1971 के लेह दौरे तक इंदिरा ने पक्का कर लिया था पाकिस्तान को तोड़ने का इरादा

1971 के लेह दौरे तक इंदिरा ने पक्का कर लिया था पाकिस्तान को तोड़ने का इरादा
इंदिरा गांधी वर्ष 1971 मे लेह में सैनिकों को संबोधित करते हुए

इंदिरा गांधी जब 1971 में लेह के दौरे पर सैनिकों के बीच गईं थीं, तब तक वो पाकिस्तान से युद्ध की बात तय कर चुकी थीं. फिर वो अगले दो-तीन महीनों तक सैन्य ताकत को मजबूत करती रहीं और सैनिकों का उत्साह बढ़ाने के साथ रणनीति को मुकम्मल करती रहीं

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इंदिरा गांधी वैसे तो प्रधानमंत्री रहने के दौरान कई बार लेह के दौरे पर गईं थीं लेकिन उनका 1971 का लेह दौरा बहुत खास था. माना जाता है कि उस समय वो पाकिस्तान के साथ युद्ध का मन बना चुकी थीं. तब वो लेह में सैनिकों का उत्साह बढ़ाने पहुंची थीं. हालांकि लेह के मोर्चे पर 1971 के दौरान कोई हरकत नहीं हुई थी लेकिन उस समय इंदिरा देश में तमाम सैन्य छावनियों की यात्रा पर गईं थीं.

इंदिरा गांधी वहां अगस्त के आसपास पहुंची थीं. उस समय उन्होंने लेह में जवानों को संबोधित किया. अपने भाषण में उन्होंने पूर्वी पाकिस्तान से लगातार लाखों की संख्या में भारत आ रहे शऱणार्थियों का जिक्र किया और उनसे तैयार रहने को कहा.

1971 में चुनाव जीतते ही इंदिरा के सामने थी पूर्वी पाकिस्तान की समस्या
दरअसल 1971 का आम चुनाव काफी जुझारू लोकसभा चुनाव था. इंदिरा गांधी कांग्रेस पार्टी तोड़ने के बाद चुनाव मैदान में थीं. उन्होंने गरीबी हटाओ का नारा दिया. मार्च में हुए इन चुनावों में उन्हें जीत हासिल हुई. वो प्रधानमंत्री बनीं. लेकिन मार्च - अप्रैल से ही पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में हालात खराब होने लगे थे.
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मई-जून में लाखों शरणार्थी भारत पहुंचने लगे
मई-जून के दौरान जब पाकिस्तान सेना ने वहां कत्लेआम और धरपकड़ शुरू की तो बड़े पैमाने पर शरणार्थी भारत पहुंचने लगे. ये भारत के लिए बहुत कठिन समय था कि किस तरह लाखों-करोड़ों शरणार्थियों को खाने के लिए दिया जाए और रहने की व्यवस्था की जाए.

जब लेह दौरे पर गईं तो तय कर चुकी थीं पाकिस्तान से युद्ध 
जुलाई तक इंदिरा गांधी को महसूस होने लगा कि ये समस्या पाकिस्तान के टुकड़े करने पर ही खत्म हो सकती है. राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि अगस्त तक उन्होंने पाकिस्तान के साथ युद्ध में जाने का फैसला कर लिया था. यही वो समय भी जब वो लेह के दौरे पर गईं और संकेतों में सैनिकों से किसी भी संकट के लिए तैयार रहने को कहा. उनकी बहादुरी की तारीफ की.

इंदिरा गांधी नवंबर 1971 में जब अमेरिका पहुंची तो वो पूर्वी पाकिस्तान में भारतीय सेनाओं के सैन्य हस्तक्षेप का फैसला कर चुकी थीं


लेह के दौरे के समय तनाव के बादल मंडराए हुए थे
ये बात सही है कि लेह में जब प्रधानमंत्री गईं तब तक भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के बादल मंडराने लगे थे. ये तय माना जाने लगा था कि दोनों देशों में फिर टकराहट हो सकती है. उस समय पाकिस्तान में सैन्य शासक जनरल अयूब बागडोर संभाले हुए थे.

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लेह से लौटते ही शुरू किया असली आपरेशन 
इसके बाद सितंबर आते ही इंदिरा ने अपनी रणनीति को अमलीजामा पहनाना शुरू किया. वो इस महीने में सोवियत संघ (अब रूस) गईं. वहां राष्ट्रपति लियोनिद ब्रेझनेव से मिलीं. उनसे उन्होंने अपने इरादे जताए और फिर सहायता मांगी. ब्रेझनेव ने उन्हें मदद का पूरा भरोसा दिया. यहीं से भारत-सोवियत संघ की दोस्ती का नया अध्याय भी शुरू हुआ.

फिर अमेरिका के दौरे पर गईं
अक्टूबर में इंदिरा गांधी फिर अपनी सेना की ताकत बढ़ाती रहीं. जगह जगह सैन्य छावनी वाले इलाकों में जाकर सैनिकों का उत्साह बढ़ाती रहीं. नवंबर में वो अमेरिका पहुंची. ताकि तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन को पूर्वी पाकिस्तान में पैदा स्थितियों के बारे में बताएं और ये कहें भारत अब इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए सैन्य कार्रवाई कर सकता है.

1980 में अपने एक लेह दौरे में तत्कालीन प्रधानमंंत्री इंदिरा गांधी


अमेरिका को दो-टूक जवाब देकर लौटीं
हालांकि निक्सन उस समय इंदिरा गांधी की कोई बात सुनने को तैयार नहीं लगे. वो मुलाकात बहुत अटपटी रही लेकिन इंदिरा टका सा जवाब देकर वहां से निकलीं कि भारत किसी भी तरह के दबाव में नहीं आने वाला.

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03 दिसंबर 1971 को कोलकाता में की विशाल रैली
03 दिसंबर को जब भारतीय फौजों ने पूर्वी पाकिस्तान में आपरेशन शुरू किया. उसी दिन इंदिरा ने कोलकाता में ब्रिगेड परेड ग्राउंड में विशाल रैली को संबोधित किया. वो काफी आत्मविश्वास से भरी हुई और तनावरहित लग रही थीं. कोलकाता से लौटने के बाद अगले दिन उन्होंने संसद में ये जानकारी दी कि भारतीय फौजों ने पूर्वी पाकिस्तान में कार्रवाई शुरू कर दी है.

जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री रहते हुए 1963 में लेह दौरे पर गए थे. ये उनका आखिरी लेह दौरा था. हालाकि इससे पहले युद्ध में चीन के हाथों देश को पराजय मिल चुकी थी


नेहरू भी लेह गए थे लेकिन चीन से हारने के बाद
वैसे इंदिरा गांधी इसके बाद कई बार लेह गईं. शायद 1980 में वो आखिरी बार लेह के दौरे पर गईं. उनके पिता जवाहरलाल नेहरू भी कई बार लेह लद्दाख गए थे. लेकिन उनका आखिरी लेह दौरा 1963 में हुआ जबकि भारत 1962 के युद्ध में चीन से पराजित हो चुका था.
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