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बाबरी मस्जिद विध्वंस: कौन हैं कोलकाता के कोठारी बंधु जो अयोध्या में आज भी चर्चित हैं?

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Updated: October 30, 2019, 6:48 PM IST
बाबरी मस्जिद विध्वंस: कौन हैं कोलकाता के कोठारी बंधु जो अयोध्या में आज भी चर्चित हैं?
30 अक्टूबर 1990 को पहली बार कोठारी बंधुओं ने बाबरी मस्जिद पर भगवा झंडा फहराया था

कोलकाता के कोठारी बंधुओं (Kothari Brothers) ने 30 अक्टूबर 1990 को पहली बार बाबरी मस्जिद (Babri Masjid) के गुबंद पर भगवा झंडा लहराया था. इसके बाद दोनों भाई पुलिस फायरिंग में मारे गए थे...

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  • Last Updated: October 30, 2019, 6:48 PM IST
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अयोध्या (Ayodhya) राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद (Ram Mandir Babri Masjid Controversy) की सुप्रीम कोर्ट (Suprme Court) में सुनवाई पूरी हो चुकी है. अब इस मामले में फैसले का इंतजार है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई अपने रिटायरमेंट से पहले राममंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुना सकते हैं. पूरे देश की नजर इस बात पर लगी है कि मामले का निपटारा सुप्रीम कोर्ट किस तरह से करती है.

अरसे से चले आ रहे अयोध्या राम मंदिर बाबरी मस्जिद विवाद में बड़ा आंदोलन 1990 में हुआ था. आज ही के दिन यानी 30 अक्टूबर 1990 को विवादित परिसर में बने बाबरी मस्जिद के गुंबद पर कोठारी बंधुओं (Kothari Brothers) ने भगवा झंडा फहराया था. इसके बाद पुलिस फायरिंग में दोनों भाइयों की मौत हो गई थी. अयोध्या के राममंदिर आंदोलन में कोलकाता के कोठारी बंधुओं के योगदान की अक्सर चर्चा की जाती है.

इन दोनों भाइयों ने पहली बार बाबरी मस्जिद पर भगवा झंडा लहराकर कारसेवकों के बीच सनसनी फैला दी थी. पुलिस प्रशासन को चुनौती देते हुए दोनों भाई बाबरी मस्जिद की गुबंद पर चढ़ गए थे और भगवा झंडा लहराकर आराम से नीचे उतर गए थे. कोलकाता के कोठारी भाइयों का बाबरी मस्जिद पर भगवा लहराने की घटना काफी चर्चित है.

कोलकाता के कोठारी बंधु कारसेवा करने पहुंचे थे अयोध्या

कोलकाता के बड़ा बाजार के रहने वाले रामकुमार कोठारी (23 साल) और शरद कोठारी सगे भाई थे. दोनों भाई राष्ट्रीय स्वयंसेवक से जुड़े थे और नियमित तौर पर शाखा जाया करते थे. 1990 के अयोध्या राम मंदिर आंदोलन में दोनों भाइयों ने कार सेवा में शामिल होने का फैसला किया. उन दिनों अयोध्या में राममंदिर आंदोलन अपने चरम पर था. देश के कोने-कोने से लोग विश्व हिंदू परिषद के आव्हान पर अयोध्या में राममंदिर निर्माण के लिए हो रही कारसेवा में हिस्सा ले रहे थे.

when kothari brothers hoisted saffron flag on babri masjid
राम कुमार और शरद कोठारी की तस्वीर के साथ पूर्णिमा कोठारी


राम और शरद कोठारी ने 22 अक्टूबर की रात कोलकाता से ट्रेन पकड़ी. रामकोठारी और शरद कोठारी की अयोध्या पहुंचने और बाबरी मस्जिद पर भगवा लहराने की पूरी कहानी वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हेमंत शर्मा ने अपनी किताब अयोध्या के चश्मदीद में लिखी है.
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200 किलोमीटर पैदल चलकर कोठारी बंधु पहुंचे अयोध्या
हेमंत शर्मा ने लिखा है कि अयोध्या जाने से लोगों को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन ने ट्रेन और बस सेवाएं रोक दी थीं. अयोध्या आकर राम और शरद कोठारी रुक गए. आगे का रास्ता तय करने के लिए उन्होंने टैक्सी पकड़ी. वो आजमगढ़ के फूलपुर कस्बे तक आ गए थे.

यहां से आगे का रास्ता बंद था तो दोनों भाई पैदल ही अयोध्या की ओर निकल गए. उन्होंने 200 किलोमीटर का सफर पैदल ही तय किया. 25 अक्टूबर को फूलपुर से चले राम और शरद कोठारी 30 अक्टूबर की सुबह अयोध्या पहुंचे.

जब राम और शरद कोठारी सबसे पहले चढ़ें गुंबद पर
राम और शरद कोठारी 30 अक्टूबर को अयोध्या के विवादित परिसर में पहुंचने वाले पहले लोगों में से थे. अयोध्या में कर्फ्यू लगा था. यूपी पीएसी के करीब 30 हजार जवान अयोध्या में तैनात थे. लेकिन कारसेवकों का जत्था अशोक सिंघल, उमा भारती और विनय कटियार जैसे नेताओं की अगुआई में विवादित परिसर की ओर बढ़ता चला जा रहा था. 30 अक्टूबर तक अयोध्या में लाखों कारसेवक इकट्ठा हो चुके थे.

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राम कुमार और शरद कोठारी की तस्वीर के साथ पूर्णिमा कोठारी


कारसेवकों के जत्थे ने विवादित परिसर के पास की पुलिस बैरिकेडिंग तोड़ दी थी. करीब 5 हजार कारसेवक विवादित परिसर में घुस गए. इसी बीच शरद कोठारी पुलिस को चकमा देता हुआ बाबरी मस्जिद की गुबंद पर चढ़ गया. उसके पीछे-पीछे रामकुमार कोठारी भी गुबंद पर पहुंच गया. दोनों भाइयों ने बाबरी मस्जिद की गुबंद पर भगवा लहरा दिया.

पुलिस फायरिंग में मारे गए थे कोठारी बंधु
इसके बाद भी दोनों भाई अयोध्या में हो रही कारसेवा में लगे रहे. हेमंत कुमार ने अपनी किताब में लिखा है कि 30 अक्टूबर को बाबरी मस्जिद की गुबंद पर भगवा लहराने के बाद 2 नवंबर को दोनों भाई विनय कटियार के नेतृत्व में हनुमानगढ़ी जा रहे थे. इसी बीच पुलिस ने फायरिंग कर दी.

दोनों भाई पुलिस की फायरिंग से बचने के लिए लाल कोठी वाली गली के एक घर में छिप गए. थोड़ी देर बाद जब वो घर से बाहर आए तो पुलिस की गोली का शिकार हो गए. दोनों ने वहीं दम तोड़ दिया.

दिसबंर में होनी थी कोठारी बंधुओं के बहन की शादी
राम कुमार और शरद कोठारी की बहन की पूर्णिमा कोठारी की दिसंबर के दूसरे हफ्ते में शादी होनी थी. रामकुमार और शरद कोठारी ने अपने पिता हीरालाल कोठारी से कारसेवा में जाने की इजाजत मांगी तो उन्होंने मना कर दिया. बहुत कहने पर हीरालाल ने उन्हें अयोध्या से तुरंत लौट आने की बात पर जाने की रजामंदी दी.

when kothari brothers hoisted saffron flag on babri masjid
कोठारी बंधुओं की पुलिस फायरिंग में मौत हुई थी


हीरालाल ने अपने दोनों बेटों को अपना हालचाल पोस्टकार्ड के जरिए लिखते रहने को कहा था. दोनों भाई अपनी बहन को खत लिखा करते थे. दोनों की मौत की खबर जब कोलकाता पहुंची तो पूरे परिवार में सन्नाटा पसर गया. पुलिस ने दोनों के शव परिवार को सौंपने से मना कर दिया था. हीरालाल में इतनी भी हिम्मत नहीं बची थी कि वो अपने बेटों का शव देख पाएं. राम कुमार और शरद के बड़े भाई ने सरयू के घाट पर 4 नवंबर को दोनों भाइयों का अंतिम संस्कार किए. अंतिम संस्कार में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा था.

इस बीच कोठारी बंधुओं की मौत के एक महीने बाद दिसंबर के पहले हफ्ते में परिवार को एक चिट्ठी मिली. दोनों भाइयों ने अपनी बहन को लिखा था कि 'तुम चिंता मत करना. तुम्हारी शादी से पहले हम घर वापस लौट आएंगे.'

कोठारी बंधुओं की याद में कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने 2 नवंबर को शौर्य दिवस मनाना शुरू किया. 2015 में कोठारी बंधुओं की बहन पूर्णिमा कोठारी ने अपनी भाइयों की 25वीं पुण्यतिथि पर एक कार्यक्रम करना चाहती थीं. लेकिन अखिलेश सरकार ने इसकी इजाजत नहीं दी.

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First published: October 30, 2019, 12:38 PM IST
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