लाइव टीवी

जब अटल सरकार ने दो राज्यों के कलेक्टर्स को दी थी हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता देने की स्पेशल पॉवर

News18Hindi
Updated: January 22, 2020, 3:34 PM IST
जब अटल सरकार ने दो राज्यों के कलेक्टर्स को दी थी हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता देने की स्पेशल पॉवर
वर्ष 2004 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिए जिलाधिकारियों को एक खास अधिकार दिया था

अटल सरकार ने अपना कार्यकाल खत्म होने से एक साल पहले वर्ष 2003 में देश के दो राज्यों के जिलाधिकारियों को पहली बार ये अधिकार दिए थे कि वो पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने के मामला का निपटारा खुद करें. वो जिसे मंजूर करेंगे, उसे नागरिकता दे दी जाएगी. इसीलिए 2004 में बड़े पैमाने पर लोगों को नागरिकता दी गई

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 22, 2020, 3:34 PM IST
  • Share this:
वर्ष 2003 में जब केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी, उस समय उन्होंने देश के दो राज्यों के जिलाधिकारियों को पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों के लिए भारतीय नागरिकता तय करने के लिए एक साल के लिए स्पेशल पॉवर्स दी थी.

अटल बिहारी वाजपेयी ने ये अधिकार जिन दो राज्यों के जिलाधिकारियों को दिए थे, वो गुजरात और राजस्थान थे, जहां बड़े पैमाने पर पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों को शरण मिली थी. ये वो शरणार्थी थे जो 1965 और 1971 के युद्ध के बाद पाकिस्तान में पैदा हुई स्थितियों के मद्देनजर भारत आ गए थे.

पहली बार ऐसा हुआ था
ये संख्या में बहुत ज्यादा थे. जब इन शरणार्थियों ने भारत में नागरिकता की मांग की तो इसे तय करने का काम खासतौर पर इन दो राज्यों के जिलाधिकारियों को दिया गया. देश में ऐसा पहली बार हुआ था जब किसी दो राज्य के जिलाधिकारियों को इस अधिकार से लैस किया गया था.

इसका नतीजा ये निकला कि इन दोनों राज्यों में वर्ष 2004 में 13,000 हिंदुओं को एक साथ भारत की नागरिकता दी गई. लेकिन इसके बाद इसकी गति फिर धीमी पड़ गई.

जोधपुर में पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थी बड़े पैमाने पर रह रहे हैं.


क्यों किया गया ऐसा इस पॉवर को देने की वजह भी यही थी कि बड़े पैमाने पर भारत आए इन शरणार्थियों की वैधानिक स्थिति साफ करनी थी. एक अनुमान के अनुसार 1965 और 1971 के युद्ध के बाद करीब दो लाख हिंदू और सिख शरणार्थी भारत आए, उसमें ज्यादातर इन दो राज्यों में आए.

फिर मनमोहन सरकार ने भी इसे आगे बढ़ाया
2004 में जब अटल सरकार चुनाव हार गई तो सत्ता में मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार आई. इसने भी जिलाधिकारियों को मिले इस अधिकार को तीन साल के लिए आगे बढ़ाया लेकिन फिर खत्म कर दिया.
अब केंद्र सरकार द्वारा नागरिकता संशोधन कानून लाए जाने के बाद फिर गुजरात और राजस्थान में पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए शरणार्थियों के संगठन मांग कर रहे हैं कि जिलाधिकारियों को इसी तरह के अधिकार दोबारा दे दिए जाएं.

ये भी पढ़ें :-

Health Explainer : जानें शराब पीने के बाद आपके शरीर और दिमाग में क्या होने लगता है
क्यों बकवास है LOVE JIHAD का दावा, पुलिस साबित करने में हमेशा रही नाकाम
चीन की फैक्ट्री में तैयार होती हैं बात करने वाली खूबसूरत सेक्स डॉल
आजादी मिलने के बाद क्या करना चाहते थे सुभाष चंद्र बोस
इस महाराजा के पास था अपना प्लेन और 44 रोल्स रॉयस कारें, हिटलर ने भी दी थी एक कार
अब ठीक हो सकेंगे किसी भी तरह के कैंसर रोगी, नई रिसर्च से जगी आस
3 राजधानियां बनाकर अमरावती की 'प्रतिष्ठा' कम करना चाहते हैं जगनमोहन!
चीन के छिपाने की वजह से ज्यादा गंभीर होकर फैल रही रहस्यमय बीमारी

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए नॉलेज से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: January 22, 2020, 3:13 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर