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1993 सांसद घूसकांड: जब हेमंत सोरेन के पिता पर लगा था सबसे बड़ा दाग

Vivek Anand | News18Hindi
Updated: December 29, 2019, 6:08 PM IST
1993 सांसद घूसकांड: जब हेमंत सोरेन के पिता पर लगा था सबसे बड़ा दाग
हेमंत सोरेन के पिता शिबू सोरेन का नाम सांसद रिश्वत कांड में उछला था

झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और इसके सुप्रीमो शिबू सोरेन (Shibu Soren) का नाम 1993 के सांसद रिश्वत कांड में खूब उछला था. शिबू सोरेन समेत झारखंड मुक्ति मोर्चा के 4 सांसदों पर आरोप लगा था कि उन्होंने तत्कालीन नरसिम्हाराव सरकार को बचाने के लिए बड़ी रकम घूस में ली थी.

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  • Last Updated: December 29, 2019, 6:08 PM IST
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हेमंत सोरेन (Hemant Soren) झारखंड (Jharkhand) के 11वें मुख्यमंत्री बन चुके हैं. झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार बन चुकी है. जेएमएम इस चुनाव में सबसे ज्यादा 30 सीटें हासिल कर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. झारखंड के लोगों ने जेएमएम पर अपना भरोसा जताया है.

झारखंड मुक्ति मोर्चा और इसके सुप्रीमो शिबू सोरेन का नाम 1993 के सांसद रिश्वत कांड में खूब उछला था. शिबू सोरेन समेत झारखंड मुक्ति मोर्चा के 4 सांसदों पर आरोप लगा था कि उन्होंने तत्कालीन नरसिम्हाराव सरकार को बचाने के लिए बड़ी रकम घूस में ली थी. आरोप था कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष शिबू सोरेन और उनके तीन सांसद- सूरज मंडल, शैलेंद्र माहतो और साइमन मरांडी के घर सूटकेस भर-भर के नोटों की गड्डियां पहुंची थी.

क्या था जेएमएम सांसद घूसकांड
1993 में केंद्र में कांग्रेस की अल्पमत वाली नरसिम्हाराव की सरकार चल रही थी. 28 जुलाई 1993 को बीजेपी नरसिम्हार राव के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई. सरकार का गिरना करीब-करीब तय था. लेकिन आरोप लगा कि अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ और सरकार के पक्ष में वोट करने के लिए कुछ सांसदों को मोटी रकम घूस में दी गई. नरसिम्हाराव की सरकार तो बच गई लेकिन उनकी सरकार के ऊपर लगे घूस के दाग नहीं मिटे. इस घूसकांड की चर्चा आज तक होती है.



जब घूसकांड को लेकर वाजपेयी ने किया था सनसनीखेज खुलासा


1995 में अटल बिहारी वाजपेयी ने इस घूसकांड को लेकर संसद के भीतर सनसनीखेज खुलासा किया था. संसद में सभी सदस्यों के सामने वाजपेयी जेएमएम के सांसद शैलेंद्र माहतो को लेकर आए. शैलेंद्र माहतों ने संसद के सामने स्वीकार किया कि शिबू सोरेन समेत उनकी पार्टी के तीन सांसदों ने नरसिम्हा राव की सरकार बचाने के लिए 50-50 लाख रुपए की घूस ली थी. इसके बाद इस मामले की लंबी सीबीआई जांच और सुनवाई चली. इस घूसकांड के बारे में सीबीआई की चार्जशीट में कुछ सनसनीखेज खुलासे हुए थे.

when hemant soren s father was accused of taking bribe to save narasimha rao government
शिबू सोरेन समेत जेएमएम के 4 सांसदों पर घूस लेने के आरोप लगे थे


सांसद रिश्वतकांड में सीबीआई की चार्जशीट का खुलासा
सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में इस घूसकांड का पूरा ब्यौरा दिया था. सीबीआई की चार्जशीट में सिलसिलेवार तरीके से बताया गया था कि किस तरह शिबू सोरेने सहित झारखंड मुक्ति मोर्चा के 4 सांसदों को रिश्वत दी गई थी. एक मारुति जिप्सी में सूटकेस भरकर रुपए लाए गए थे और कांग्रेसी नेता सतीश शर्मा के फार्म हाउस पर हुई पार्टी में इन पैसों को जेएमएम के सांसदों को दिया गया था.

सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में लिखा था कि कांग्रेसी नेता बूटा सिंह ने 26 जुलाई 1993 को नरसिम्हाराव सरकार के खिलाफ लाए अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ वोट देने के लिए जेएमएम के 4 सांसदों से संपर्क किया था. बूटा सिंह ने इन चारों सांसदों से उसी रात अपने घर पर भी मुलाकात की. उसके बाद बूटा सिंह के साथ जेएमएम के चारों सांसद तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हाराव से मिलने उनके 7 रेसकोर्स के निवास पर गए. इसे बूटा सिंह ने खुद स्वीकार किया था.

जब गिरते-गिरते बच गई नरसिम्हा राव की सरकार
27 जुलाई की रात बूटा सिंह ने जेएमएम सांसदों से एक बार फिर मुलाकात की. सदन में अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग हुई. अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 251 और विपक्ष में 265 वोट पड़े. नरसिम्हाराव की
सरकार बच गई. जेएमएम के 4 सांसदों के अलावा जनता दल से अलग हुए कुछ सांसदों ने भी सदन में सरकार के पक्ष में वोट किया था.

