 18 अक्टूबर कोई ऐसी तारीख नहीं है जिसे नियम कहा जा सके. इसका मतलब ये कि पीठ यह चाहती है कि इस तारीख तक सुनवाई पूरी हो जाए लेकिन अगर किसी पक्ष के पास कोई ज़रूरी या वैधानिक तर्क होगा तो पीठ उसे सुनने से मना नहीं करेगी.

दूसरी तरफ, अक्टूबर के महीने में छुट्टियों की भरमार भी होगी इसलिए सुनवाई कब तक पूरी होती है, यही तय करेगा कि जस्टिस गोगोई अपने रिटायरमेंट से पहले इस ऐतिहासिक केस का फैसला सुनाकर जाएंगे या फिर ये मामला नई बेंच तक पहुंचेगा.

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Tags: Ayodhya, Babri Masjid Demolition Case, CJI Ranjan Gogoi, Justice Ranjan Gogoi, Ram janam bhumi, Ram janambhumi controversy, Ram Mandir Dispute, Supreme Court, Supreme court of india

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