सारी मक्खियां मर गईं तो कब तक ज़िंदा रहेंगे इंसान?

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Updated: August 23, 2019, 1:10 PM IST
सारी मक्खियां मर गईं तो कब तक ज़िंदा रहेंगे इंसान?
मक्खियों की कई प्रजातियां खतरे में हैं. फाइल फोटो.

दुनिया भर में मक्खियों व कीटों (Bees & Insects) की हज़ारों प्रजातियों पर संकट (Threat to Extinction) मंडरा रहा है और ये सिर्फ इंसान ही नहीं बल्कि कई जीवों के लिए (Eco-System) अस्तित्व के खतरे की घंटी है. जानें क्यों और कैसे.

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ताज़ा खबर ये है कि ब्राज़ील (Brazil) में पिछले तीन महीनों में आधा अरब मक्खियां (Bees Dying) मारी गई हैं. इस खबर में खतरनाक फैक्ट ये है कि बड़े पैमाने पर पेस्टीसाइड्स (Pesticides Use) का जो इस्तेमाल हो रहा है, ​उसके चलते और ज़्यादा मक्खियों व अन्य कीटों के निकट भविष्य में मारे जाने का अंदेशा है. अब आप सोच रहे होंगे कि अचानक मक्खियों के मारे जाने को लेकर हमें परेशान होने की क्या ज़रूरत है! बेशक है. आपको जानना चाहिए कि मक्खियां हमारे और आपके यानी इंसानों के लिए कितनी ज़रूरी हैं और अगर मक्खियां इसी तरह मारी जाती रहीं तो कैसे और कितने भयानक नतीजे होंगे.

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संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की खाद्य और कृषि संस्था एफएओ (Food & Agriculture) भी ये उल्लेख करता है कि दुनिया की करीब 75 फीसदी फसलें मक्खियों के ज़रिए होने वाले परागण (Pollination) पर निर्भर करती हैं. मक्खियां और ऐसे ही कुछ कीट प्रकृति ने इकोसिस्टम को संतुलित रखने के लिए बनाए हैं. शहरीकरण, औद्योगिकीकरण के कारण जिस तरह हम प्रकृति की और नेमतों का नुकसान कर रहे हैं, उसी तरह मक्खियों के लिए भी हम खतरा बन चुके हैं लेकिन मक्खियां नहीं होंगी तो क्या हम बचे रहेंगे? इस सवाल की परतों को समझें.

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दुनिया की करीब 75 फीसदी फसलें मक्खियों के ज़रिए होने वाले परागण (Pollination) पर निर्भर करती हैं.


अगर सब मक्खियां मर गईं तो?
मक्खियां फसलों और फूलों के परागण के लिए बेहद ज़िम्मेदार कीटों में शामिल हैं और अगर दुनिया से सब मक्खियां खत्म हो गईं तो समझ लीजिए कि दुनिया की 7 अरब से ज़्यादा की आबादी के सामने भोजन का संकट खड़ा हो जाएगा. सारी मक्खियां खत्म हो गईं तो कुछ ही समय में फल और सब्ज़ी आधे रह जाएंगे. समय के साथ साथ सारा भोजन खत्म होता चला जाएगा. मक्खियों के महत्व को लेकर कहा जाता है कि आइंस्टीन ने कहा था :
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दुनिया की तस्वीर से अगर मक्खियां हटा दी जाएं तो मनुष्य का जीवन उस समय से सिर्फ चार साल तक का ही बचेगा.


क्यों करना चाहिए मक्खियों की चिंता?
सिडनी यूनिवर्सिटी ने इसी साल एक अध्ययन जारी किया था जिसमें दुनिया भर में परागण करने वाले कीटों पर आधारित ऐतिहासिक रिपोर्टों को शामिल किया गया. निष्कर्ष में कहा गया कि पृथ्वी पर कीटों की कुल आबादी की ढाई फीसदी हर साल मर रही है. अगर ये ऐसे ही चलता रहा तो अगले 100 साल से पहले दुनिया के सारे कीट खत्म हो जाएंगे. इसके साथ ही, कहा गया है कि कीटों की 41 फीसदी प्रजातियां पतन की ओर हैं, 31 फीसदी पर लुप्त होने का खतरा है जबकि 10 फीसदी लुप्त हो चुकी हैं.

कितना काम करती हैं मक्खियां?
सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं बल्कि पेड़ पौधों से लेकर कई जीवों तक के लिए मक्खियों की उपयोगिता है. इकोसिस्टम का एक बड़ा हिस्सा अपने भोजन के लिए मक्खियों पर निर्भर करता है. परागण का जितना काम मक्खियां करती हैं अगर उसकी कीमत निकाली जाए तो कितनी होगी? इस बारे में अमेरिकी कृषि विभाग ने एक आकलन कर बताया कि हर साल 235 अरब डॉलर से 577 अरब डॉलर तक के मूल्य का काम मक्खियों पर निर्भर करता है. एक और अध्ययन के मुताबिक ये कीमत करीब 300 अरब डॉलर की आंकी गई है. साफ है कि ये रकम कई देशों की सम्मिलित जीडीपी से ज़्यादा है.

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कृषि उत्पादन में नई तकनीकों के नाम पर ज़हरीले तत्वों के इस्तेमाल का नतीजा है कि मक्खियों और कीटों के जीवन पर खतरा पैदा हो गया है.


मक्खियों को बचाना चाहिए
शहरीकरण और कृषि उत्पादन में नई तकनीकों के नाम पर ज़हरीले तत्वों के इस्तेमाल का नतीजा है कि मक्खियों और कीटों के जीवन पर खतरा पैदा हो गया है. भारत समेत अमेरिका, एशिया व यूरोप के कई बड़े देशों में मक्खियों की प्रजातियां खतरे में हैं. लेकिन, अगर हमें आने वाली पीढ़ियों के लिए ज़िंदा रहने का रास्ता छोड़ना है तो मक्खियों व कीटों के बचाव के लिए कारगर तरीके अपनाने ही होंगे. इसे ऐसे भी समझें कि मक्खियों से फसलें या 75 फीसदी हरियाली धरती पर है, यानी मक्खियों व कीटों की मौतें अपरोध रूप से ग्लोबल वॉर्मिंग और क्लाइमेट चेंज के खतरों का भी कारण है.

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First published: August 23, 2019, 1:10 PM IST
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