लाइव टीवी

जब जापानियों ने चीन पर किया था हमला, शंघाई में घुसकर बिछा दी थी लाशें

News18Hindi
Updated: May 20, 2020, 9:39 AM IST
जब जापानियों ने चीन पर किया था हमला, शंघाई में घुसकर बिछा दी थी लाशें
जापानी सैनिकों ने शंघाई पर बड़ा हमला बोला था.

तकरीबन एक महीने तक जापानी हमलों (Japanese Attack) के कहर का शिकार शंघाई और उसके आस-पास के इलाके होते रहे. चीन ने जापान के सामने बिल्कुल घुटने टेक दिए थे.

  • Share this:
इस वक्त कोरोना वायरस की वजह से दुनियाभर के आरोप झेल रहा चीन बेहद आक्रामक है. वो खुद पर कोई आरोप बर्दाश्त नहीं कर रहा. दरअसल कोरोना को लेकर चीन पर लग रहे दाग उसे अब बेकाबू कर रहे हैं. वो एक तरफ पश्चिमी देशों का जवाब देने के लिए उल्टी-सीधी प्रतिक्रियाएं दे रहा है तो दूसरी तरफ दक्षिणी चीन सागर और भारत के अक्साई चिन में धौंस जमा रहा है. दक्षिणी चीन सागर में तो उसे जापान से जवाब भी मिला है. दरअसल ये वो ही जापान है जिसने एक बार चीन के भीतर घुसकर तबाही मचाई थी. आइए जानते हैं क्या है वो घटना.

बात जनवरी, 1932 की है. चीन (China) और जापान (Japan) के बीच तनातनी चल रही थी. 1931 के सितंबर महीने में चीनी इलाके मुकडेन (वर्तमान शेनयांग) के पास एक रेलवे ट्रैक के नीचे बेहद कमजोर बम धमाका हुआ. ये बम इतना कमजोर था कि जिस पटरी के नीचे इसे रखा गया था उस पर जरा भी इसका प्रभाव नहीं पड़ा लेकिन इस रेलवे लाइन का मालिक जापानी था. तब वर्तमान चीन ये इलाका जापानी साम्राज्य के हिस्से में आता था. जापानी आधिपत्य को लेकर चीनी विद्रोहियों ने जंग छेड़ रखी थी.

इस घटना से गुस्साए जापान ने चीनी विद्रोहियों के खिलाफ भयानक कार्रवाई की. और फिर चीन के मुकडेन इलाके पर कब्जा कर लिया. ऐसा भी कहा जाता है कि इस घटना के पीछे जापान का ही हाथ था. वह चाहता था कि मुकडेन पर पूरी तरह से आधिपत्य जमा लिया जाए लेकिन उसे कोई रास्ता नहींं सूझ रहा था. अंत में उसने ये षड्यंत्र रचा.



प्रतीकात्मक तस्वीर




बौद्ध भिक्षुओं की पिटाई
इसके कुछ ही महीनों बाद यानी 18 जनवरी 1932 को शंघाई में कुछ जापानी बौद्ध भिक्षुओं को चीनी लोगों ने बुरी तरह से पीट दिया. इसमें दो बुरी तरह घायल हो गए और एक की मौत हो गई. दरअसल, मुकडेन की घटना के बाद चीनी लोगों में जापान के प्रति गुस्सा भर गया था. ये गुस्सा पहले चीन-जापान युद्ध में जापान के हाथों मिली हार की वजह से भी था.

बौद्ध भिक्षुओं को पीटे जाने की घटना का तो जैसे जापान इंतजार ही कर रहा था. हफ्ते भर के भीतर जापानी सैनिकों ने शंघाई शहर के आस-पास बड़ी संख्या में डेरा डाल दिया. उधर चीनी लोग भी जापान का जबरदस्त तरीके से विरोध कर रहे थे. शंघाई के लोगों ने जापान में बनी वस्तुओं का बॉयकॉट कर दिया.

27 जनवरी को जापानी सैनिकों से शंघाई के मुंसिपल कॉरपोरेशन को चेतावनी दी कि वो बौद्ध भिक्षुओं के मामले की लिखित भर्त्सना करें और इस घटना में अगर किसी भी बौद्ध इमारत को नुकसान हुआ हो तो उसके लिए मुआवजा दे.

28 जनवरी की दोपहर तक शंघाई मुंसिपल कॉरपोरेशन इसके लिए तैयार हो गया था. लेकिन जापान को तो शंघाई के साथ कुछ और ही करना था. उसे शंघाई पर अधिकार करना था. ये सारी घटनाएं तो काफी हद तक सिर्फ एक दिखावा थीं.

प्रतीकात्मक तस्वीर


शंघाई शहर पर बमबारी
रात 12 बजे शंघाई शहर पर जापानी लड़ाकू विमानों ने भयंकर बमबारी शुरू की. ये पूर्वी एशिया में किसी हवाई हमले की पहली कार्रवाई थी. इसके पहले हवाई हमले की किसी घटना का पूर्वी एशिया में कोई जिक्र नहीं मिलता है. जापानी सैनिकों ने भी हमला बोल दिया.

तकरीबन एक महीने जापानी हमलों के कहर का शिकार शंघाई और उसके आस-पास के इलाके होते रहे. चीन की सेना ने जापानियों मुकाबला किया लेकिन उसकी स्थिति जापान के सामने बेहद कमजोर थी. करीब एक महीने बाद 1 मार्च को चीनी सेनाओं ने युद्ध से खुद को वापस खींच लिया और युद्ध की समाप्ति जापान की जीत के साथ हुई.

ये भी पढ़ें :-

कोविड-19: एक से दूसरे राज्य में जा रहे हैं तो ये नियम जानें, वर्ना हो जाएंगे परेशान

क्या हैं अमेरिका की वो रहस्यमयी बॉयो लैब्स, जिन पर चीन और रूस ने उठाए सवाल

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए नॉलेज से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: May 20, 2020, 9:39 AM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
corona virus btn
corona virus btn
Loading