जब भारत के 120 जवान चीन के 2000 सैनिकों पर पड़ गए भारी, 1300 को कर दिया था ढेर

जब भारत के 120 जवान चीन के 2000 सैनिकों पर पड़ गए भारी, 1300 को कर दिया था ढेर
1962 में के युद्ध पर एक बॉलीवुड फिल्म को रिलीज होने नहीं दिया गया क्योंकि तब तक भारत-चीन संबंध सुधर चुके थे. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

भारत और चीन के बीच रेजांग ला में हुए युद्ध की अगुवाई मेजर शैतान सिंह (Major Shaitan Singh) ने की थी. इस युद्ध में भारत (India) के 114 जवान शहीद हो गए थे. वहीं, 5 गंभीर घायल जवानों को चीन (China) के सैनिकों ने बंदी बना लिया था. बाद में चीन ने आधिकारिक रिपोर्ट में स्‍वीकार किया कि उसे इस युद्ध में सबसे ज्‍यादा नुकसान हुआ.

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चीन की ओर से लद्दाख (Ladakh) में भारतीय जमीन पर अतिक्रमण करने के बाद दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव बढ़ गया है. चीन और भारत ने लद्दाख में वास्‍तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर अपने-अपने सैनिकों की संख्‍या भी बढ़ा दी है. अमेरिका (US) ने दोनों देशों के बीच सीमा विवाद सुलझाने के लिए मध्‍यस्‍थता कराने का प्रस्‍ताव दिया है, जिसे पहले भारत (India) और अब चीन (China) ने भी ठुकरा दिया है. भारत और चीन के बीच लद्दाख में तनाव के हालात पैदा होना कोई नया मसला नहीं है. लद्दाख ही नहीं भारत और चीन के बीच ज्‍यादातर सीमाओं पर टकराव की स्थिति पैदा होती रही है. कुछ ऐसा ही हाल 1962 में हुआ था. उस समय भारत के 120 जवान चीन के 2,000 सैनिकों पर भारी पड़ गए थे. भारतीय जवानों ने अदम्‍य साहस का परिचय देते हुए युद्ध लड़ा और चीन के 1,300 सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया था.

मेजर शैतान सिंह से अफसरों ने कहा गया, चौकी छोड़ पीछे हटा जाओ
चीन का तिब्बत पर हमला, फिर कब्जा और दलाई लामा के भारत में शरण लेने के बाद से भारत और चीन के रिश्तों में खटास आ चुकी थी. इसके बाद 1962 में भारत और चीन के बीच जंग छिड़ गई. इस दौरान लद्दाख में 13वीं कुमाऊंनी बटालियन की 'सी' कंपनी तैनात थी. मेजर शैतान सिंह (Major Shaitan Singh) की अगुवाई में 120 जवान मोर्चे पर तैनात थे. उस वक्त न तो जवानों के पास चीन का मुकाबला कर सकने लायक हथियार थे और न ही हड्डियों को गला देने वाली ठंड से बचने के लिए कपड़े उपलब्‍ध थे. चीन ने 18 नवंबर 1962 की रात लद्दाख में भारतीय चौकी पर हमला बोल दिया था. भारतीय जवानों ने रेजांग ला में चीनी सैनिकों का सामना किया. जब मेजर शैतान सिंह को आभास हुआ कि चीन की ओर से बड़ा हमला होने वाला है तो उन्होंने अपने अधिकारियों को रेडियो संदेश भेजा और मदद मांगी. उनसे कहा गया कि अभी किसी तरह की मदद पहुंचा पाना संभव नहीं है. साथ ही उनसे कहा गया कि सभी सैनिकों को लेकर पीछे हट जाओ.

चीन के खिलाफ 1962 की जंग में मेजर शैतान सिंह 13वीं कुमाऊंनी बटालियन की 'सी' कंपनी का नेतृत्‍व कर रहे थे. ये युद्ध रेजांग ला में लड़ाागया था.




मेजर ने सैनिकों को जान बचाने के लिए चौकी छोड़ने की दी पूरी छूट


मेजर शैतान सिंह ने पीछे नहीं हटने का फैसला लिया. उन्होंने अपने सैनिकों को बुलाकर कहा कि हम 120 हैं और दुश्मनों की संख्या हमसे बहुत ज्यादा हो सकती है. हमें कोई मदद भी नहीं मिल पाएगी. हमारे पास मौजूद हथियार भी कम पड़ सकते हैं. हो सकता है कि इस लड़ाई में हम सब शहीद हो जाएं. ऐसे में अगर कोई जान बचाना चाहता है तो वो पीछे हटने के लिए आजाद है, लेकिन मैं मरते दम तक मुकाबला करूंगा. इसके बाद रणनीति तैयार की गई. शैतान सिंह ने कहा कि हमारे पास गोला-बारूद कम है और दुश्मनों की संख्या ज्यादा है. ऐसे में कोशिश करें कि एक भी गोली बर्बाद न होने पाए. हर गोली निशाने पर लगे. साथ ही मारे जाने वाले हर दुश्मन से बंदूक छीन ली जाए.

चीन के सैनिकों ने चली चाल, याक के गले में लालटेन बांधकर हांका
रेजांग ला में तैनात मेजर शैतान सिंह के जाबाजों ने सुबह के धुंधलके में देखा कि चीन की तरफ से कुछ हलचल हो रही है. उनकी तरफ रोशनी के कुछ गोले आ रहे थे. मेजर शैतान सिंह ने गोली चलाने का आदेश दे दिया. थोड़ी देर बाद पता चला कि चीन के सैनिकों ने याक के गले में लालटेन लटकाकर उन्‍हें भारतीय चौकी की ओर हांक दिया था. दरअसल, चीन के सैनिकों को भारत के पास मौजूद हथियारों और गोला-बारूद की जानाकारी थी. इसीलिए उन्‍होंने भारतीय सैनिकों की गोलियां खत्‍म कराने के लिए ये चाल चली थी. इसके बाद चीन के सैनिकों ने भारतीय चौकी की ओर बढ़ना शुरू कर दिया. सुबह के करीब 5 बजे भारतीय सैनिकों ने चीन की सेना पर गोली बरसानी शुरू कर दी. कुछ ही देर में दुश्मन की लाशें गिरनी शुरू हो गई थीं.

दोनों हाथ घायल होने के बाद एक पैर से चलाते रहे मशीनगन मेजर
चीन के कुछ सैनिक मारे जाने पर मेजर शैतान सिंह ने कहा कि अभी युद्ध खत्‍म नहीं हुआ है. इसके बाद चीन ने दोबारा हमला कर दिया. तब तक भारतीय सैनिकों के पास गोलियां लगभग खत्म हो गई थीं. चीन की सेना ने रेजांग ला पर मोर्टार और रॉकेट से गोलाबारी शुरू कर दी. तब रेजांग ला पर कोई बंकर नहीं था और दुश्मन रॉकेट पर रॉकेट दागे जा रहा था. इस बीच शैतान सिंह के हाथ में गोली लग चुकी थी. मेजर खून से लथपथ हो चुके थे. दो सैनिक घायल मेजर शैतान सिंह को एक बड़ी बर्फीली चट्टान के पीछे ले गए. उन्‍होंने मेडिकल हेल्प लेने से इनकार कर दिया. उन्होंने सैनिकों को आदेश दिया कि एक मशीनगन लेकर आओ और गन के ट्रिगर को रस्सी से मेरे एक पैर से बांध दो. इसके बाद उन्‍होंने दुश्‍मनों पर एक पैर से फायरिंग करनी शुरू कर दी.

इस युद्ध में भारत के 114 जवान शहीद हो गए थे, जबकि 5 गंभीर घायलों को चीन ने बंदी बना लिया था.


चीन ने स्‍वीकारा, 1962 के युद्ध में हुआ था सबसे ज्‍यादा नुकसान
मेजर शैतान सिंह जानते थे कि 2000 चीनी सैनिकों के सामने 120 भारतीय हार जाएंगे. वह ये भी जानते थे कि इस जंग में सभी जवान शहीद हो जाएंगे और किसी को कभी पता नहीं चल पाएगा कि रेजांग ला में आखिर हुआ क्‍या था. उन्होंने दो घायल सैनिकों रामचंद्र और निहाल सिंह से कहा कि वे चौकी छोड़कर चले जाएं. हालांकि, निहाल सिंह को चीनियों ने 4 अन्‍य गंभीर भारतीय सैनिकों के साथ बंदी बना लिया था. चीन से हुए इस युद्ध में भारत के 120 जवानों ने 1,300 चीनी सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया था. भारत की तरफ से 13वीं कुमाऊं की इस पलटन में केवल 14 जवान जिंदा बचे थे. इनमें भी 9 गंभीर रूप से घायल थे. चीन ने अपनी आधिकारिक रिपोर्ट में माना कि उसे 1962 के युद्ध में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था.

बर्फ पिघलने पर तीन महीने बाद मिला मेजर शैतान सिंह का शव
बहुत खोजने के बाद भी मेजर शैतान सिंह का शव कहीं नहीं मिला. बाद में जब रेजांग ला की बर्फ पिघली तो रेड क्रॉस सोसायटी और सेना ने उन्हें खोजना शुरू किया. इस बीच एक गड़रिये को बड़ी सी चट्टान में वर्दी में कुछ नजर आया. उसने इसकी सूचना अधिकारियों को दी. गड़रिये की सूचना के बाद जब सेना वहां पहुंची तो उन्होंने देखा कि मेजर शैतान सिंह अपनी बंदूक थामे बैठे थे. वो ऐसे लग रहे थे जैसे अभी भी युद्ध के लिए तैयार हैं. मेजर शैतान सिंह का जोधपुर में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. जब मेजर शैतान सिंह शहीद हुए तब उनकी उम्र महज 37 साल थी. उन्हें देश के सबसे बड़े वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया. यहां बटालियन के एक और सैनिक का जिक्र जरूरी है. जवान सिंहराम ने बिना किसी हथियार और गोलियों के चीनी सैनिकों को पकड़-पकड़कर मारना शुरु कर दिया था. मल्ल युद्ध में माहिर सिंहराम ने 10 चीनी सैनिक को बाल से पकड़ा और पहाड़ी से टकरा-टकराकर मौत के घाट उतार दिया था.

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