• Home
  • »
  • News
  • »
  • knowledge
  • »
  • 500 साल बाद कैसी हो जाएगी हमारी पृथ्वी

500 साल बाद कैसी हो जाएगी हमारी पृथ्वी

500 साल बाद पृथ्वी (Earth) में बहुत बदलाव आ जाएंगे, लेकिन वे कैसे होंगे यह इंसानी गतिविधियों पर निर्भर करेगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

500 साल बाद पृथ्वी (Earth) में बहुत बदलाव आ जाएंगे, लेकिन वे कैसे होंगे यह इंसानी गतिविधियों पर निर्भर करेगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

पृथ्वी (Earth) पर बदलाव प्राकृतिक (Natural) और मानवजनित (Human effects) दोनों कारकों से बदालव हो रहे हैं. लेकिन 500 साल बाद मानवजनित कारक निश्चित तो नहीं हैं, लेकिन निर्णायक जरूर साबित हो सकते हैं.

  • Share this:
    Earth, Environment, Climate Change, Global warming, Greenhouse gases, Earth after 500 years, living processes of earth, Geological changes on Earth,

    हमारी पृथ्वी (Earth) हर क्षण बदल रही है. कुछ प्रक्रियाएं इसे तेजी से प्रभावित कर रही हैं तो अधिकांश बहुत ही धीरे-धीरे. लेकिन आज से 500 साल बाद पृथ्वी कैसी दिखेगी इसका पूर्वानुमान लगाना मुश्किल इसलिए है क्योंकि इसमें बहुत सारे कारक ऐसे भी हैं जो खुद अगले 500 सालों में बदल सकते हैं जिनका भी अनुमान लगा पाना आसान काम नहीं है. यह बिलकुल वैसा ही है 15वीं सदी के लोग आज की दुनिया के बारे में किस तरह से सही अनुमान लगा पाते. इसमें दो तरह की प्रक्रियाएं शामिल हैं. एक वो जिनमें प्राकृतिक चक्र (Natural Cycles) शामिल हैं और दूसरी में मानव सहित जीवन (Life processes) की वजह से होने वाली प्रक्रियाएं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)
    Earth, Environment, Climate Change, Global warming, Greenhouse gases, Earth after 500 years, living processes of earth, Geological changes on Earth,

    पृथ्वी (Earth) खुद भी गतिमान और लगातार बदल रही है. उसके घूर्णन और सूर्य (Sun) की परिक्रमा के अलावा, उसके डगमगाने की प्रक्रिया, उसकी अपनी धुरी पर झुकाव में बदलाव, यहां तक कि कक्षा में बदलाव उसकी सूर्य से दूरी बदल देता है. ये बदलाव हजारों लाखों सालों में होते हैं और इनकी वजह से ही हिम युग (Ice Age) जैसी घटनाएं होती हैं. भूगर्भीय लिहाज से 500 साल बहुत बड़ा समय नहीं है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)
    Ecosystem, Earth, Environment, Climate Change, Global warming, Greenhouse gases, Earth after 500 years, living processes of earth, Geological changes on Earth,

    दूसरी तरफ जीवन की प्रक्रियाएं भी पृथ्वी (Earth) में बदलाव ला रहे हैं. जीवन का ग्रह पर असर का अनुमान लगाना मुश्किल है. पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के एक हिस्सा में बदलाव दूसरे बदलावों को शुरुआत काफी बड़ा अंतर ला सकता है. इसमें मानवजनित प्रक्रियाएं (Human Acitvities) पृथ्वी को बहुत से मायनों में बदल रही हैं और यह असर जीवन के प्रभावों में सबसे बड़ा है. जंगलों का साफ होना, कृषि के लिए वन्यजीवों के आवासों का टूटना, शहरों का बेतरतीब निर्माण, जैसे बहुत से कारक है जिन परिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंच रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)
    Earth, Environment, Climate Change, Global warming, Greenhouse gases, Earth after 500 years, living processes of earth, Geological changes on Earth,

