कश्मीर के लाल चौक पर 15 अगस्त को क्या होगा?

लाल चौक (Lal Chowk) श्रीनगर शहर के बीच में स्थित है. कश्मीर से अनुच्छेद 370 (Article 370) के खात्मे के बाद ये देखना दिलचस्प होगा कि इस बार लाल चौक पर 15 अगस्त को क्या होता है?

Vivek Anand | News18Hindi
Updated: August 14, 2019, 5:49 PM IST
कश्मीर के लाल चौक पर 15 अगस्त को क्या होगा?
कश्मीर का लाल चौक
Vivek Anand | News18Hindi
Updated: August 14, 2019, 5:49 PM IST
जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में हाल के दिनों में तेजी से हालात बदले हैं. अनुच्छेद 370 (Article 370) के खात्मे के बाद जिस तरह दुनियाभर की नजरें कश्मीर पर टिकी हैं और जिस बदनीयती से पाकिस्तान (Pakistan) कश्मीर की ओर देख रहा है. उसके बाद ये जानना दिलचस्प हो जाता है कि इस बार 15 अगस्त यानी भारत के स्वतंत्रता दिवस पर श्रीनगर के लाल चौक (Lal Chowk) पर क्या होता है? लाल चौक का माहौल कैसा रहता है और वहां तिरंगा कैसे और किसके द्वारा फहराया जाता है?

लाल चौक को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है. सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई. सेना की बख्तरबंद गाड़ियां मौके पर रवाना हो चुकी हैं. मुस्तैद सैनिकों ने अपनी राइफलें तान रखी हैं. सैनिकों के सरमाये के बीच कई तरह की खबरें आ रही हैं. इन सारी खबरों का लब्बोलुआब यही है कि इस बार लाल चौक पर कुछ खास होने वाला है.

अपने खुफिया सूत्रों के हवाले से पहले कुछ मीडिया संंस्थानों ने ये जानकारी दी कि इस बार 15 अगस्त को गृहमंत्री अमित शाह लाल चौक पर तिरंगा फहरा सकते हैं. हालांकि बाद में गृह मंत्रालय ने ऐसी खबरों का खंडन कर दिया. गृह मंत्रालय ने स्पष्ट कहा है कि अगर ऐसा कोई भी कार्यक्रम होता तो इसकी जानकारी पहले से ही दे दी जाती.

सुरक्षा के नजरिए से एहतियातन बहुत कुछ नहीं कहा जा रहा है. कुछ बातें लास्ट ऑवर के लिए छोड़ दी जा रही हैं. हालांकि इतना कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार कुछ अलग हटकर करने की कोशिश जरूर करेगी और इसके लिए लाल चौक सबसे मुफीद जगह होगी.

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लाल चौक कश्मीर की सियासत का केंद्रबिंदु रहा है


लाल चौक पर इस बार का 15 अगस्त खास होगा
एक खबर ये आ रही है कि अयोध्या से युवाओं का एक जत्था लाल चौक पर तिरंगा फहराने के लिए रवाना हुआ है. अयोध्या से 25 युवाओं की एक फौज लाल चौक की ओर रवाना हो चुकी है. कहा जा रहा है कि 9 दूसरे युवा जम्मू-कश्मीर से इस जत्थे में शामिल होंगे और कुल 35 युवाओं की टोली श्रीनगर के लाल चौक पर 15 अगस्त को तिरंगा फहराएगी.
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इस तरह की कई खबरें आ रही हैं. इसके बीच इतना तय है कि 15 अगस्त को देशभर की नजरें लाल चौक पर टिकी होंगी. कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद ये पहला मौका होगा, जब लाल चौक पर तिरंगा फहराया जाएगा. लेकिन सवाल है कि लाल चौक को लेकर इतना उत्साह क्यों दिखाया जा रहा है? इसको जानने के लिए कश्मीर के इतिहास में लाल चौक के योगदान और वहां घटित घटनाओं की जानकारी लेनी होगी.

लाल चौक का इतिहास
कई इतिहासकारों का कहना है कि लाल चौक का नाम मास्को के रेड स्कवॉयर के नाम पर पड़ा है. नामकरण के पीछे बीपीएल बेदी का हाथ बताया जाता है. बीपीएल बेदी शेख अब्दुल्ला के करीबी वामपंथी दोस्त थे. उन्होंने नया कश्मीर नाम की किताब लिखी थी. किताब में कश्मीर पर राज कर रहे डोगरा राजा हरि सिंह के शासन के उलट संवैधानिक व्यवस्था की वकालत की गई थी. मशहूर फिल्म अभिनेता कबीर बेदी उन्हीं बीपीएल बेदी के बेटे हैं.

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1948 में नेहरू ने फहराया था लाल चौक पर तिरंगा


इतिहासकार बताते हैं कि कश्मीर की सियासत पर पंजाबी और मुस्लिम वामपंथियों का अच्छा प्रभाव रहा है. कहा जाता है कि लाल चौक पहले पैलेडियम सिनेमा हॉल के ठीक सामने हुआ करता था.

लाल चौक 1947 से कश्मीर के बदलते वक्त का गवाह रहा है. पिछले 26 वर्षों में इसने न जाने कितने खून खराबे देखें हैं. कश्मीर में हिंसा को देखकर लगता है कि ये सही है कि इस जगह को लाल चौक का नाम दिया गया.

कश्मीर की सियासत का केंद्र बना लाल चौक
कश्मीर के न जाने कितने सियासतदानों ने यहां तकरीरें कीं. लाल चौक पर हुई हर घटना सुर्खियां बनीं. 1948 में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने श्रीनगर के लाल चौक पर पहली बार तिरंगा फहराया था. ये दिलचस्प बात है कि नेहरू ने इसी जगह से कश्मीर को अपना मुस्तकबिल खुद चुनने का ऐलान किया था.

4 दशक बाद इसी लाल चौक पर पूरी धमक के साथ बीजेपी के दिग्गज नेता मुरली मनोहर जोशी पहुंचे थे. 26 जनवरी 1992 को गणतंत्र दिवस के मौके पर उन्होंने लाल चौक पर तिरंगा फहराया था. उस वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मुरली मनोहर जोशी के साथ थे. 1989 के बाद हर गणतंत्र और स्वतंत्रता दिवस के मौके पर यहां बवाल होता रहा. हर नेशनल हॉलीडे के दिन यहां के आसपास रहने वाले लोग अपने घरों में दुबक जाते हैं. सुरक्षा गाड़ियों की गश्त तेज हो जाती है. सैनिकों के बूटों की आवाज बढ़ जाती है.

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26 जनवरी 1992 को मुरली मनोहर जोशी ने फहराया था लाल चौक पर तिरंगा


कश्मीर में ताकत दिखाने की जगह बन गया है लाल चौक
भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने वाले लोगों के लिए भी अपनी ताकत दिखाने का अड्डा बन गया लाल चौक. 1992 में जब मुरली मनोहर जोशी ने यहां तिरंगा फहराया, उस दिन भी उनसे कुछ कदम की दूरी पर ही आतंकवादियों की ओर से दागा गया रॉकेट गिरा था. यहां हर वक्त पाकिस्तान परस्त आतंकी अपनी मौजूदगी दर्ज करवाने की कोशिश करते रहते हैं.

लाल चौक पर हर गणतंत्र और स्वतंत्रता दिवस पर आर्मी तिरंगा फहराती है. हालांकि ऐसा करने का कोई आधिकारिक आदेश नहीं है. लेकिन भारतीय आर्मी ने भी इसे परंपरा की तरह अपना लिया है. आतंकवादियों के हौसले को तोड़ने के लिए इसे सेना के प्रतीकात्मक कदम के तौर पर देखा जाता है. लाल चौक के ऐसे इतिहास के बाद अब ये देखना रोचक होगा कि इस बदले हालात में इस बार का स्वतंत्रता दिवस वहां कैसे मनाया जाता है.

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First published: August 14, 2019, 4:40 PM IST
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