लाइव टीवी

जब गांधीजी की मदद से बंद होने से बची थी जामिया मिल्लिया यूनिवर्सिटी

News18Hindi
Updated: December 18, 2019, 3:04 PM IST
जब गांधीजी की मदद से बंद होने से बची थी जामिया मिल्लिया यूनिवर्सिटी
जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी

गांधीजी का जामिया मिल्लिया से जुड़ाव इसकी स्थापना के बाद से लगातार रहा. यहां तक की इस शिक्षण संस्थान को अलीगढ़ से दिल्ली लाने में भी गांधी जी की भूमिका अहम थी

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 18, 2019, 3:04 PM IST
  • Share this:
महात्मा गांधी ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया की स्थापना में खास भूमिका निभाई थी. जामिया के लिए एक समय ऐसा भी आया जब ये यूनिवर्सिटी आर्थिक संकट से गुजर रही थी. तब गांधीजी ने कहा कि चिंता मत करिए, अगर हालत खराब होती है तो मैं मदद करूंगा, यहां तक इस मदद के लिए मैं कटोरी लेकर निकल जाऊंगा. लोगों से भीख तक मांगूगा.

लेखक और पत्रकार विवेक शुक्ला ने अपनी किताब "गांधीज डेल्ही (12 अप्रैल, 1915 - 30 जनवरी 1948 एंड बियांड" में इस बारे में विस्तार से लिखा है. जब इस बारे में विवेक से बात की गई तो उन्होंने इस बारे में विस्तार से चर्चा की. उन्होंने कहा कि जामिया पहले अलीगढ़ में थी. गांधीजी ने भी उसको दिल्ली लाने में खास भूमिका अदा की.

इसके पहले चांसलर हक़ीम अजमल ख़ान बनाए गए थे. वो गांधीजी के परिचित थे, जब गांधीजी पहली बार दिल्ली आए थे तो बल्लीमरान में उनके घर गए थे. अजमल ने उन्हें दिल्ली दर्शन कराया. इसके बाद हमेशा गांधीजी और अजमल के बीच खास रिश्ते बने रहे.



कई बार आर्थिक संकट आया



आजादी के पहले जामिया कई बार आर्थिक संकट की स्थिति से गुजरी. कई बार उसे बंद करने की नौबत भी आ गई. ऐसे में जब अजमल ने ये चर्चा गांधीजी से की तो उन्होंने कहा कि मैं भरसक जामिया की मदद करने की कोशिश करूंगा, भले ही उसके लिए मुझको कटोरा लेकर भीख तक मांगने पड़े.

गांधीजी ने वाकई जामिया मदद की भी. उनकी अपील पर जमनालाल बजाज ने यूनिवर्सिटी को बड़ी सहयोग राशि दी. और भी कई लोगों ने मदद की, इसने जामिया को बंद होने से बचा लिया.

तब गांधी क्षतिग्रस्त जामिया को देखने पहुंचे थे
विवेक शुक्ला बताते हैं, 1947 में जब बंटवारा हो रहा था. उस समय दिल्ली में भयंकर दंगे हुए. तब जामिया की लाइब्रेरी बहुत समृद्ध लेकिन इसका बहुत नुकसान किया गया था. जामिया की बिल्डिंग्स को बहुत क्षति पहुंची थी. तब गांधीजी इसको देखने पहुंचे थे.

गांधी जी का पोता रसिक लाल जामिया में पढ़ता था तो उनके सबसे छोटे बेटे देवदास ने यहां पढ़ाने का काम किया था


गांधी का पोता यहां पढ़ा तो बेटे ने पढ़ाया 
उन्होंने एक खुलासा ये भी किया कि तब जामिया में गांधीजी का पोता भी पढ़ता था. वो रसिक लाल थे, जो गांधीजी के बड़े बेटे हरिलाल की संतान थे. बाद में गांधीजी के सबसे छोटे बेटे देवदास ने भी यहां पर अंग्रेजी और हिन्दी की क्लासेज लीं. इसके बाद वो हिंदुस्तान टाइम्स में संपादक बने.

पिछले दिनों जब महात्मा गांधी की 150वीं वर्षगांठ मनाई गई तो जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने यूनिवर्सिटी को गांधीजी द्वारा लिखे गए हस्तलिखित पत्रों का भी प्रदर्शन किया.

जो जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी आज दिल्ली में है, वो पहले अलीगढ़ में हुआ करती थी


जो जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी आज दिल्ली में है, वो पहले अलीगढ़ में हुआ करती थी. 1925 में जब इसे दिल्ली लाया गया तो ये करोलबाग में थी. फिर मौजूदा जगह आई.

अंग्रेजों के राज के दौरान पश्चिमी शिक्षा के विरोध और स्वतंत्रता आंदोलन के लिए रचनात्मक शक्तियों को संगठित करने के लिए 22 नवंबर, 1920 को अलीगढ़ में जामिया मिल्लिया इस्लामिया की स्थापना की गई थी. इसकी आधारशिला स्वतंत्रता सेनानी मौलाना महमूद हसन ने रखी थी. महात्मा गांधी की सक्रियता भी इसमें उल्लेखनीय रही थी.

ये भी पढ़ें-
आखिर इन दिनों कहां होंगे नागा साधु..क्या है उनका रहस्य
आखिर क्यों इमरान और उनकी पार्टी को फॉलो करता है परवेज मुशर्रफ का बेटा
ऐसी दुकान जहां बिकते हैं इंसानी अंग, लाखों में है कीमत
परवेज मुशर्रफ की बेहिसाब प्रापर्टी के बारे में जानकर चौंक जाएंगे आप, विदेशी खाते में करोड़ों

 

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए नॉलेज से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: December 18, 2019, 3:04 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
corona virus btn
corona virus btn
Loading