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इटली पर कोरोना के प्रकोप से क्या सीख सकती है दुनिया?

News18Hindi
Updated: March 22, 2020, 3:42 PM IST
इटली पर कोरोना के प्रकोप से क्या सीख सकती है दुनिया?
इटली यूरोप का पहला देश बन गई जिसे संक्रमण रोकने के लिए लॉकडाउन होना पड़ा

पिछले ही हफ्ते इटली (Italy) यूरोप का पहला देश बन गई जिसे कोरोना का संक्रमण रोकने (how to prevent coronavirus infection) के लिए पूरी तरह से लॉकडाउन (lock down) होना पड़ा. पहला मामला आने के बाद से अतबक यहां 4,825 मौतें हो चुकी हैं. इन हालातों में इटली में अब जो तरीके अपनाए जा रहे हैं, वो पूरी दुनिया के लिए सबक हैं.

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  • Last Updated: March 22, 2020, 3:42 PM IST
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कहा जाता है कि इमरजेंसी के हालातों में इटली के लोग सबसे बेहतर ढंग से काम करते हैं. ये बात इटली पर आई कई आपदाओं के दौरान साबित भी होती रही है. जैसे पिछले 5 ही सालों की बात करें तो इस देश ने भूकंप, बाढ़ से लेकर शहर के बीचों-बीच एक पुल का टूटना जैसे इमरजेंसी झेली. अब कोरोना का कहर इस देश पर जमकर बरपा है. आज तक 53 हजार से ज्यादा केस दर्ज हो चुके हैं और डेथ टोल लगातार बीते दिन को मात दे रहा है. माना जा रहा है कि कोरोना महामारी का सेंटर अब चीन से इटली शिफ्ट हो चुका है. ऐसे में इटली सरकार कई अहम फैसले ले रही है. जैसे 21 मार्च को पीएम Giuseppe Conte ने कहा कि देश के उन तमाम कारखानों को बंद किया जा रहा है, सिर्फ जरूरी उत्पादन ही चालू रहेंगे.

इससे पहले इटली में इस महामारी को उतनी गंभीरता से नहीं लिया जा रहा था, जिसका नतीजा इतना भयंकर रहा. इसी के मद्देनजर सरकार ने पूरे देश को लॉकडाउन कर और यहां तक कि उद्योगों को भी बंद करते हुए संक्रमण की रफ्तार कम करने की कोशिश की है. माना जा रहा है कि आउटब्रेक की शुरुआत में देश की सरकार ने कड़े निर्णय नहीं लिए, जैसे होम क्वेरेंटाइन का फैसला या लॉकडाउन. सबसे पहले इटली में 18 फरवरी को इसका मरीज आया. उस मरीज को पेशेंट-1 कहा जा रहा है. उसके जरिए ये वायरस सैकड़ों लोगों तक फैल गया. तब तक इटली में मरीज घूम रहे थे लेकिन कोई भी पॉजिटिव दिखाई नहीं दे रहा था. जब तक मामले सामने आने शुरू हुए, तब तक वायरस बुरी तरह से फैल चुका था.

कोरोना महामारी का सेंटर अब चीन से इटली शिफ्ट हो चुका है


23 फरवरी को एक साथ 130 लोग कोरोना पॉजिटिव मिले. इसके बाद देश के 11 शहरों को सील कर दिया गया और मिलिट्री तैनात हो गई. एक्शन तो लिया गया लेकिन तब भी सरकार वायरस के हमले के लिए तैयार नहीं थी. उसी रात पीएम Conte ने जनता से कहा कि हम पहला देश हैं जो इस हद तक नियंत्रण की कोशिश कर रहे हैं. हमारे मामले ज्यादा दिख रहे हैं क्योंकि हम ज्यादा जांच करवा रहे हैं.



सरकार के साथ ही आम लोग भी निश्चिंत रहे. मिलान शहर, में एक कैंपेन शुरू हो गया- “Milan Doesn’t Stop”. साथ ही वहां का कैथेड्रल Duomo सैलानियों के लिए खुलवा दिया गया. लोग घूमने-फिरने लगे. इधर अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही थी.

आखिरकार 8 मार्च को, जब पीएम ने इटली के उत्तरी हिस्से में लॉकडाउन की घोषणा की, तब तक 7,375 लोग कोरोना पॉजिटिव थे. तब जाकर इसे नेशनल इमरजेंसी घोषित किया गया. अगले ही दिन मरीजों की संख्या एकदम से 9 हजार पार हो गई. इसके बाद पूरे देश को लॉकडाउन किया गया और वे सारे कदम उठाए गए, जिनसे संक्रमण जहां का तहां ठहर जाए. हालांकि वैज्ञानिक मान रहे हैं कि तबतक काफी देर हो चुकी थी और एक पूरी इसकी गिरफ्त में आ चुकी थी.

यहां पर मौत के आंकड़े लगातार बीते दिन को मात दे रहे हैं


इटली में हालांकि अब भी सबसे ज्यादा मौतें हो रही हैं लेकिन ये माना जा रहा है कि ये लोग वही हैं, जो पहले ही संक्रमित हो चुके थे. अब मामला संभल सकता है. इसी बीच दुनिया इटली से सबक ले सकती है कि इमरजेंसी हालात में कैसे जनता और सरकारें मिलकर काम कर सकती हैं. पीएम Conte ने जैसे ही देश में लॉकडाउन की घोषणा की, देश के नागरिक बिना विरोध तुरंत क्वेरेंटाइन हो गए. यहां तक कि अर्थव्यवस्था चममराने की कीमत पर भी यहां पर लगभग सारे छोटे-बड़े उद्योग बंद कर दिए गए.

लॉकडाउन के दौरान देश के लोग बालकनी सिंगिंग या परफॉर्मेंस भी दे रहे हैं ताकि हिम्मत बंधी रही. आज जबकि हमारे यहां बहुत से लोग आइसोलेशन से भाग रहे हैं, इटली से ये सबक भी लिया जा सकता है. यहां तक कि सोशल मीडिया के जरिए एक-दूसरे को इनविटेशन भी दिया जा रहा है कि आज कौन अपनी बालकनी में क्या परफॉर्म कर सकता है. इसे रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया पर भी डाला जा रहा है. जो लोग कुछ भी गा-बजा नहीं रहे, वे तालियों और सीटियों से लोगों को हिम्मत दे रहे हैं.
लगभग सारे घरों पर एक पोस्टर लगा है जो कहता है “andra tutto bene” यानी सब ठीक हो जाएगा.

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First published: March 22, 2020, 3:31 PM IST
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