राजस्थान में कैसे बन-बिगड़ सकती है सरकार, नंबर गेम और 06 स्थितियां 

राजस्थान में कैसे बन-बिगड़ सकती है सरकार, नंबर गेम और 06 स्थितियां 
राजस्थान की कांग्रेस सरकार में अशोक गहलोत बनाम सचिन पायलट

राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने विद्रोह का बिगुल बजा दिया है. वो अपने साथ 30 कांग्रेस विधायकों के होने का दावा कर रहे हैं. ऐसी हालत में राजस्थान में क्या हो सकता है, नंबर गेम स्थितियों को कैसे बदल सकते हैं

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राजस्थान में कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार को लेकर हलचल तेज हैं. उप मुख्यमंत्री और कांग्रेस के तेजतर्रार नेता सचिन पायलट के विद्रोह के बाद वहां स्थितियों में असमंजस का माहौल है., हालांकि अशोक गहलौत ने दावा किया है कि उनके पास 107 से अधिक विधायकों का समर्थन है. हम ये जानने की कोशिश करते हैं कि राजस्थान विधानसभा में कितने सदस्य होते हैं. कितने पर सरकार बनती है और फिलहाल जो दलीय स्थिति है, उसमें नंबर गेम किस तरह हो सकते हैं यानि नंबर्स किस तरह क्या बदलाव कर सकते हैं.

राजस्थान में पिछले 43 सालों से विधानसभा में सदस्यों की संख्या 200 की है. यानि किसी भी पार्टी को सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा 101 सदस्यों का होगा.

क्या थे वर्ष 2018 चुनाव के नतीजे
दिसंबर 2018 में जब राजस्थान विधानसभा के चुनाव हुए तो कांग्रेस को 100 सीटों पर जीत हासिल हुई. भारतीय जनता पार्टी को 73 सीटें मिलीं. इसके अलावा बीएसपी को 06 सीटें मिलीं तो निर्दलीय 13 सीटों पर जीते. साथ ही राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी को 03, सीपीएम को 02, भारतीय ट्राइबल पार्टी को 02 और आरएलपी को 01 सीट मिली.
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चुनाव के बाद क्या हुआ
चुनाव के बाद कांग्रेस को तुरंत बीएसपी और निर्दलीयों का समर्थन मिल गया. हालांकि सरकार बनाने के दौरान ही कांग्रेस में अशोक गहलौत और सचिन पायलट दोनों के बीच मुख्यमंत्री के पद के लिए जबरदस्त रस्साकशी हुई, जिसमें गहलोत का पलड़ा भारी रहा. वो मुख्यमंत्री बने तो सचिन पायलट उप मुख्यमंत्री.

चुनावों से पहले पायलट राजस्थान कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष थे. ये माना गया कि राजस्थान में कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन में उनकी खास भूमिका थी. यहां ये बताना जरूरी है कि 2013 में कांग्रेस को प्रदेश में केवल 21 सीटें ही मिली थीं. उस हिसाब से कांग्रेस ने इस चुनाव में जबरदस्त वापसी की.

राजस्थान में अघर 06 बीएसपी विधायकों के कांग्रेस में विलय से अगर अशोक गहलोत को मजबूती मिली तो उपचुनाव में एक सीट और जीतने से भी उनके नंबर्स बढ़े


कैसे बढ़ीं कांग्रेस की सीटें और ताकत 
जिस समय अशोक गहलोत ने सरकार बनाई, तब उन्हें बीएसपी (06), निर्देलीय (12), सीपीएम (02) और राष्ट्रीय लोकदल (01) का समर्थन मिला. इसके बाद बीएसपी के सभी 06 विधायक कांग्रेस में आ गए, इससे कांग्रेस की स्थिति और मजबूत हो गई. राजस्थान में 2019 में दो सीटों पर उपचुनाव भी हुए. ये मंडवा औऱ खींचसर सीटें थीं.

मंडवा सीट बीजेपी के पास थी तो खींचसर आरएलपी के पास. दरअसल इन दोनों सीटों पर जीत हासिल करने वाले विधायकों ने लोकसभा का चुनाव लड़ा था और जीतकर सांसद बने थे. उपचुनाव में मंडवा सीट पर कांग्रेस ने जीत पाई तो खींचसर को आरएलपी ने बरकरार रखा. इस तरह विधानसभा में कांग्रेस के सदस्यों का आंकड़ा 107 हो गया यानि अशोक गहलोत की सरकार और मजबूत हो गई.

फिलहाल गहलोत और सचिन पायलट कैंप के क्या दावे हैं
अगर मौजूदा स्थिति देखें तो अशोक गहलौत की सरकार के पास 107 कांग्रेस के सदस्य हैं और उनके समर्थन देने वाले निर्दलियों और अन्य पार्टियों के विधायकों की संख्या 17 है. यानि कुल मिलाकर 124 विधायक गहलोत सरकार के साथ हैं लेकिन सचिन पायलट का दावा है कि उनके पास 30 विधायकों का बहुमत है. हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि सचिन के पास 20-25 विधायकों की ताकत है. अब ये देखना होगा कि क्या इन नंबर्स के साथ वो राजस्थान में क्या सत्ता समीकरण बदल सकते हैं.

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स्थिति 01 - क्या दलबदल हो सकता है
-दलबदल कानून के तहत सचिन पायलट के साथ कम से कम 32 विधायक जरूर होने चाहिए. ऐसा होने पर वो इतने विधायक के साथ दल बदल भी कर सकते हैं और एक अलग दल भी बना सकते हैं. ऐसी स्थिति में वो आराम से बीजेपी के साथ सरकार बना सकते हैं और अशोक गहलोत की सरकार गिर जाएगी. हालांकि खुद सचिन भी जितने विधायकों के समर्थन का दावा कर रहे हैं, उसमें ये मुश्किल है.

राजस्थान में उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट अपने साथ 30 विधायकों के होने का दावा कर रहे हैं. हालांकि इस आंकड़े को 20-25 बताया जा रहा है. हालांकि ऐसे में दलबदल करना उनके लिए संभव नहीं होगा


स्थिति 02 -सदन की सदस्यता से इस्तीफा दे सकते हैं.
सचिन के पास अगर वाकई 30 विधायकों का समर्थन है. हालांकि ये माना जा रहा है कि उनके पास अधिकतम 25 विधायक हो सकते हैं. ऐसे में अगर सचिन पायलट और उनके समर्थन वाले विधायक कांग्रेस छोड़कर सदन की सदस्यता से इस्तीफा देते हैं. तो कुल मिलाकर सदन में सदस्यों की कुल बची संख्या पर बहुमत का नया आंकड़ा तय होगा.

स्थिति 03 - सचिन और समर्थिक विधायकों के इस्तीफे बाद क्या होगा
मान लेते हैं कि सचिन अपने साथ 30 विधायकों के सदन से सदस्यता का इस्तीफा देते हैं तो सदन में तब सदस्यों की कुल संख्या 170 बचेगी. ऐसे में सरकार बनाने के लिए बहुमत 86 सदस्यों का होगा. कांग्रेस के पास 77 विधायक होंगे और उन्हें बाहर से समर्थन दे रहे विधायकों का साथ मिल जाएगा.

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स्थिति 04- क्या बीजेपी की सरकार बन सकती है
-मान लीजिए ऐसी स्थिति में कांग्रेस को समर्थन देने वाले 12 निर्दलीय विधायकों ने पाला बदल लिया तो जरूर बीजेपी (72) सहयोगी दल आरएलपी (02) और पहले से समर्थन दे रहे 01 निर्दलीय विधायक के साथ सरकार बना सकती है. हालांकि ऐसा होने की गुंजाइश इसलिए कम है, क्योंकि 12 निर्दलीय विधायकों को गहलोत का खास आदमी माना जाता है.

स्थिति 05 - तीसरा मुख्यमंत्री बने
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सचिन पायलट इस बात पर अड़े हैं कि अगर वो मुख्यमंत्री नहीं बनते तो गहलोत भी इस पद पर नहीं रहेंगे. अगर किसी तीसरे व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाया जाए तो उन्हें मंजूर होगा. अगर वास्तव में ऐसा कुछ अंदर पक रहा है और कांग्रेस हाईकमान के साथ अशोक गहलोत इस स्थिति पर रजमांद हो जाएं तो ऐसा जरूर हो सकता है और कांग्रेस की सरकार बनी रहेगी.

स्थिति 06 -रोटेशन प्रक्रिया लागू हो
ये भी मीडिया रिपोर्ट्स हैं कि कांग्रेस इस समीकरण पर अशोक गहलोत और सचिन पायलट को राजी करे कि 06 महीने वो मुख्यमंत्री रहें और अगले 06 महीने गहलोत. हालांकि ऐसा हो पाना बहुत मुश्किल है. लेकिन अगर वास्तव में ऐसी कोई खिचड़ी कांग्रेस में पक रही है और इस पर सचिन और अशोक गहलोत दोनों राजी हो जाते हैं तो भी कांग्रेस की सरकार यथावत चलती रहेगी.

निष्कर्ष
कांग्रेस की सरकार का राजस्थान में गिरना आसान नहीं है ये जरूर संभव है कि नेतृत्व में बदलाव हो जाए.
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