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जब हेमंत सोरेने पर लगा था अवैध तरीके से जमीन हासिल करने का आरोप

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Updated: December 29, 2019, 11:08 AM IST
जब हेमंत सोरेने पर लगा था अवैध तरीके से जमीन हासिल करने का आरोप
हेमंत सोरेन पर अवैध तरीके से जमीन हासिल करने के आरोप लगे थे

हेमंत सोरेन (Hemant Soren) की छवि लो प्रोफाइल रहने वाले एक साफसुथरे राजनेता की रही है. लेकिन 2014 में बीजेपी (BJP) ने उनपर अवैध तरीके से जमीन हासिल करने के आरोप लगाए...

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हेमंत सोरेन (Hemant Soren) आज झारखंड (Jharkhand) के 11वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने वाले हैं. मुख्यमंत्री के तौर पर उनका ये दूसरा कार्यकाल होगा. इसके पहले वो 2013 में एक साल कुछ महीने के लिए झारखंड के मुख्यमंत्री रहे थे. इस बार के विधानसभा चुनाव में जेएमएम, कांग्रेस और आरजेडी गठबंधन ने बहुमत हासिल किया है. जेएमएम को कुल 81 सीटों में से 30 सीटों पर जीत मिली है और वो सबस बड़ी पार्टी बनकर उभरी.

लो प्रोफाइल रहकर भी हेमंत सोरेन ने हासिल की कामयाबी
रांराजनीति में आए उन्हें ज्यादा वक्त नहीं हुआ है. पहली बार 2005 में वो चुनावी राजनीति में उतरे थे. 2005 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने दुमका सीट से किस्मत आजमाई थी. लेकिन जेएमएम के बागी नेता स्टीफन मरांडी के हाथों उन्हें हार मिली. 2009 में उनके बड़े भाई दुर्गा सोरेन के निधन के बाद जेएमएम के भीतर उनकी भूमिका बढ़ गई. इसके पहले शिबू सोरेन का राजनीतिक वारिस दुर्गा सोरेन को ही माना जा रहा था. 24 जून 2009 को हेमंत सोरेन राज्यसभा के सांसद चुने गए.

इसके बाद दिसंबर 2009 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने दुमका विधानसभा सीट से फिर किस्मत आजमाई. इस बार उन्हें जीत हासिल हुई. हेमंत सोरेन ने बीजेपी के लुईस मरांडी और स्टीफन मरांडी जैसे दिग्गजों को शिकस्त दी. 2009 में झारखंड मे बीजेपी-जेएमएम के गठबंधन वाली सरकार बनी और शिबू सोरेने मुख्यमंत्री बने.



जब हेमंत सोरेन बने राज्य के सबसे कम उम्र के सीएम


सितंबर 2009 में अर्जुन मुंडा की सरकार में हेमंत सोरेन डिप्टी सीएम बने. इसके बाद 2013 में वो राज्य के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बने. हेमंत सोरेन एक साल कुछ महीने तक के लिए झारखंड के सीएम रहे. इसके बाद 2014 में राज्य में बीजेपी की सरकार आ गई और हेमंत विपक्ष के नेता बने.

when jharkhand new cm hemant sorene was facing allegation of acquiring land by illegal way
हेमंत सोरेन अपनी पत्नी कल्पना के साथ


जब लगे अवैध तरीके से जमीन हासिल करने के आरोप
हेमंत सोरेन लो प्रोफाइल रहने वाले सीधे-सादे नेता रहे हैं. उनका नाम किसी बड़े विवाद में नहीं आया. लेकिन राज्य में 2014 में बीजेपी की रघुवर दास सरकार आने के बाद उन पर रांची में अवैध तरीके से जमीन हासिल करने के आरोप लगे. बीजेपी ने हेमंत सोरेन पर आरोप लगाया की रांची के हरमू में उन्होंने गलत तरीके से जमीन हासिल की थी. हरमू की उस जमीन पर मैरिज हॉल बना है.

बताया जाता है कि आज उस जमीन की कीमत करोड़ों में है. बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि इस तरह की कई जमीनें सोरेन परिवार के कब्जे में है. जिसकी कीमत करोड़ों मे है. हेमंत सोरेन पर आरोप लगा कि 2014 के चुनावी हलफनामे में उन्होंने अपनी संपत्ति को छिपाया और उसका ब्यौरा चुनाव आयोग को नहीं दिया. बीजेपी की तरफ से कहा गया कि 30 मार्च 2007 को हेमंत सोरेन ने एक ही दिन में जमीनों के 16 रजिस्ट्री करवाए और कई जगहों पर करीब 5.28 एकड़ जमीन खरीदी. बीजेपी का कहना है कि सोरेन परिवार के पास 100 करोड़ से भी ज्यादा की संपत्ति है.

रांची की जमीन का क्या है मामला
बीजेपी ने आरोप लगाया था कि रांची के हरमू में हेमंत सोरेन ने जो जमीन खरीदी थी, वो छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट के नियमों की अनदेखी करके हासिल की गई थी. हेमंत सोरेन ने ये जमीन राजू उरांव से खरीदी थी. इस जमीन विवाद को लेकर बीजेपी ने हेमंत सोरेन पर तीखे हमले किए.

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हेमंत सोरेन 2013 में राज्य के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बने


क्या है छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट
झारखंड में लागू छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट के मुताबिक राज्य के छोटानागपुर इलाके में कोई भी जमीन का टुकड़ा खरीदने वाले को उस इलाके के अंतर्गत आने वाले पुलिस स्टेशन का निवासी होना जरूरी है. यानी एक ही पुलिस स्टेशन के दायरे में आने वाले लोग ही एकदूसरे की जमीन को खरीद या बेच सकते हैं. ये एक्ट 1908 में लागू हुआ था. ये कानून तब से चला आ रहा है.

1908 के बाद छोटानागपुर की स्थितियां काफी बदल चुकी हैं. पहले काफी बड़े क्षेत्रफल को कवर करने वाले पुलिस स्टेशन हुआ करते थे. अब कई नए पुलिस स्टेशन बन चुके हैं. जानकार बताते हैं कि ऐसे में ये कहना बड़ा मुश्किल है कि कौन सा एरिया किस पुलिस स्टेशन के दायरे में आएगा. पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले इलाकों का निर्धारण 1908 के हिसाब से किया जाए या फिर आज के हिसाब से? कानून में ये भी साफ तौर पर नहीं बताया गया है कि निवासी होने का मतलब सिर्फ ‘निवासी’ होने से है या ‘स्थायी निवासी’ होने से.

क्या हुआ हेमंत सोरेन के खिलाफ जमीन मामले का?
इस मामले में हेमंत सोरेन ने राजू उरांव से जमीन खरीदी थी. राजू उरांव ने कभी कोई शिकायत नहीं दर्ज करवाई और न ही कोर्ट में केस किया. रघुवर दास के मुख्यमंत्री रहते हुए मामले की जांच के लिए स्पेशल इनवेस्टीगेटिव टीम बनाई गई. एसआईटी को इस बात की जांच करने की जिम्मेदारी दी गई कि जमीन मामले में छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट का उल्लंघन हुआ है या नहीं. लेकिन इस मामले में एसआईटी ने कभी अपनी रिपोर्ट नहीं दी.

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First published: December 29, 2019, 11:08 AM IST
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