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    Explained: क्या होगा अगर China दुनिया का सबसे ताकतवर देश बन जाए?

    विस्तारवादी चीन की नजर फिलहाल सबसे मजबूत बनने पर है- सांकेतिक फोटो (flickr)
    विस्तारवादी चीन की नजर फिलहाल सबसे मजबूत बनने पर है- सांकेतिक फोटो (flickr)

    विस्तारवादी चीन की नजर फिलहाल सबसे मजबूत बनने पर है. इस बीच ये बात चर्चा में है कि सुपर पावर का ओहदा अमेरिका से चीन के पास चला जाए (what will happen if China becomes the next super power) तो दुनिया में क्या-क्या बदलेगा.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 11, 2020, 5:07 PM IST
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    चीन लगातार अपनी सीमाएं बढ़ाने के लिए गुंडागर्दी कर रहा है. हांगकांग से लेकर ताइवान और पूरे साउथ चाइना सी पर वो अपना दावा पेश कर रहा है. इस बीच अमेरिका और चीन में घमासान मचा हुआ है. विशेषज्ञों का मानना है कि ये घमासान असल में सुपर पावर की गद्दी को लेकर है. फिलहाल अमेरिका के पास ये ताकत है लेकिन अगर चीन उसकी जगह आ जाए तो कैसे बदलेंगे दुनिया के समीकरण.

    क्या चीन शांतिप्रिय देश बन सकेगा
    ये तो पक्का है कि चीन किसी भी तरह से अमनपसंद देश नहीं होगा, फिर चाहे उसके पास सुपर पावर का ही दर्जा क्यों न हो. हालांकि सितंबर में यूएन की जनरल असेंबली में चीनी लीडर शी जिनपिंग ने कहा था कि वे शांति से अपना विकास चाहते हैं लेकिन चीन का इतिहास कुछ और ही बताता है. वहां व्यापार के बहाने दूसरे देश जाने और उसे कर्ज देकर गुलाम बनाने की रणनीति पुरानी है. 15वीं सदी में चीनी सेनापति शेंग ही अपने जहाज लेकर दुनियाभर में व्यापार करता रहा. किसी भी देश को उसने सीधे गुलाम नहीं बनाया, बल्कि कर्ज देकर वहां की राजनीति में घुसपैठ कर ली.

    माओ जेडांग ने भी सत्ता मिलते ही ताइवान, मकाऊ और तिब्बत पर दावा कर दिया- सांकेतिक फोटो (Pixabay)

    ये बताता है चीन का इतिहास


    इससे भी पीछे जाएं तो हान साम्राज्य ने भी यही नीति अपनाई. और अगर वापस नए चीन की ओर आएं तो पाते हैं कि माओ जेडांग ने भी सत्ता मिलते ही ताइवान, मकाऊ और तिब्बत पर दावा कर दिया. कुल मिलाकर चीन के शांति की उम्मीद नहीं की जा सकती. ऐसे में यूएन की बैठक में भले ही जिनपिंग शांति की बात करें लेकिन उनके इतिहास से साफ है कि वे अपने विकास की आड़ में किसी देश को नहीं आने देंगे. और फिर सैन्य आक्रमण या कूटनीति के जरिए उसे घेर लेंगे.

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    कल्चर के जरिए ताकत पाने की नीति
    चीन को हमेशा से अपनी संस्कृति और नीतियों के फैलाव की इच्छा रही. वहीं वर्तमान में जो सुपर पावर है यानी अमेरिका, उसके यहां मिश्रित संस्कृति है और वहां के नेता लोकतंत्र पर यकीन करते हैं. इससे उलट चीन को अपनी वैल्यूज थोपने की आदत रही. कन्फ्यूशियस संस्थान के माध्यम से चीन दुनियाभर में अपना कल्चर बढ़ा रहा है. एक अनुमान के मुताबिक साल 2019 में दुनियाभर के देशों में 530 कन्फ्यूशियस संस्थान बन चुके थे.

    कन्फ्यूशियस संस्थान के माध्यम से चीन अपना कल्चर बढ़ा रहा है- सांकेतिक फोटो (needpix)


    कन्फ्यूशियस संस्थान चीन की सरकार से सीधे फंडिंग पाते हैं. इस फंडिंग के आधार पर ये दूसरे देशों के कॉलेज या यूनिवर्सिटीज से संपर्क करते हैं और वहां पर चीनी भाषा सिखाने या चीनी संस्कृति सिखाने की बात करते हैं. इसके लिए Chinese Ministry of Education से भारी पैसे मिलते हैं.

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    कनफ्यूशियस संस्थानों से देशों के भीतर पैठ
    पहले कनफ्यूशियस संस्थानों की तुलना कई सारे विदेशी संस्थानों जैसे ब्रिटिश काउंसिल, अलायंस फ्रेंचाइस जैसों से होती रही लेकिन जल्दी ही लोगों को समझ आने लगा कि चीन से आए इन संस्थानों का इरादा केवल भाषा और संस्कृति के बारे में बोलना-बताना नहीं, बल्कि युवाओं को अपने प्रभाव में लाना भी है. इसकी वजह ये है कि चीन को कल्चर और पावर में सीधा संबंध पता है.

    अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे देशों ने इसपर चीनी संस्कृति के जबरिया प्रचार का आरोप लगाया. साल 2013 में कनाडा ने अपने यहां कनफ्यूशियस संस्थान को बंद करवा दिया. हाल ही में ऑस्ट्रेलिया ने भी कनफ्यूशियस संस्थानों की जांच और आरोपों के सही पाए जाने पर उन्हें बंद करने का आदेश दे दिया.

    चीन उसी देश से अच्छे संबंध रख पाता है, जो उससे दबकर रहे- सांकेतिक फोटो (pxhere)


    माइनोरिटी पर करता आ रहा है हिंसा
    एक और अहम बात चीन के धार्मिक स्वतंत्रता पर विचार हैं. इन दिनों चीन में माइनोरिटी समुदायों पर हिंसा की चर्चा जोरों पर है. उइगर मुसलमानों से लेकर कई दूसरी माइनोरिटी चीन में दमन का शिकार हो चुकी है. यहां तक कि री-एजुकेशन कैंप के नाम पर उन्हें जेलों में डाला जा रहा है. हजारों-हजार ऐसे युवा गायब हो चुके हैं, जो कम्युनिस्ट पार्टी का विरोध करें. यानी चीन का सबसे ताकतवर होना सारी दुनिया के धर्मों पर खतरा हो सकता है.

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    एक और बात जो चीन को अमेरिका से अलग बनाती है, वो है इसके रिश्ते बनाने का तरीका. चीन उसी देश से अच्छे संबंध रख पाता है, जो उससे दबकर रहे. ऐसा कोई भी देश, जो चीन की हुकूमत मानने से मना कर दे, उसे वो जबर्दस्ती कब्जे में कर लेता है. हांगकांग का उदाहरण हमारे सामने है, जहां पूरी दुनिया के विरोध के बाद भी चीन ने अपने नियम लागू किए.

    क्यों है मकाऊ फेवरेट
    दूसरी तरफ चीनी प्रशासनिक क्षेत्र मकाऊ चीन का पसंदीदा बना हुआ है क्योंकि वो चीन का कभी विरोध नहीं करता. भारत से भी चीन इस वजह से ही भन्नाया हुआ है क्योंकि उसकी राजनैतिक स्थिति बेहतर छवि वाली रही. साथ ही भारत की सैन्य ताकत भी मजबूत हो रही है. इसी तरह से पश्चिमी देशों में अमेरिका से तो चीन की खुली टक्कर हो रही है, साथ ही ऑस्ट्रेलिया से भी चीन के संबंध तनावपूर्ण हो चुके हैं.
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