मन में यह टीस लिए ही विदा हो गए अरुण जेटली!

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Updated: August 25, 2019, 2:14 PM IST
मन में यह टीस लिए ही विदा हो गए अरुण जेटली!
अरुण जेटली ने राजनीति में कामयाबी की बुलंदिया छुईं लेकिन लोकसभा चुनाव नहीं जीत पाए

पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली (Arun Jaitley) ने राजनीति में कामयाबी की बुलंदियां छुईं, लेकिन एक टीस शायद आखिरी वक्त तक उनके साथ रही...

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पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली (Arun Jaitley) इस दुनिया से चले गए. पूरा देश उन्हें आखिरी विदाई दे रहा है. राजनीति (Politics) में उन्होंने कई बुलंदियां छुईं. देश के वित्तमंत्री (Finance Minister), रक्षा मंत्री (Defence Minister) से लेकर सूचना प्रसारण मंत्री तक रहे. देश की दिशा और दशा तय करने में अहम योगदान निभाया. केंद्र सरकार के सबसे ताकतवर मंत्रियों में रहे, लेकिन एक टीस शायद आखिरी वक्त तक उनके साथ रही. और वो थी- अमृतसर लोकसभा सीट से हार.

2014 में पहली बार अरुण जेटली लोकसभा के चुनाव में उतरे थे. अपनी 4 दशक की राजनीति में पहली बार वो चुनावी समर का सामना कर रहे थे. उन्होंने अमृतसर से अपनी किस्मत आजमाने का फैसला किया था.

जब अमृतसर लोकसभा सीट से चुनाव में उतरे थे जेटली
अरुण जेटली को अमृतसर में बाहरी कहकर प्रचारित किया गया. कांग्रेस के ऐसे आरोपों से बचने के लिए उन्होंने अमृतसर में घर तक खरीदा. लोकसभा चुनाव में अमृतसर सीट से कांग्रेस के दिग्गज अमरिंदर सिंह उनके मुकाबले में खड़े थे. अमरिंदर सिंह ने उनके बाहरी होने के मुद्दे को खूब हवा दी. हालांकि अरुण जेटली उतनी ही मजबूती से इस आरोप का प्रतिकार करते थे.

जेटली कहा करते थे कि मेरा अमरिंदर सिंह के मुकाबले अमृतसर से ज्यादा गहरा रिश्ता है. आप मुझसे अगर पूछेंगे कि मेरा पैतृक निवास कहां है तो मैं अमृतसर का नाम लूंगा. अमृतसर में मेरे 40 भाई-भतीजे रहते हैं. राजनीतिक तौर पर मैं पंजाब से बहुत मजबूती के साथ जुड़ा हूं. मैं यहां के एक-एक कार्यकर्ता को जानता हूं. जबकि अमरिंदर सिंह पंजाब के जरूर हैं, लेकिन वो अमृतसर के नहीं हैं. उन्हें तो अमृतसर में किसी ने देखा तक नहीं है.

when arun jaitley lost amritsar election incpite of strong family connection and love for its people
अमृतसर के चुनाव में अरुण जेटली को बाहरी कहकर प्रचारित किया गया


अमृतसरी खाने के शौकीन थे अरुण जेटली
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अमृतसर के चुनाव में अरुण जेटली ने राष्ट्रीय मुद्दे ही उठाए थे. वो स्थानीय मुद्दों के बजाय मोदी सरकार की उपलब्धियों और देश के निर्माण में केंद्र की मजबूत सरकार के साथ उन्होंने चुनाव प्रचार को आतंकवाद और भ्रष्टाचार के इर्द गिर्द ही रखा था.

अरुण जेटली खुद को बार-बार पंजाबी और अमृतसर का बताते रहे. वो अमृतसरी कुलचे के बेहद शौकीन थे. कहा करते थे कि अमृतसर को देश का फूड कैपिटल होना चाहिए. जेटली कहते थे कि यहां का खाना मुझे बार-बार यहां खींचता है. मैं दिल्ली में भी होता हूं तो अमृतसर से कुलचे मंगवाता रहता हूं. धर्म और टूरिज्म के बाद यहां का खाना ही अमृतसर की ताकत है.

एक लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से हारे अरुण जेटली
बीजेपी ने नवजोत सिंह सिद्धू का टिकट काटकर अमृतसर सीट से अरुण जेटली को उतारा था. लेकिन जेटली चुनाव हार गए. जेटली को राज्य में बीजेपी-अकाली दल की गठबंधन सरकार के खिलाफ चल रही हवा का नुकसान उठाना पड़ा. चार दशक की राजनीति के बाद अरुण जेटली पहली बार लोकसभा चुनाव में उतरे थे और उसमें उन्हें हार मिली. अरुण जेटली के लिए ये बड़ा दुख था.

अरुण जेटली का पंजाब और खासकर अमृतसर से मजबूत संबंध था. विभाजन के बाद उनके परिवार ने अमृतसर में ही ठिकाना बसाया था. हालांकि जेटली का जन्म दिल्ली में हुआ. लेकिन उनके परिवार ने लाहौर के बाद अमृतसर में ही पहला कदम रखा था.

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जेटली ने अमृतसर चुनाव हारने के बाद भी वहां के लोगों की मदद की


अमृतसर से था जेटली का पारिवारिक जुड़ाव
अमृतसर में जेटली की बुआ रहा करती थीं. जेटली के पिता ने अपने पांच भाइयों के साथ अपने बहन के घर में शरण ली थी. उस वक्त जेटली की बड़ी बहन पैदा लेने वाली थीं.

बंटवारे के वक्त जेटली की बुआ अमृतसर के फुल्ला वाले चौक में रहा करती थीं. जेटली का ननिहाल भी अमृतसर में ही है. उनके मामा मदन लाल वट्टा खूह सुनियारिया में रहते थे. जेटली की पत्नी संगीता जेटली का ननिहाल भी अमृतसर में है. उनका परिवार नमक मंडी में रहता है.

अमृतसर के लोगों की हर वक्त जेटली ने मदद की
अरुण जेटली का अपने बुआ के परिवार से लगातार संपर्क बना रहा. खासकर उनके बुआ के पोते से जेटली का विशेष लगाव था. हालांकि जेटली के ननिहाल से किसी ने राजनीति में बड़ी पहचान नहीं बनाई. लेकिन परिवारों के बीच आना जाना बना रहा. जेटली इसी जुड़ाव को महसूस भी करते थे. लेकिन अमृतसर से उन्हें चुनावी जीत हासिल नहीं हो सकी. जेटली की एक लाख से भी ज्यादा वोटों से हार मिली.

हालांकि हार के बाद भी अमृतसर के लोगों की मदद जेटली ने जारी रखी. अमृतसर को अरुण जेटली ने आईआईएम दिया. इनके कार्यकाल में ही अमृतसर को स्मार्ट सिटी का दर्जा दिया गया. अमृतसर के कारोबारी-व्यापारियों की अरुण जेटली ने हर वक्त मदद की.

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First published: August 25, 2019, 1:47 PM IST
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