    मानव जनित गतिविधियां ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) में बड़ा योगदान दे रहीं हैं जिससे जलवायु में स्थायी बदलाव तक हो रहे हैं. ऐसा जीवाश्म ईंधन के जलाने और अन्य क्रियाओं के कारण अधिकाधिक ग्रीन हाउसगैसों (Greenhouse gases) के उत्सर्जन हो रहा है जिसे हमारा वायुमंडल सहन और वहन नहीं कर सकता है. ग्रीनहाउस गैसें सूर्य से आने वाली ऊष्मा को अवशोषित कर लेती हैं जो एक अच्छी प्रक्रिया है, लेकिन यह इतनी ज्यादा बढ़ रही है जिससे नुकसान होने लगा है. ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) होने से तापमान बढ़ता है जिससे गर्मी के दिन ज्यादा गर्म हो जाते हैं और आर्कटिक और अंटार्कटिका में बर्फ की चादरें तेजी से पिघल रही हैं जिससे समुद्र तटों पर बसे इलाकों में बाढ़ आने का खतरा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)
    Earth, Environment, Climate Change, Global warming, Greenhouse gases, Earth after 500 years, living processes of earth, Geological changes on Earth,

    लेकिन ये सारी चीजें वो हैं जिनका पृथ्वी (Earth) अभी सामना कर रही है. ये बदलाव 500 साल बाद पृथ्वी में बहुत ज्यादा अंतर ला सकते हैं. लेकिन काफी कुछ इस पर निर्भर करता है कि इंसान पृथ्वी के प्रति अपने तौर तरीके कैसे बदलता है. गर्म होता ग्रह जमीन पर चरम मौसम (Extreme Weather) जैसे गर्म लहर, तूफान और सूखे जैसे हालाता ला सकता है. पूरी पृथ्वी पर जीवन जोखिम में है. वैसे भी पृथ्वी पर सारे बदलाव इंसान के कारण नहीं होंगे. हां इंसान ने उन्हें खराब जरूर किया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)
    Earth, Environment, Climate Change, Global warming, Greenhouse gases, Earth after 500 years, living processes of earth, Geological changes on Earth,

    पांच सौ साल पहले से अब तक ही पृथ्वी (Earth) के जैवमंडल में ही काफी बदलाव हो गए हैं. इसमें सबसे बड़ा बदलाव इंसान की आबादी (Population) है जो 50 करोड़ से लेकर 7.5 अरब हो गई है. लेकिन 800 से ज्यादा पौधे और जानवर प्रजातियां विलुप्त हो गई हैं. इसके लिए इंसानी गतिविधियां (human activities) ज्यादा जिम्मेदार हैं. इंसान ने दूसरे जीवों की जगह या स्पेस खत्म कर दी है. समुद्र का बढ़ता जलस्तर भी जमीन कम कर रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)
    Earth, Environment, Climate Change, Global warming, Greenhouse gases, Earth after 500 years, living processes of earth, Geological changes on Earth,

    500 साल पहले लोग आज की पृथ्वी (Earth) की जीवनचर्या की कल्पना भी नहीं कर पाते थे. वे चलती कारें या मोबाइल फोन उनकी सोच के दायरे से बहुत बाहर की चीज रही होगी. जहां तकनीक ने तरक्की कर अकल्पनीय सुविधाएं दी हैं. तकनीक जलवायु (climate) समस्या का समाधान तक ला सकती है. तकनीक ने जलवायु परिवर्तन (Climate Change) जैसी समस्याएं पैदा की है. 1980 के दशक में पहचाना गया ओजोन होल का बनना मानव निर्मित तकनीक पैदा हुए क्लोरोफ्लोरो कार्बन जैसे प्रदूषकों की वजह से ही बना था. और तकनीक ने ही उस समस्या के हमारा परिचय कराकर उसके निदान और उपचार के लिए प्रेरित भी किया था. अगर इंसान ने सही दिशा में कदम ना उठाए तो पृथ्वी पर जीवन और दूभर होने वाला है यह तय माना जाना चाहिए. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज