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जानिए, भारतीय नागरिकता पर क्या था जवाहरलाल नेहरू का नजरिया

News18Hindi
Updated: December 13, 2019, 5:05 PM IST
जानिए, भारतीय नागरिकता पर क्या था जवाहरलाल नेहरू का नजरिया
संविधान सभा की बहस में नेहरू ने नागरिकता पर अपने विचार रखे थे

नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) और भारतीय नागरिकता की बहस के बीच एक सवाल उठता है कि भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) का भारतीय नागरिकता पर क्या नजरिया था

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  • Last Updated: December 13, 2019, 5:05 PM IST
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नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) पर हंगामा मचा है. इस बिल के विरोध में नॉर्थ ईस्ट (North East) के राज्य जल रहे हैं. हिंसक विरोध प्रदर्शन (Violent Protest) की रोज तस्वीरें आ रही हैं. विपक्ष ने कानून के प्रावधानों को संविधान का उल्लंघन मानते हुए, एतराज जताया है. सुप्रीम में भी इस कानून के खिलाफ याचिका दाखिल कर दी गई है.सरकार के तमाम आश्वासनों के बाद भी नागरिकता कानून पर बहस थम नहीं रही.

नए नागरिकता कानून के मुताबिक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई धर्म के लोग भारतीय नागरिकता हासिल करने के लिए आवेदन कर सकते हैं. इन देशों में अल्पसंख्यकों पर होने वाली धार्मिक प्रताड़ना के आधार पर मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए, इन्हें नागरिकता देने की व्यवस्था की गई है. लेकिन इस व्यवस्था से मुस्लिमों को बाहर रखा गया है.

मुस्लिमों को शामिल नहीं किए जाने की वजह से इसपर सवाल उठाए जा रहे हैं. विपक्षी पार्टियां सवाल खड़े कर रही है कि ये भारत के संविधान द्वारा दिए सरकार और कानून व्यवस्था के सामने सभी लोगों को एकसमान मानने के अधिकार का उल्लंघन है. सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि वो अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव कर रही है.

नागरिकता कानून और भारतीय नागरिकता की बहस के बीच एक सवाल उठता है कि भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का भारतीय नागरिकता पर क्या नजरिया था. नेहरू ने पड़ोसी देशों के शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने के सवाल पर क्या जवाब दिया था?

शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने पर नेहरू ने दिया था जवाब
नागरिकता पर संविधान सभा में चली बहस के दौरान जवाहर लाल नेहरू से भी सवाल पूछा गया था. 8 जनवरी 1949 को संविधान सभा में हुई बहस के दौरान अलगू राय शास्त्री ने जवाहरलाल नेहरू से नागरिकता को लेकर सवाल पूछा था.

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संविधान सभा की बहस में नेहरू
अलगू राय शास्त्री इस बारे में साफ जानकारी चाहते थे कि किसे भारतीय नागरिक माना जाए और किसे नहीं. इस पर जवाब देते हुए जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि, ‘जहां तक शरणार्थियों का सवाल है. जो भी अपनेआप को भारतीय नागरिक मानता है, उसे हम भारतीय नागरिक के तौर पर स्वीकार करते हैं.’ शरणार्थियों को नागरिकता देने के मामले में नेहरू के विचार अत्यधिक उदार थे. वो इस बारे में मानवीय नजरिया रखते थे. विस्थापन के दर्द से पीड़ित एक बड़ी आबादी को देखते हुए उन्होंने संविधान सभा में अपने ये विचार रखे थे.

शरणार्थियों को नागरिकता देने पर खूब हुई थी बहस
शरणार्थियों को नागरिकता देने का सवाल संविधानसभा में खूब उछला था. 12 अगस्त 1949 को इस बारे में अपने विचार रखते हुए महबूब अली बेग ने कहा था कि ‘पाकिस्तान से विस्थापित लोगों को भारतीय नागरिकता क्यों नहीं दी जानी चाहिए? वहां इनलोगों को अत्याचार सहने पड़ रहे हैं.’ बेग ने कहा था कि पावर ट्रांसफर के वक्त दोनों देशों ने कहा था कि वो अपने यहां के अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा करेंगे. लेकिन पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ ज्यादती हो रही है. इसलिए वो भागकर भारत आ रहे हैं.

बेग ने कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि ये लोग यहां आकर साजिश करेंगे. इन्हें वापस लौटने देना नहीं चाहिए. मैं उनलोगों से कहना चाहता हूं कि इतनी संदिग्ध सोच रखकर कोई भी राष्ट्र ताकतवर नहीं बन सकता.

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जवाहरलाल नेहरू


जवाहरलाल नेहरू ने भी इस विचारधारा का समर्थन किया था. उन्होंने राष्ट्रवादी मुस्लिम की विचारधारा को सपोर्ट किया था. नेहरू का मानना था कि कई मुसलमान परिस्थितिवश दूसरी तरफ चले गए. लेकिन वहां जाने के बाद उन्होंने देखा कि उनके लिए वहां कोई जगह नहीं है. उन्हें दुश्मन की तरह देखा जा रहा है. जब पाकिस्तान में उनकी हालत दयनीय हो गई तो इनमें से कई वापस आ गए, कई मुसलमानों ने वापस लौटने की इच्छा जाहिर की.

नेहरू ने उस वक्त कहा था कि पाकिस्तान उन्हें धर्म के आधार पर दुश्मन नहीं मानता, बल्कि राष्ट्रीयता और नस्ल के आधार पर दुश्मन मानता है. नेहरू का मानना था कि इन्हें संदिग्ध नजरों से देखना क्षेत्रीय नजरिया होगा. नेहरू का मानना था कि गर्मजोशी की भावना सारे संदेहों को खत्म कर देगी.

नेहरू के इस तरह के नजरिए के लिए उनपर तुष्टिकरण के आरोप लगते रहते थे. संविधानसभा की बहस के दौरान उन्होंने इसका जवाब दिया था. नेहरू ने कहा था कि ‘मैं माननीय सदस्यों से पूछना चाहूंगा, जो मेरे बारे में तुष्टिकरण की बात करते हैं, कि क्या वो नहीं सोचते कि इनलोगों के साथ भी किसी नियम कायदे से व्यवहार होना चाहिए. वैसे भी इन्हें इंसाफ और बराबरी से कोई मतलब नहीं है.’

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First published: December 13, 2019, 4:34 PM IST
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