Babri Demolition Verdict: बाबरी विध्वंस मामले में फैसले के बाद आगे क्या होगा?

क्या बाबरी ध्वंस से संबंधित सीबीआई कोर्ट के इस फैसले पर आगे चुनौती दी जा सकती है
क्या बाबरी ध्वंस से संबंधित सीबीआई कोर्ट के इस फैसले पर आगे चुनौती दी जा सकती है

सीबीआई की विशेष अदालत (CBI Special Court) ने बाबरी ध्वंस मामले (Babri Demolition) में जीवित सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया है. अब इस फैसले (Verdict on Babri) के बाद क्या ये मामला खत्म हो जाएगा या फिर इसे चुनौती दी जा सकेगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 30, 2020, 2:50 PM IST
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Babri Demolition Verdict: सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में लालकृष्ण आडवाणी (LK Advani), मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती समेत 32 अभियुक्तों को बरी कर दिया है. अब सवाल ये उठता है कि क्या कोर्ट के इस फैसले को क्या चुनौती दी जा सकती है और इस मामले में आगे क्या होगा? वैसे रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद (Ayodhya Case) में मुस्लिम पक्ष की ओर से मुकदमे की पैरवी करने वाले जफरयाब जिलानी (Zafaryab Jilani) ने कहा है कि वो इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे.

06 दिसंबर 1992 को जब राम सेवक अयोध्या में इकट्ठे हुए थे, तभी अचानक कुछ कारसेवकों को बाबरी के गुंबद पर चढ़े देखा गया. इसके कुछ देर बाद इसे भीड़ ने ढहा दिया. तब वहां विश्व हिंदू परिषद, बीजेपी और बजरंग दल के नेता भी थे, इनमें 49 को आरोपी बनाकर ये मामला शुरू हुआ था. इस बीच 17 आरोपियों का निधन हो गया.

अब सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने फैसला दिया है कि ये कोई पूर्वनियोजित कार्रवाई नहीं थी बल्कि जो कुछ हुआ वो अचानक हुआ. सीबीआई कोर्ट के इस फैसले के साथ क्या ये मामला यही खत्म हो जाएगा या उसे चुनौती दिया जा सकेगा. ये एक सवाल है.




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क्या होगा पक्षकार का रुख
इस मामले में हाशिम अंसारी एक पक्षकार थे. उनके निधन के बाद उनके बेटे इकबाल अंसार पक्षकार बने. उन्होंने पहले ही कह दिया था कि वो चाहते हैं कि ये मामला अब खत्म हो जाए. 30 सितंबर को भी जब लखनऊ में सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने ये फैसला दिया तो उन्होंने इसका स्वागत किया और कहा कि उनकी ओर से ये मामला अब खत्म होता है.

सीबीआई का क्या रुख है
जाहिर सी बात है कि वो इस मामले को कोई चुनौती देने वाले नहीं हैं.सीबीआई खुद इस मामले को खत्म कर चुकी है, जिसने लंबे समय तक इस मामले की जांच की और इसे अदालत तक ले गई.

तो क्या खत्म हो जाएगा ये मामला
अगर किसी ने इस मामले को आगे चुनौती नहीं दी तो ये मामला खत्म हो जाएगा. सभी बरी अभियुक्तों को फिर किसी कार्रवाई का सामना नहीं करना पडे़गा. तब ये मामला अतीत का हिस्सा बन जाएगा.

कौन दे रहा है हाईकोर्ट में चुनौती 

अयोध्या के रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद (Ayodhya Case) में मुस्लिम पक्ष की ओर से मुकदमे की पैरवी करने वाले जफरयाब जिलानी (Zafaryab Jilani) ने कहा है कि वे बाबरी विध्वंस केस (Babri Demolition Case) में सीबीआई अदालत के फैसले को हाईकोर्ट (High Court) में चुनौती देंगे.

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क्या इसे चुनौती दी जा सकती है
लेकिन भारतीय संविधान के तहत भारत का कोई भी नागरिक इस तरह के व्यापक लोगों से जुड़े मामले में उच्च अदालत में चुनौती दे सकता है. वैसे भी सीबीआई के विशेष अदालतों के फैसलों में 90 फीसदी फैसलों को उच्च अदालत यानि हाईकोर्ट में चुनौती दी जाती रही है. लिहाजा जनता में कोई भी इस मामले को चुनौती देते हुए उसे हाईकोर्ट तक ले जा सकता है.

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क्या होता है सीबीआई की स्पेशल कोर्ट का स्तर?
- सीबीआई की विशेष अदालत जिला अदालतों के समकक्ष होती हैं. इनका गठन दिल्ली स्पेशल एस्टेबलिशमेंट एक्ट 1946 के तहत किया जाता है. आमतौर पर इसलिए कि ये अदालतों के बोझ को कम करें. ये सीबीआई से जुड़े मामलों को ही डील करती हैं. लिहाजा इनके पास जो केस आते हैं, वो जटिल और चर्चित होते हैं.

इनका जज कैसे बनाया जाता है?
- इन अदालतों का जज ज्यूडिशियल सिस्टम से ही आता है या फिर उसे मैरिट के आधार पर बनाया जाता है. वो चीफ ज्यूडीशियल मजिस्ट्रैट या ज्यूडीशियल मजिस्ट्रैट फर्स्ट क्लास के समकक्ष होता है.

सीबीआई कोर्ट आमतौर पर कैसे मामलों को डील करती है? 
- सीबीआई कोर्ट चूंकि सीबीआई के केसों पर ही फैसले देने का काम करती है तो ऐसे में जाहिर है कि उसके पास आने वाले केस हमेशा पेचीदा और न्याय की दृष्टि से आसान नहीं होते. उन पर सारे देश की निगाहें टिकी होती हैं.

दूसरी अदालतों और सीबीआई विशेष अदालत में क्या फर्क होता है? 
- जैसा कि ऊपर भी लिखा जा चुका है कि सीबीआई कोर्ट वही मामले देखती है जो सीबीआई से उसके पास आते हैं जबकि सामान्य अदालतें जनता के द्वारा न्याय संबंधी फौजदारी से लेकर सिविल तक के मामले देखती हैं. सीबीआई कोर्ट में सामान्य मामलों को लेकर अपील नहीं हो सकती.
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