भारत आने के बाद किसी आपरेशन के लिए कब पूरी तरह तैयार होंगे राफेल फाइटर जेट

भारत आने के बाद किसी आपरेशन के लिए कब पूरी तरह तैयार होंगे राफेल फाइटर जेट
फ्रांस से भारत के लिए निकले 5 राफेल, 29 को पहुंचेंगे भारत. प्रतीकात्मक तस्वीर.

राफेल फाइटर जेट को पाकिस्तान और चीन में मौजूद किसी भी फाइटर विमान से उम्दा माना जा रहा है. आमतौर पर जब कोई विमान भारत आता है तो एयरफोर्स उसे किसी भी अभियान में पूरी तरह उतारने के लिए 06 महीने का समय लेती है लेकिन राफेल के लिए ऐसा नहीं होगा

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फ्रांस से पांच राफेल फाइटर जेट फ्रांस के मेरीजिनाक से सोमवार को चले थे. बुधवार को किसी भी समय वो भारत पहुंच जाएंगे. अब सबसे बड़ा सवाल अंबाला में उतरने के बाद कितने दिनों के भीतर राफेल को किसी भी तरह के आपरेशन के लिए तैनात किया जा सकेगा. खासकर भारत और चीन के बीच लद्दाख के करीब सीमा विवाद को लेकर.

एक रिपोर्ट के अनुसार अब तक देश के 12 पायलट राफेल के लिए पूरी तरह ट्रेंड हो चुके हैं. इन्हीं में से कुछ राफेल विमान को लेकर फ्रांस से भारत आ रहे हैं. केवल पायलट ही नहीं बल्कि कुछ इंजीनियर और टैक्नीशियन भी इस विमान से अच्छी तरह परिचित हो चुके हैं. वो अब इसके एक-एक पुर्जे औऱ उडा़न के साथ इसकी संहारक क्षमता पर बखूबी अपना हाथ रवां कर चुके हैं.

गेम चेंजर फाइटर जेट है राफेल 
राफेल को एशियाई महाद्वीप में गेम चेंजर लड़ाकू विमान माना जा रहा है. दावा ये है कि चीन और पाकिस्तान के पास मौजूदा दौर में जो भी बेहतरीन फाइटर जेट हैं, ये उससे बेहतर होगा.इसकी ताकत और क्षमता का अन्य विमानों से कोई मुकाबला ही नहीं है.
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फ्रेंच विमान निर्माता कंपनी डसों एविएशन ने पिछले साल अक्टूबर तक भारत को 09 राफेल विमान सुपुर्द कर दिये थे. पहले तीन विमान इससे भी पहले मार्च में दे दिए गए थे.

फ्रांस में हुई एय़रफोर्स क्रू की समुचित ट्रेनिंग
भारत ने उन विमानों को भारत में लाने की बजाए इन विमानों की समुचित ट्रेनिंग के लिए अपने पायलट और क्रू मेंबर्स को अलग - अलग टुकड़ों में फ्रांस भेजा था. इसमें भारतीय वायुसेना के पायलट समेत इंजीनियर और तकनीशियन भी शामिल हैं. इन सभी की अलग अलग बैच में ट्रेनिंग हुई.

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5 राफेल फाइटर जेट कल (29 जुलाई) को अंबाला एयरबेस पहुंच जाएंगे.


कैसे मिलती है ट्रेनिंग 
दरअसल दसों एविएशन ने अपने लड़ाकू विमानों की समुचित ट्रेनिंग के लिए फ्लाइटसेफ्टी इंटरनेशऩल एंड सीएई कंपनी से तालमेल कर रखा है, जो अब तक उसके विमानों की ट्रेनिंग खरीददार देशों के क्रू मेंबर्स को देती रही है.

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दसों एविएशन की पार्टनर ट्रेनिंग कंपनी के पास दक्ष पायलट क्रू, तकनीक स्टाफ और फ्लाइट अटेंडेंट्स हैं, जो लड़ाकू विमानों के लिए खरीददार देशों को अलग अलग तरह की ट्रेनिंग देकर उन्हें विमान की उड़ान से लेकर तकनीक पहलुओं तक दक्ष करते हैं, इसके अलावा दसों एविएशन की एक अपनी ट्रेनिंग एकेडमी भी है. ताकि जब ये विमान संबंधित देश के पास पहुंच जाएं तो उसके आपरेशन में उन्हें किसी भी तरह की दिक्कत से दो-चार नहीं होना पड़ें. आमतौर पर ये ट्रेनिंग छह महीने की होती है.

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राफेल विमान के लिए प्रतीकात्मक तस्वीर.


2018 में ही ट्रेनिंग के लिए फ्रांस गया था भारत का पहला बैच
भारत का पहला बैच जो राफेल की ट्रेनिंग के लिए पहुंचा था, वो वर्ष 2018 के सितंबर में गया था. इसमें छह सदस्य थे, जिसमें एक पायलट, एक इंजीनियर और चार टैक्नीशियन शामिल थे. इन्हें पूर्वी फ्रांस के सेंट डिजियर एयरबेस पर ट्रेनिंग दी गई. नवंबर 2019 में भारत को तीन राफेल फ्रांस में सुपुर्द किए गए. जिस पर भारतीय दल की और ट्रेनिंग हुई. मई में भारत को दसों एविएशन की ओर से 06 विमान और दिए गए. जिसमें 05 अब भारत पहुंच रहे हैं.

राफेल विमानों के साथ बनेगी दो स्क्वाड्रन
भारत दसों एविएशन से कुल 36 फाइटर जेट खरीद रहा है, इससे उसकी दो स्क्वाड्न तैयार होंगी. एक को अंबाला में स्क्वाड्रन 17 में शामिल किया जाएगा तो दूसरी स्क्वाड्रन पश्चिन बंगाल में वायुसेना के हाशीमारा एयर बेस पर रखी जाएगी. खबरों के अनुसार भारत को 2021 या 2022 तक सभी 36 फाइटर जेट मिल जाने की संभावना है.

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कितने दिनों में आपरेशन के लिए होगा पूरी तरह तैयार 
सूत्रों का कहना है कि भारत अगर चाहे तो इसको एक हफ्ते के भीतर अभियानों के लिए तैनात कर सकता है. सामान्य हालात में जब भारतीय वायुसेना में कोई भी नया विमान आता है तो अभियानों के लिए उसे पूरी तरह शामिल करने में छह महीने का समय लिया जाता है. लेकिन भारत के लिए ये असाधारण समय है, दूसरे भारतीय क्रू मेंबर्स ने बहुत अच्छी तरह से फ्रांस में इसकी ट्रेनिंग ले ली है.

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अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात किए जाएंगे राफेल फाइटर जेट.


एक हफ्ते के भीतर और जरूरत पर एक दिन में भी
हालांकि सूत्रों का ये भी कहना है कि पायलट अभी ट्रेनिंग मोड में रहे हैं और अब उन्हें सीधे काम्बेट मोड में आने की जरूरत होगी, इसके लिए भी उन्हें कई तरह की ट्रेनिंग से गुजरना होता है. हालांकि असाधारण हालात में असाधारण तरीकों की जरूरत होती है, लिहाजा अगर जरूरत हुई तो एक हफ्ते के भीतर वो हरकत में आ जाएंगे, हालांकि वो ऐसा एक दिन में भी कर सकते हैं. वो सब स्थितियों पर ही निर्भर करेगा.

मिसाइल की खेप भी अंबाला पहुंची 
कहा जा रहा है कि राफेल विमान में लगने वाली मिसाइल्स पहले ही अंबाला बेस पर पहुंच चुकी हैं. जिसमें वो हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल मेटेओर भी शामिल है. ये लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल है. इसकी रेंज 150 किलोमीटर की है यानि भारतीय वायु सीमा को पार किए बगैर भी ये दुश्मन के विमान का उसी के देश में मिसाइल हमले से काम तमाम कर सकती है. इस क्षमता की मिसाइल ना तो पाकिस्तान के पास है और ना ही चीन के.

राफेल विमान कई और तरह की मिसाइल से भी लैस होंगे, जिसमें हवा से जमीन पर मार करने वाली 60 किलोमीटर रेंज की हैमर मिसाइल भी शामिल हैं.
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