लाइव टीवी

ब्रिटेन ने अमेरिका पर किया था जैविक हमला, स्मॉल पॉक्स से तड़प कर मरे थे हजारों अमेरिकी

News18Hindi
Updated: February 18, 2020, 9:07 PM IST
ब्रिटेन ने अमेरिका पर किया था जैविक हमला, स्मॉल पॉक्स से तड़प कर मरे थे हजारों अमेरिकी
तब अमेरिका पर ब्रिटेन की हुकूमत थी और अमेरिकी क्रांतिकारियों पर ब्रिटेन ने जैविक हमला करवाया था.

हाल में कोरोना वायरस (Corona Virus) और जैविक हथियारों (Biological Weapons) को जोड़कर अमेरिकी नेताओं की तरफ बयान आते रहे हैं. अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम (American Freedom Struggle) के दौरान नेटिव अमेरिकन्स पर ब्रिटेन के अधिकारियों ने जैविक हमला करवाया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 18, 2020, 9:07 PM IST
  • Share this:
अमेरिका की रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर (Republican Senator) टाम कॉटन (Tom Cotton) ने एक बार फिर उस बहस को हवा दे दी है जो हल्की पड़ती जा रही थी. कॉटन ने फॉक्स टीवी को दिए एक इंटरव्यू में कोरोना वायरस (Corona Virus) को चीन का जैविक हथियार (Biological Weapon) बताया है. कॉटन ने कहा है कि हमें मालूम नहीं है कि ये वायरस कहां से पैदा हुआ, लेकिन हमें ये पता है कि इसकी तह तक जाना होगा. हमें ये भी पता है कि वुहान के फूड मार्केट से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर चीन की बायो सेफ्टी सुपर लेब्रोटरी मौजूद है.

कॉटन का इशारा साफ है कि चीन अपने यहां जैविक हथियार बना रहा था जो उसके लिए ही संकट बन गया. कॉटन के इस स्टेटमेंट के बाद जैविक हमले को लेकर गूगल पर ढेर सारी सर्च की शुरुआत हो गई. खुद अमेरिका में इस पर काफी चर्चा हो रही है. जिस अमेरिका से यह बहस बार-बार निकल रही है कि कोरोना वायरस और जैविक हथियार में समानता है, उसी अमेरिका पर ब्रिटेन ने एक बार बड़ा जैविक हमला किया था जिसमें हजारों अमेरिकियों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी. ये कहानी करीब ढाई सौ साल पुरानी है. लेकिन ये कहानी अमेरिका के लोगों के जेहन में अब भी है और बहुत दुखदायी है. कई अमेरिकी शोधकर्ताओं का कहना है कि आजादी के लिए संघर्ष कर रहे लोगों पर ब्रिटिश हुकूमत ने जैविक हमला करवा दिया था.

अमेरिकी सीनेटर ने टॉम कॉटन ने एक बार कोरोना वायरस और जैविक हथियार को लेकर बहस तेज कर दी है.


अमेरिकी आजादी की लड़ाई



अमेरिका को आजादी मिली थी 4 जुलाई 1776 को. लेकिन इस आजादी के लिए सशस्त्र संघर्ष लंबे समय से चल रहा था. आजादी के करीब 20 साल पहले स्थानीय अमेरिकियों ने अंग्रेजों के खिलाफ बड़ी लड़ाई छेड़ रखी थी. कई सालों तक चले विद्रोह के बाद 1763 में अमेरिकी स्वतंत्रता सेनानियों ने महत्वपूर्ण पिट किले पर कब्जा कर लिया था. ये किला वर्तमाना ओहायो राज्य में पड़ता था.

