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संयुक्त राष्ट्र की स्थायी सदस्यता मिली तो कितना ताकतवर हो जाएगा भारत!

दुनिया में यकीनन हमारा दबदबा और ताकत दोनों बढ़ेगी. तब भारत की बात अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ज्यादा गंभीरता से सुनी जाएगी.

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फ्रांस ने फिर से संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत को स्थायी सदस्यता देने की बात की है. पिछले कुछ दशकों से भारत लगातार ये मांग करता रहा है. गाहे बगाहे अमेरिका और फ्रांस जैसे देशों ने भारत को स्थायी सदस्यता देने का समर्थन भी किया है. लेकिन ये देखने वाली बात होगी कि इससे भारत कितना ताकतवर हो जाएगा.

संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना 24 अक्टूबर 1945 को हुई थी. भारत इसके मूल संस्थापक सदस्यों में है. यानी जिन देशों ने संयुक्त राष्ट्र के घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किया था, भारत उनमें एक था. उस समय संयुक्त राष्ट्र संघ में पांच सदस्यों को स्थायी सदस्यता प्रदान की गई. जिन्हें वीटो पॉवर भी मिला. कहा जाता है कि उस समय भारत को भी स्थायी सदस्यता ऑफऱ हुई थी, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने इसे स्वीकार नहीं किया था. हालांकि इसे लेकर विवाद है.

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27 सितंबर, 1955 को डॉ. जेएन पारेख के सवालों के जवाब में नेहरू ने संसद में कहा था, ''यूएन में सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य बनने के लिए औपचारिक या अनौपचारिक रूप से कोई प्रस्ताव नहीं मिला था.''
वीटो के साथ मिलेंगी ये पॉवर
अगर भारत स्थायी सदस्य बन जाता है तो क्या होगा..कितना ताकतवर हो जाएगा भारत. विशेषज्ञ कहते हैं कि तब भारत पास एक ऐसी वीटो पॉवर आ जाएगी, जिससे काफी हद तक एशिया में शक्ति संतुलन ही बदल जाएगा. तब एशिया महाद्वीप में केवल चीन ही नहीं बल्कि भारत भी एक बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में शुमार होने लगेगा.

दुनिया में यकीनन हमारा दबदबा और ताकत दोनों बढ़ेगी. तब भारत की बात अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कहीं ज्यादा गंभीरता से सुनी जाएगी

चीन के खेल को रोकेगी ये ताकत 
अब तक एशिया को लेकर कई ऐसे फैसले संयुक्त राष्ट्र में आते हैं, जिसे चीन अपनी मर्जी से मानता है या नहीं मानता है. पाकिस्तान भी चीन की आड़ में अपने ऐसे खेल खेल रहा है, जो दक्षिण एशिया के लिए खतरनाक बनते जा रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र संघ का प्रतीक चिन्ह


पाकिस्तान की आतंकी गतिविधियों पर लगेगा अंकुश 
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत के पास वीटो पॉवर होती तो काफी हद तक ना केवल पाकिस्तान की आतंकवादी गतिविधियों बल्कि चीन से उसे मिलने वाले सहयोग पर अड़ंगेबाजी लगती है. चीन और पाकिस्तान को हमेशा ही ये आशंका सताती रहती कि भारत ना केवल कभी भी सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों की मीटिंग बुला सकता है बल्कि इस मामले पर प्रस्ताव भी ला सकता है. जिसे मानना सभी देशों के लिए एक बाध्यता होती.

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दुनिया में जाहिर होगी ताकत 
अब तक एशिया में केवल चीन के पास ही ये ताकत है. ये वो ताकत है जिसके जरिए आप दुनिया को लेकर किए जा रहे कई फैसलों ना केवल प्रभावित करते हैं बल्कि ऐसा फैसला ले सकते हैं जिसमें आपकी ताकत जाहिर हो.

चीन नहीं कर पाएगा फिर ऐसा 
इसे इस बात से भी देखा जा सकता है कि वर्ष 2009 में भारत ने पहली बार जैश ए मोहम्मद आतंकवादी संगठन के मुखिया मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पेश किया था लेकिन पाकिस्तान से दोस्ती के चलते चीन ने इस पर वीटो लगा दिया.

संयुक्त राष्ट्र संघ में महासभा का दृश्य


पिछले नौ सालों में चीन ने एक बार नहीं बल्कि चार बार इस संबंध में लाए गए प्रस्ताव को वीटो लगाकर रोका. अगर भारत संयुक्त राष्ट्र का स्थायी सदस्य होता शायद ऐसा नहीं होता तब पाकिस्तान को भी ये डर रहता कि उसके पड़ोस में ऐक ऐसा देश बैठा है, जो वीटो पॉवर से लैस है. लिहाजा पाकिस्तान इस समय आतंकवाद की जितनी हरकतें कर रहा, वो करने से पहले उसे दस बार सोचना जरूरत पड़ता.

पाकिस्तान का साथ देने से पहले कई बार सोचना होगा
चीन को भी पाकिस्तान का साथ देने से पहले कई बार सोचना पड़ता. अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तब भारत का कद ही अलग होगा. फिलहाल संयुक्त राष्ट्र में जिन पांच सदस्य देशों को स्थायी सदस्यता दी गई है, उसमें अमेरिका, फ्रांस, रूस, चीन और ब्रिटेन शामिल हैं. इन सभी के पास वीटो पॉवर है.

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क्या है वीटो पॉवर
अगर सुरक्षा परिषद में कोई प्रस्ताव आता है और अगर कोई एक स्थायी सदस्य देश इससे सहमत नहीं है तो ये प्रस्ताव पास नहीं होगा या अमल में नहीं आएगा. दूसरे शब्दों में कहे तो किसी भी प्रस्ताव को अगर सुरक्षा परिषद में पास होना है तो उसके पांच स्थायी सदस्यों की सर्वसम्मत्ति जरूरी है अगर कोई एक देश भी विरोध करते हुए इसके खिलाफ वोट करता है तो ये वीटो कहलाता है.
संयुक्त राष्ट्र संघ सुरक्षा परिषद में इसके स्थायी सदस्य (संयुक्त राष्ट्र अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, रूस और चीन) किसी प्रस्ताव को रोक सकते हैं या सीमित कर सकते हैं.

संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय के बाहर तमाम देशों के ध्वज


वीटो का अधिकार कितना असीमित होता है
एक वीटो किसी तरह के बदलावों को रोकने, उन्हें नहीं अपनाने का असीमित अधिकार देता है.

क्या संयुक्त राष्ट्र में और स्थायी सदस्यों को शामिल करने की जरूरत है
मोटे तौर पर दुनिया के चार बड़े और ताकतवर देशों जर्मनी, जापान, भारत और ब्राजील को संयुक्त राष्ट्र में जी4 देश कहा जाता है. जिनके बारे में माना जाता है कि बदलती हुई दुनिया और मौजूदा स्थिति के अनुसार स्थायी सदस्यता दी जानी चाहिए.

इससे संयुक्त राष्ट्र संघ का असर भी और बढे़गा. इससे सुरक्षा परिषद को विस्तार भी मिलेगा. फिर ये बात लगातार कही भी जा रही है कि संयुक्त राष्ट्र संघ में अब सुधारों का समय आ चुका है. इसी तरह संयुक्त राष्ट्र अपना 60 फीसदी से ज्यादा काम अफ्रीकी महाद्वीप में कर रहा है लेकिन अफ्रीका से कोई भी देश स्थायी सदस्य नहीं है.

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कौन से देश भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करते रहे हैं
- भारत की स्थायी सदस्यता के लिए फ्रांस और अमेरिका ने लगातार समर्थन किया है. चीन ने इसका विरोध किया है जबकि ब्रिटेन और रूस ने अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की है.

संयुक्त राष्ट्र संघ के सामने तमाम सदस्य देशों के ध्वज


क्या है फिलहाल संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थिति
संयुक्त राष्ट्रसंघ 51 सदस्य देशों के साथ करीब 70 साल पहले बना था. अब इसमें 193 देश हैं.

स्थायी सीट के लिए भारत की दलील क्या है
- ये दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र देश है
- ये 120 करोड़ से अधिक की आबादी वाला देश है
- ये दुनिया की पांच बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शुमार होता है
- भारत की सेनाएं दुनिया की पांच बड़ी सेनाओं में शामिल हैं
- हर शांति मिशन में ये अपनी सेना भेजता है.

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