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बेहमई कांड: जब जय मां काली के नारे लगाकर फूलन देवी ने 26 लोगों को गोलियों से भून दिया

बेहमई में फूलन देवी ने 20 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी

बेहमई में फूलन देवी ने 20 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी

14 फरवरी 1981 को चंबल की कुख्यात डकैत फूलन देवी (Phoolan Devi) ने यूपी के बेहमई (Behmai) गांव में ठाकुर जाति के 20 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी.

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    39 साल पहले हुए बेहमई कांड (Behmai Massacre) पर आज फैसला आ सकता है. बेहमई कांड में कुख्यात डकैत फूलन देवी (Phoolan Devi) ने 26 लोगों को एक लाइन में खड़ा करके गोली मार दी थी. इसमें 20 लोग मारे गए थे. इस नरसंहार ने पूरे देश में सनसनी मचा दी थी. फूलन देवी इस कांड के बाद से सुर्खियों में आ गई थी. फूलन देवी आज नहीं हैं. 2001 में फूलन देवी की उसके घर के बाहर ही गोली मारकर हत्या कर दी गई. अब 39 साल बाद बेहमई कांड की यादें फिर से ताजा हो गई हैं. जब फूलन देवी ने अपने साथ हुए रेप का बदला लेने के लिए एकसाथ 20 लोगों की जान ले ली थी.

    क्या हुआ था बेहमई कांड में
    14 फरवरी 1981 को चंबल की कुख्यात डकैत फूलन देवी ने यूपी के बेहमई गांव में ठाकुर जाति के 20 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी. बेहमई कानपुर से करीब 100 किलोमीटर की दूरी पर बसा एक छोटा सा गांव है. 14 फरवरी 1981 को फूलन के गिरोह ने गांव पर हमला बोला था.

    होली के ठीक पहले का वक्त था. गांववाले होली की तैयारियों में जुटे थे. फूलन देवी के डकैतों का गिरोह आया और पूरे गांव पर कहर बनकर टूट पड़ा. इस हमले के एक चश्मदीद जंतर ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए बताया था कि 'हमलोग उस दिन गांव के कुंए के करीब थे. फूलन देवी अपना साथियों मान सिंह, फूसा और भीखा के साथ गांव में दाखिल हुई. वो हमें गालियां दे रही थीं. उसने कहा कि हमलोगों ने ही पुलिस को उसकी जानकारी दी है. किसी गांववाले ने कोई बात नहीं की. इसके बाद फूलन देवी और उसके गिरोह ने गांववालों पर फायरिंग शुरू कर दी. गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा इलाका थर्रा उठा. कुछ मिनट के लिए कुछ पता ही नहीं चला. धुएं और गुबार में कुछ साफ-साफ नहीं दिख रहा था. धूल छंटी तो जमीन पर लाशें ही लाशें बिछी थी. हर तरफ खून फैला था.'

    जंतर सिंह का कहना था कि 'वो लाशों के बीच अपनी सांसे रोककर पड़ा था. फूलन देवी का साथी कह रहा था कि देखो एक भी आदमी बचने नहीं पाए. तभी उसकी नजर मेरी ऊपर पड़ी और उसने कहा कि देखो ये लुंगी और बनियान वाला जिंदा है. मैंने कहा कि तुमने निहत्थे गांववालों पर गोली चलाकर अच्छा नहीं किया है. इस पर मान सिंह ने बंदूक मेरे सीने पर सटा दी. मेरी आंखों में देखते हुए उसने गोली चला दी.' हालांकि इस हमले में जंतर सिंह बच गया था.

    इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए एक और चश्मदीद महिला ने बताया था कि फूलन देवी जय मां काली के नारे लगा रही थी. उसने गांव के मर्दों को चुन-चुनकर गोली मार दी. हमारे घरों को भी लूट लिया.

    when phoolan devi killed 20 people with bullets in behmai masscre by raising slogans of jai maa kali
    फूलन ने अपने साथ हुए गैंगरेप का बदला लिया था


    फूलन देवी ने क्यों लिया था इतना खौफनाक बदला
    फूलन का गांव गुरहा का पूर्वा बेहमई से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर है. उस दौर में इस इलाके में डकैतों का आतंक चलता था. बेहमई गांव के ठाकुर जाति के दो डकैतों लाला राम और श्रीराम ने फूलन का बेहरमी से गैंगरेप किया था.

    बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में फूलन देवी ने कहा था कि उन्होंने बहुत बुरा काम किया था. मैं आज भी उस दिन को याद कर कांप जाती हूं. फूलन देवी ने कहा था, 'मेरे साथ उनलोगों ने इतने बुरे-बुरे अत्याचार किए तो हम क्यों मर जाएं? क्यों न हम उन अत्याचार करने वालों को बताएं कि तुमने जो किया है उसका तुम्हें भी जवाब मिलेगा.' इसी भावना ने उन्हें अपने साथ हुए अत्याचार का बदला लेने को प्रेरित किया.

    फूलन देवी ने दो ठाकुरों के किए अत्याचार का बदला ठाकुरों के पूरे गांव से लिया. हालांकि फूलन के परिवार वाले कहते हैं कि उसने एक भी गोली नहीं चलाई थी. गोलियां फूलन के साथी डकैतों ने चलाई थी. इस नरसंहार के बाद फूलन देवी का नाम पूरे चंबल में गूंजने लगा. वो पूरे देश में मशहूर हो गई. 20 लोगों की हत्या के आरोप के बावजूद लोगों की एक संवेदना उनके साथ थी, क्योंकि उन्हें लगता था कि फूलन ने अपने साथ हुए खौफनाक अत्याचार का बदला लेने के लिए ऐसा कदम उठाया था.

    बेहमई कांड के बाद कैसे बदली फूलन देवी की जिंदगी
    इस कांड के दो साल बाद ही फूलन देवी ने 1983 में मध्य प्रदेश सरकार के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. इसमें मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह की बड़ी भूमिका थी. फूलन देवी ने शर्त रखी थी कि उसे यूपी की जेल में नहीं रखा जाएगा. इसके बाद वो 11 वर्षों तक ग्वालियर और जबलपुर की जेल में रहीं. 1994 में ट्रायल के दौरान ही फूलन देवी को बेल मिल गई. फूलन देनी और यूपी पुलिस के बीच कानूनी मुकदमा कानपुर कोर्ट में चलता रहा.

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    फूलन देवी की 2011 में गोली मारकर हत्या कर दी गई


    जब फूलन देवी ने राजनीति में कदम रखा
    फूलन देवी काफी मशहूर हो चुकी थीं. वो वंचित शोषित तबके के प्रति सामंतों और ऊंची जाति के लोगों के अत्याचार की प्रतीक बन चुकी थीं. इसलिए दलित और पिछड़ी जातियों की राजनीति करने वालों ने उन्हें हाथों हाथ लिया. मुलायम सिंह यादव की सरकार ने फूलन देवी के खिलाफ चल रहे 55 मामले वापस ले लिए.

    फूलन देवी समाजवादी पार्टी में शामिल हो गईं. पार्टी ने उन्हें मिर्जापुर सीट से उम्मीदवार बनाया. फूलन देवी ने 1996 और 1999 का लोकसभा चुनाव सपा के टिकट पर जीता. इसके बाद वो दिल्ली में रहने लगीं. साल 2001 में दिल्ली में उनके आवास के बाहर शेर सिंह राणा नाम के एक शख्स ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी.

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