इस संघर्ष के दौरान ही इलाके में स्माल पॉक्स की बीमारी बुरी तरह फैल गई थी. इस बीमारी को लेकर बाद में खुलासा हुआ कि ये ब्रिटेन द्वारा प्रायोजित जैविक हमला था. दो ब्रिटिश अधिकारियों जनरल बैरन जेफरी और कर्नल हेनरी बुकेट के बीच हुए पत्राचार से इसका खुलासा हुआ था. इस पत्राचार के मुताबिक ब्रिटिश सेनाओं ने स्थानीय अमेरिकियों को जान से मारने के लिए ऐसे जैविक हथियार इस्तेमाल किए थे जिससे बड़ी संख्या में अमेरिकियों की तड़प-तड़प कर मौत हो गई थी. ओहायो और ग्रेट लेक्स के इलाकों में लंबे समय तक लोग बीमारियों से जूझते रहे थे.

अमेरिकियों में उस समय फैली इस बीमारी को लेकर काफी रिसर्च की गई. इस विषय पर रिसर्च करने वाले डॉ. सेथ कारुस के मुताबिक-हमारे पास पर्याप्त सुबूत हैं कि ये बीमारी प्राकृतिक रूप से नहीं फैली थी. इसके पीछे बड़ी योजना थी जिससे अमेरिकियों के आजादी संग्राम को बुरी तरह कुचला जा सके.

कैसे दिया था अंजाम
दरअसल जब फ्रांसीसियों के सहयोग से स्थानीय अमेरिकियों ने  पिट किले पर कब्जा कर लिया तो उनके नेताओं को ब्रिटिश अधिकारियों ने मिलने के लिए बुलाया. अमेरिकी क्रांतिकारियों के नेताओं को लग रहा था कि ब्रिटिश अधिकारी उनसे किसी संधि पर बातचीत के लिए बुला रहे हैं. लेकिन जब वो ब्रिटिश अधिकारियों से मिले तो उन्हें दो कंबल गिफ्ट किए गए. ये कंबल अमेरिकी नेताओ को ओढ़ा दिए गए.

अमेरिकी क्रांतिकारी वापस लौटे उनके शरीर लाल चकत्ते दिखाई दिए. इन्हीं नेताओं से धीरे-धीरे ये बीमारी फैलती चली गई. इस बीमारी की वजह से आजादी के लिए संघर्ष कर रहे अमेरिकियों को गहरा धक्का लगा.

प्रतीकात्मक तस्वीर


क्या रहा है ब्रिटेन का रुख
इस बीमारी पर अमेरिका में की गई कई रिसर्च के बावजूद ब्रिटेन की तरफ से हमेशा इसे नकारा गया. दरअसल जैविक हमलों के पीछे ये स्याह सच्चाई है कि जो भी देश इसका इस्तेमाल करता है वो मुकर जाता है. ऐसा ही कुछ ब्रिटेन के साथ भी हुआ. ब्रिटेन के इस रुख की पुष्टि कुछ अमेरिकी इतिहासकार भी करते हैं. अमेरिकी इतिहासकार फिलिप रैनलेट का मानना है कि इस बात के पुख्ता प्रमाण नहीं है कि ये ब्रिटिश हमला ही था. उनका कहना है कि उस कंबल पर जो वायरस डाले गए थे शायद उन्होंने काम ही नहीं किया. रैनलेट का मानना है कि नेटिव अमेरिकियों में स्माल पॉक्स या दूसरे इंफेक्शन इससे पहले भी होते रहे थे.

ये भी पढ़ें :
हिजाब पहनने और दाढ़ी रखने पर भी मुसलमानों को डिटेंशन सेंटर में डाल रहा चीन
40 साल पहले एक उपन्यास ने की थी चीन में कोराना वायरस की भविष्यवाणी
जम्मू-कश्मीर के सोशल मीडिया यूजर्स पर क्यों लगा UAPA, जानें कितना सख्त है कानून
क्यों खुद को अच्छा हिंदू मानते थे महात्मा गांधी लेकिन किस बात को मानते थे दोष
महात्मा गांधी पर बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत- उन्हें अपने हिन्दू होने पर नहीं थी शर्म
जानिए कैसी है अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की करामाती कार, जो पहुंच चुकी है भारत

 

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए नॉलेज से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: February 18, 2020, 9:00 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर