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जब नेहरू की बहन को हुआ मुस्लिम से प्यार, फैमिली ने कहा-नहीं हो सकती शादी

विजय लक्ष्मी पंडित
विजय लक्ष्मी पंडित

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में लव जिहाद (Love Jihad) का कानून लागू हो गया है लेकिन दो धर्मों के बीच प्यार से नेहरू (Nehru) और महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) का परिवार भी नहीं बच सका था. तब क्या हुआ जब जवाहरलाल नेहरू (Jaweaharlal Nehru) की बहन विजयलक्ष्मी पंडित (Vijayalaxmi Pandit) को एक मुस्लिम से प्यार हो गया

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 25, 2020, 3:20 PM IST
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उत्तर प्रदेश में लव जिहाद के खिलाफ कड़ा कानून बना दिया गया है. अब अगर दो धर्मों की शादी के बीच ये पाया गया कि जबरदस्ती धर्मांतरण कराया गया है. संयोग की बात है कि महात्मा गांधी के बेटे और जवाहरलाल नेहरू की बहन दोनों को दूसरे धर्म की लड़की और लड़के से प्यार किया. परिवार ने इस प्यार के खिलाफ वीटो करके शादी से इनकार कर दिया.

इस कड़ी में हम आपको नेहरू परिवार उस प्रेम कहानी के बारे में बताते हैं, जिसमें लड़का मुस्लिम था, बेहद सभ्रांत, समृद्ध और पढ़े-लिखे परिवार का. बाद में भारत का राजदूत भी बना. जवाहरलाल नेहरू की बहन विजयलक्ष्मी पंडित उसके प्यार में दीवानी थीं. दोनों शादी करना चाहते थे. पिता मोतीलाल नेहरू ने सख्त तौर पर इस शादी से इनकार कर दिया.

इलाहाबाद में मोतीलाल नेहरू (Motilal Nehru) का परिवार आधुनिक ख्यालात और जीवनशैली के लिए जाना जाता था. लेकिन जब बेटी विजयलक्ष्मी पंडित (Vijaya Lakshmi Pandit) ने प्यार का ऐलान परिवार के सामने किया तो खलबली मच गई. पिता मोतीलाल ने फैसला सुनाया कि ये शादी नहीं हो सकती.



विजयलक्ष्मी पंडित सोवियत संघ में भारत की पहली राजदूत बनीं. फिर अमेरिका में उन्हें राजदूत बनाया गया. वो संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत की पहली राजदूत बनीं. उनका जन्म 18 अगस्त 1900 को इलाहाबाद में हुआ था. जब मोतीलाल नेहरू ने मुस्लिम युवक से उनकी शादी से दो-टूक मना कर दिया तो उसके बाद 1921 में उनकी शादी काठियावाड़ के सुप्रसिद्ध वकील रणजीत सीताराम पंडित से हुई. विजयलक्ष्मी पंडित के पति भी आजादी की लड़ाई में जोरशोर से हिस्सा ले रहे थे. एक बार उन्हें जेल में डाल दिया गया. वहीं उनका निधन हो गया.
विजयलक्ष्मी पंडित और जवाहरलाल नेहरू को एकजमाने में भारतीय राजनीति में ताकतवर भाई-बहन के रूप में देखा जाता था


मोतीलाल नेहरू के अखबार में संपादक थे वो 
जिस मुस्लिम युवक सैयद हुसैन से विजयलक्ष्मी पंडित को प्यार हुआ था,उसे मोतीलाल नेहरू ने ही अपने अखबार "इंडिपेंडेंट" का संपादक बनाकर इलाहाबाद बुलाया था. गांधीजी भी उससे स्नेह करते थे. जवाहरलाल नेहरू से भी उसके संबंध बाद तक बने रहे. वो बेहद प्रतिभाशाली और पढ़ा-लिखा शख्स था.

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हुसैन ने अमेरिका में भारत की आजादी के पक्ष में बड़ा कैंपेन चलाया. नेहरू ने उन्हें मिस्र का राजदूत बनाया था. वह बंगाल के बहुत प्रतिष्ठित और समृद्ध परिवार से ताल्लुक रखते थे. उच्च शिक्षित थे. जब मोतीलाल नेहरू ने इलाहाबाद से अंग्रेजी में 'इंडिपेंडेंट' के नाम से अखबार शुरू करना चाहा, तो उन्हें एक तेजतर्रार और समझदार एडिटर की जरूरत थी. वो एडीटर हुसैन बने.

सैयद हुसैन इलाहाबाद में मोतीलाल नेहरू के अखबार "इंडिपेंडेंट" के संपादक बनकर आए. उन्होंने बहुत कम समय अखबार के तेवर में जबरदस्त बदलाव किया. वो कलकत्ता में पैदा हुए थे. उनके पिता सैयद मुहम्मद जाने-माने विद्वान थे. तब बंगाल के रजिस्ट्रार जनरल थे.

सैयद हुसैन इलाहाबाद में मोतीलाल नेहरू के अखबार इंडिपेंडेंट के संपादक बनकर आए. उन्होंने बहुत कम समय अखबार के तेवर में जबरदस्त बदलाव किया


विजयलक्ष्मी उनसे आकर्षित हो गईं
जब हुसैन संपादक बने तो "इंडिपेंडेंट" चर्चित अखबार बन गया. उसकी हेडिंग्स ध्यान खींचने वाली और संपादकीय धारदार होते थे. तब विजयलक्ष्मी 19 साल की थीं. वो रोज अखबार के ऑफिस आती थीं. अखबार के संपादन के कामों को सीखने की कोशिश कर रही थीं. हुसैन 31 साल के थे. इसी दौरान दोनों एक दूसरे के प्रति आकर्षित हो गए. वैसे भी हुसैन की स्मार्टनेस, व्यक्तित्व और विद्वता का कोई भी कायल हो सकता था.

वो हुसैन से शादी करना चाहती थीं
विजयलक्ष्मी प्यार में पड़ गईं. हुसैन ने शुरू में इससे बचने की कोशिश की लेकिन लंबे समय तक कर नहीं पाए. विजयलक्ष्मी इस प्यार को लेकर इतनी गंभीर थीं कि वह हुसैन से शादी करना चाहती थीं. उन्होंने परिवार के सामने अपने प्यार को जाहिर कर दिया.

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नेहरू परिवार ने हुसैन से इलाहाबाद छोड़ने के लिए कहा
वो ऐसा समय था, जब दूसरे धर्म में शादी सोची ही नहीं जा सकती थी. लिहाजा नेहरू परिवार इसके पक्ष में नहीं था. जब विजयलक्ष्मी अड़ी रहीं, तो मोतीलाल इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि हुसैन के इलाहाबाद में रहने से हालात बेकाबू हो सकते हैं. लिहाजा उन्होंने हुसैन से अखबार और इलाहाबाद दोनों छोड़ने का अनुरोध किया.

हुसैन इंग्लैंड चले गए
उन दिनों विजयलक्ष्मी और हुसैन का अफेयर मीडिया में भी आया. 1920 में हुसैन ने इलाहाबाद छोड़ दिया. हुसैन खिलाफत आंदोलन का हिस्सा बनकर इंग्लैंड चले गए. वहां भारतीय स्वाधीनता की आवाज को बल देने लगे. लंदन में वो कांग्रेस के आधिकारिक प्रकाशन के संपादक बने. ब्रिटेन से फिर अमेरिका चले गए. जहां वो 1946 तक रहे.

विजयलक्ष्मी की शादी मराठी ब्राह्मण बैरिस्टर से
नेहरू परिवार ने फिर तुरत-फुरत विजयलक्ष्मी के लिए योग्य वर की तलाश शुरू की. 1921 में महाराष्ट्र के एक ब्राह्मण बैरिस्टर रंजीत सीताराम पंडित से उनकी शादी कर दी. सीताराम बैरिस्टर ही नहीं, बल्कि विद्वान भी थे. उन्होंने कल्हण के महाकाव्य 'राजतरंगिनी' का अनुवाद संस्कृत से अंग्रेजी में किया. विजयलक्ष्मी के तीन बच्चे हुए.

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हुसैन और विजयलक्ष्मी में दोस्ती बनी रही
नेहरू के पर्सनल सचिव एमओ मथाई ने अपनी किताब में लिखा, 1945 में हुसैन और विजयलक्ष्मी अमेरिका में साथ देखे जाने लगे. जब भारत आजाद हुआ तो नेहरू ने ही हुसैन को मिस्र का पहला भारतीय राजदूत बनाया. उसी दौरान विजयलक्ष्मी पंडित को सोवियत संघ का राजदूत बनाकर भेजा गया.

हुसैन ने कभी शादी नहीं की
हुसैन ताजिंदगी अकेले ही रहे. उन्होंने कभी शादी नहीं की. मिस्र में राजदूत रहने के दौरान लोग उनके रहनसहन के कायल थे. उन्हें 1949 में अमेरिका का राजदूत बनाने की घोषणा कर दी गई थी. इसी बीच मिस्र के होटल में हार्टअटैक से उनका निधन हो गया. वहां राजकीय सम्मान के साथ उन्हें विदाई दी गई. काइरो की एक सड़क का नाम भी उनके नाम पर रखा गया.
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