चीन में पैदा हुआ अनाज का भयंकर संकट, अब क्या करेगा ये देश?

चीन की जनता भुखमरी की ओर बढ़ रही है- सांकेतिक फोटो (flickr)
चीन की जनता भुखमरी की ओर बढ़ रही है- सांकेतिक फोटो (flickr)

दुनिया की लगभग 22 प्रतिशत आबादी अकेले चीन (China population) में है. वहीं इसकी तुलना में खेती-योग्य जमीन (arable land in China) केवल 7 प्रतिशत है. इस साल टिड्डी हमले ने इस देश को और तोड़ दिया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 27, 2020, 11:37 AM IST
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कोरोना के बीच चीन को लेकर अलग-अलग तरह की खबरें आ रही हैं. एक तरफ ये देश सैन्य ताकत में काफी आगे जा चुका है, तो दूसरी तरफ यहां की जनता भुखमरी की ओर बढ़ रही है. इसका अनुमान इस बात से लग रहा है कि चीन ने हाल ही में दुनियाभर में अपने खाद्यान्न सौदे रद्द कर दिए हैं. साथ ही खेती योग्य जमीन के लिए वो दूसरे देशों को टटोल रहा है.

चीन के पास कितनी उर्वर जमीन है
उपजाऊ जमीन की बात करें तो चीन इस मामले में दुनिया में चौथे नंबर पर है. सबसे आगे अमेरिका है, जिसके पास 174.45 मिलियन हेक्टेयर उपजाऊ जमीन है. इसके बाद हमारे देश का स्थान है, जिसके पास लगभग 159.7 मिलियन हेक्टेयर खेती करने लायक जमीन है. फिर 121.78 मिलियन हेक्टेयर के साथ रूस तीसरे नंबर पर है. वहीं चीन के पास 103 मिलियन हेक्टेयर खेती लायक जमीन है. सुनने में चौथा नंबर काफी बढ़िया तो लगता है लेकिन दुनिया की लगभग 22 प्रतिशत आबादी के साथ देखा जाए तो चीन के पास खिलाने के लिए केवल 7 प्रतिशत ही जमीन है. बता दें कि दुनियाभर में कुल 334 मिलियन एकड़ कृषि योग्य जमीन मानी जाती है, इसमें से भी 37 मिलियन एकड़ पर कोई उपज नहीं हो पा रही है.

चीन की समस्या और गंभीर इसलिए है क्योंकि उसके पास खेती येग्य जमीन लगातार कम हो रही है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)

कल-कारखाने घेर रहे जगह


चीन की समस्या और गंभीर इसलिए हो जाती है क्योंकि उसके पास खेती येग्य जमीन लगातार कम हो रही है. इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 1949 के बाद से चीन में फसल लायक जमीन तेजी से कम हुई. इसकी वजह वहां हुआ औद्योगिकीकरण है. आर्थिक उन्नति के फेर में चीन में तेजी से कल-कारखाने बने. लेकिन इसका असर फसल की पैदावार पर पड़ा. अन्न की डिमांड और सप्लाई में खासा फर्क आने लगा.

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टिड्डी हमले ने संकट बढ़ाया 
एक और गंभीर समस्या फसलों पर कीड़े लगने की है. वहां इस साल फसल उत्पादक पांच प्रांतों में मक्के की फसल पर कीड़े लग गए. इससे मक्के की कीमत लगभग पांच गुनी हो गई.

भारी मात्रा में खाना हो रहा बर्बाद
अनाज की कमी का एक और कारण खाने की बर्बादी है. कुछ बर्बादी तो बाढ़ के कारण हुई. वहीं ज्यादा बर्बादी लोग खुद कर रहे हैं. वे लोग जिनके पास खाने को पर्याप्त है, वे बचा खाना फेंकने से परहेज नहीं करते. चीन में पर कैपिटा फूड वेस्ट प्रति व्यक्ति- प्रति भोजन लगभग 93 ग्राम है. यानी एक दिन में वे तीन बार खाएं तो हर बार एक-एक शख्स 93 ग्राम खाना फेंकेगा. एक अनुमान के मुताबिक साल 2013 से 2015 के बीच हर साल चीन ने इस तरह से लगभग 18 मिलियन टन खाना बर्बाद किया. ये खाना 30 से 5 मिलियन आबादी को खिला सकने के लिए काफी था.

चीन में भोजन की बर्बादी भी बड़ी समस्या है- सांकेतिक फोटो (pixabay)


खुद अधिकारी मान रहे ये बात
खुद चीन के खाद्यान्न संबंधी विभाग के उप निदेशक वू जिदान के अनुसार, देश में 32.6 अरब अमेरिकी डॉलर के भोजन की बर्बादी होती है. ऐसे में खाना बचाना फिलहाल चीन के लिए सैन्य ताकत बढ़ाने जितना जरूरी हो चुका है. माना जा रहा है कि अगले 10 सालों यानी 2030 तक जब चीन की आबादी 1.5 बिलियन हो जाएगी, तब अपने लोगों को खिलाने के लिए उसे फिलहाल हो रही उपज के अलावा 100 मिलियन टन अनाज सालाना और उगाना होगा.

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क्या कर रहा चीन 
वैसे चीन अपने तरीके से इस फर्क को कम करने की कोशिश में है. यहां खेतों में खाद का इस्तेमाल दुनिया के किसी भी देश से ज्यादा होता है. इससे वहां प्रति एकड़ में अनाज का उत्पादन भी ज्यादा है. हालांकि इससे भी समस्या कम नहीं हो रही.

जिनपिंग ने चलवाई मुहिम 
खाद्यान्न संकट को देखते हुए राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक नया आदेश दे दिया. उन्होंने ऑपरेशन 'क्लीन योर प्लेट' कैंपेन शुरू किया है. इसके तहत खाने की थाली में उतना ही लेने की बात हो रही है, जितनी भूख हो. चीन में अब रेस्त्रां जाने पर वहां लोगों का वजन लिया जाता है और उसके मुताबिक ही उन्हें खाने की क्वांटिटी मिलती है. खुद स्टेट न्यूज एजेंसी शिन्हुआ में जिनपिंग ने रेस्त्रां मालिकों से एक डिश कम सर्व करने की बात की.

चीन देशों को अपने यहां से अनाज निर्यात करने संबंधी सारे एग्रीमेंट रद्द कर चुका है


अनाज निर्यात सौदे रद्द किए 
चीन के सीमा शुल्क विभाग के अनुसार, देश ने इस वर्ष की पहली छमाही के दौरान अपने अनाज के आयात में 22.7% की वृद्धि की है. जिससे खाद्यान्न आयात में 74.51 मिलियन टन की वृद्धि हुई है. हालांकि चीन पिछले कुछ वर्षों से सोयाबीन का सबसे बड़ा उत्पादक रहा है फिर भी वह अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी अमेरिका से इस साल 40 मिलियन टन सोयाबीन आयात करने की योजना बना रहा है. इसके अलावा वो देशों को अपने यहां से अनाज निर्यात करने संबंधी सारे एग्रीमेंट रद्द कर चुका है.

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विदेशों में खेती के लिए जमीन लीज पर लेने की पहल
अन्न की मांग और सप्लाई में फर्क कम करने के लिए चीन दूसरे देशों में खेती लायक जमीन लीज पर लेने की शुरुआत कर चुका है. चीन ने विदेशों में कृषि भूमि खरीदने के लिए लगभग 94 बिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च किए हैं. इसमें अफ्रीकी देशों के दक्षिण अमेरिकी देश भी हैं. साथ ही पाकिस्तान के बलूचिस्तान पर भी चीन की निगाहें हैं. बता दें कि पाकिस्तान पहले ही चीन के कर्ज तले दबा हुआ है. ऐसे में चीन बलूचिस्तान की जमीन लीज पर चाहता है. बलूचिस्तान की जमीन काफी उर्वर मानी जाती है और चीन ने इसके लिए हाल ही में पाकिस्तान के साथ कृषि सहयोग पर एक समझौता किया है.
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