सरकार बच जाने के बाद जेएमएम नेताओं के घर सूटकेस भर-भरके पहुंचे नोट
सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में आगे लिखा है कि 29 जुलाई को सुबह 8 बजे चार अनजान लोग
जेएमएम सांसद सूरज मंडल के घर पहुंचे. सूरज मंडल के नौकर दारा रावानी की मदद से उन्होंने कार से सूटकेस निकाले. उन सूटकेसों को एक रूम में लॉक कर दिया गया, जिसकी चाबी सूरज मंडल के पास थी.

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शिबू सोरेन


30 जुलाई की सुबह सूरज मंडल के घर फिर कुछ बोरे और सूटकेस आए. उसी दोपहर जेएमएम सांसद साइमन मरांडी सूरज मंडल के घर पहुंचे. साइमन मरांडी अपने ड्राइवर संजय की मदद से बोरे और सूटकेस अपनी कार में लादकर वहां से चले गए. सूरज मंडल के घर से नोटों से भरे बोरे और सूटकेस के साथ साइमन मरांडी जेएमएम के दूसरे सांसद शैलेन्द्र माहतो के घर पहुंचे.

वहां से माहतो और साइमन मरांडी अपने एक पुराने जान पहचान वाले आरके जेटली के घर पहुंचे. आरके जेटली के घर पर नोटों से भरे बोरे और सूटकेस खोले गए और वहीं पर सारे नोट गिने गए. नोटों को गिनने के बाद उन्हें चार सूटकेसों में बंद किया गया. करीब साढ़े तीन बजे वे लोग आरके जेटली के घर से बाहर निकल गए. उसी दिन रात 9 बजे शिबू सोरेन, सूरज मंडल के घर पहुंचे और वहां से एक बैग और एक सूटकेस लेकर अपने 17 गुरुद्वारा रकाबगंज के आवास पर पहुंचे.

पीएनबी बैंक के खातों में डाली गई घूस की रकम
31 जुलाई को को साइमन मरांडी एक बार फिर आरके जेटली के यहां पहुंचे. उन्होंने शैलेंद्र माहतो को भी बुला लिया. वहां से दोनों दो सूटकेस लेकर शिबू सोरेन के घर पहुंचे. सीबीआई के मुताबिक ऐसी एक्सरसाइज पूरे एक हफ्ते तक चलती रही.

सवाल उठता है कि ये स्कैंडल पकड़ा कैसे गया, उस अकाउंट के बारे में कैसे पता चला जिसमें घूस की रकम डाली गई थी? सीबीआई ने बताया कि पंजाब नेशनल बैंक में एक खाता के खुलने के साथ ही घूस की रकम के बारे में जानकारी मिली. सूरज मंडल के चार्टड अकाउंटेंट दोस्त सुशील कुमार ने उनकी मुलाकात दिल्ली के सरोजिनी नगर स्थित पंजाब नेशनल बैंक के मैनेजर से करवाई.

सुशील कुमार की उस मैनेजर से दोस्ती थी. सरोजिनी नगर के पीएनबी बैंक में खाता संख्या 17108 में पैसे डाले गए. सुशील कुमार ने रकम देखकर पूछा कि इतनी बड़ी रकम कहां से आई. इस पर सूरज मंडल बोले- ‘क्या तुम इतने सीधे-सादे हो कि तुम्हें पता नहीं कि पैसा पीएम से आया है?’

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1993 में नरसिम्हा राव सरकार के खिलाफ बीजेपी अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई थी


जेएमएम ने की थी घूस के पैसों को पचाने की तैयारी
सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में लिखा कि पैसों के बैंक में ट्रांसफर के दौरान जेएमएम के नेता अपनी राजनीति में भी सक्रिय रहे. वो अलग झारखंड की अपनी मांग को लेकर मुखर रहे. तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने उऩ्हें सब्र रखने को कहा. उन्होंने कहा कि ये सब इतना जल्दी नहीं हो सकता. सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक नरसिम्हाराव ने जेएमएम के नेताओं से कहा कि ‘ बूटा सिंह जी और सूरज मंडल जी से जो बात हुई है, वो पूरी की जाएगी.’

सीबीआई जांच में ये भी पता चला कि जेएमएम के नेताओं ने रिश्वत में मिले पैसों को यहां-वहां निवेश भी किया. सूरज मंडल ने पीएनबी अकाउंट से पैसे निकालकर अपने दूसरे अकाउंट में डाले. ताकि बड़ी रकम कई हिस्सों में बंट जाए. भ्रष्टाचार के आरोपों से बचने के लिए उन्होंने दूसरे उपाय भी किए. उस दौरान कई फर्जी के मीटिंग किए.

घूस में मिले पैसों को पार्टी फंड का नाम दिया गया. एक फर्जी रिजॉल्यूशन पास किया गया जिसमें पार्टी सांसदों को दो परसेंट के ब्याज पर कर्ज देने का प्रावधान दिया गया था. इसके साथ ही जेएमएम के सांसदों ने 100 रुपए से लेकर 5 हजार रुपए तक के फर्जी कूपन छपवाए, ताकि वो कह सकें कि इनके जरिए उन्हें पार्टी फंड के लिए पैसे मिले हैं.

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First published: December 29, 2019, 2:58 PM IST
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