भारतीय कप्तान ने कहा, तुम मुझे फुलटॉस दो मैं तुम्हें घड़ी दूंगा

ये भारतीय कप्तान जब भी मैदान पर बैटिंग के लिए उतरता था, हमेशा विपक्षी खिलाड़ियों को लालच देता था और कहता था, तुम मुझे फुलटॉस दो मैं तुम्हें घड़ी दूंगा.

Dushyant Kumar | News18Hindi
Updated: June 26, 2019, 4:56 AM IST
भारतीय कप्तान ने कहा, तुम मुझे फुलटॉस दो मैं तुम्हें घड़ी दूंगा
ये भारतीय कप्तान जब भी मैदान पर बैटिंग के लिए उतरता था, हमेशा विपक्षी खिलाड़ियों को लालच देता था और कहता था, तुम मुझे फुलटॉस दो मैं तुम्हें घड़ी दूंगा.
Dushyant Kumar | News18Hindi
Updated: June 26, 2019, 4:56 AM IST
वर्ल्डकप चल रहा है. एक से बढ़कर एक किस्से और कहानियां बाहर आ रही हैं. इसी बीच एक भारतीय कप्तान का जिक्र फिर जोरों पर है. ये भारतीय कप्तान जब भी मैदान पर बैटिंग के लिए उतरता था, हमेशा विपक्षी खिलाड़ियों को लालच देता था और कहता था, 'तुम मुझे फुलटॉस दो मैं तुम्हें घड़ी दूंगा'.

इस भारतीय कप्तान का नाम था महाराज कुमार विजयनगरम. उनकी कप्तानी में भारतीय टीम 1936 में इंग्लैंड के दौरे पर गई थी. महाराज कुमार, विजयनगरम के राजा थे इसलिए लोग उन्हें  विजी कहकर पुकारते थे. उस दौर में विजी ने अच्छी और खुलकर बैटिंग करने के लिए काउंटी टीमों के खिलाड़ियों को खुलकर गिफ्ट बांटे थे. विजी हमेशा विपक्षी टीम के गेंदबाजों से कहते थे कि तुम मुझे ढीली और फुलटॉस गेंद ही फेंकना. इसके एवज में मैं तुम्हें सोने की घड़ी और दूसरे गिफ्ट दूंगा.



बुरी तरह हुए फ्लॉप
कहा जाता है कि विजी न तो अच्छी बैटिंग करते थे, न बॉलिंग और फील्डिंग पर उतरते ही नहीं थे क्योंकि वह खुद को राजा ही समझते थे. 1936 में जब तीन टेस्ट मैचों की सीरीज शुरू हुई, तो वो उसमें बुरी तरह फ्लॉप हुए. तीन टेस्ट मैचों की छह पारियों में उन्होंने केवल 33 रन बनाए. शुरुआत में तेज गेंदबाजी के खौफ के चलते विजी पांच पारियों में नंबर नौ पर बल्लेबाजी के लिए उतरे.

Maharajah of Vizianagram
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और महाराज कुमार.


गिफ्ट लेकर फिंकवाई ढीली गेंदे
विजी के गिफ्ट लेकर ढीली गेंदे फिंकवाने की पोल जल्द ही खुल गई. लंकाशायर काउंटी के खिलाफ मैच में उन्होंने विरोधी टीम के कप्तान को सोने की घड़ी उपहार में दे दी. बदले में कप्तान ने उन्हें कुछ फुल टॉस और ढीली गेंदें फेंकवाईं. बावजूद इसके विजयनगरम कोई खास कमाल नहीं कर सके.
Loading...

ऐसे बने कैप्टन और फिर हुआ विवाद
दरअसल, उस समय BCCI को धन की जरूरत थी. तब महाराज कुमार ने BCCI को पैसा दिया और इसके बदले वह भारतीय टीम के कप्तान बन गए. विजी ही वो कप्तान थे, जिन्होंने लाला अमरनाथ को अच्छा खेलने के बाद दौरे से वापस भेज दिया था. लाला की गलती केवल इतनी थी कि उन्होंने उसने बहस कर ली थी. वो किसी बात पर विजय मर्चेंट से चिढ़ गए तो मुश्ताक अली से कहा कि मर्चेंट को रनआउट करा दो. लेकिन उनका ये दांव उल्टा बैठा, मुश्ताक ने ये बात मर्चेंट से बता दी. फिर इंग्लैंड में उस टेस्ट मैच में दोनों क्रिकेटरों ने पारी ओपन करते हुए शतक ठोंके थे.

ये भी पढ़ें- ICC World Cup: धोनी की आलोचना करके ट्रोलर्स के निशाने पर आए सचिन तेंदुलकर
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...