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जब घंटों के लिए गायब हो गया सरदार पटेल का जहाज, पूरे देश में मचा हड़कंप

जब घंटों के लिए गायब हो गया सरदार पटेल का जहाज, पूरे देश में मचा हड़कंप

सरदार पटेल

सरदार पटेल

सरदार वल्लभ भाई पटेल (Sardar Vallabh Bhai Patel) एक विमान हादसे में बाल बाल बचे थे. उनका विमान दिल्ली से जयपुर के लिए उड़ा लेकिन कुछ समय बाद उसका संपर्क कंट्रोल रूम से टूट गया. विमान के एक इंजन ने भी काम करना बंद कर दिया. पायलट ने घोषणा की कि कुछ भी हो सकता है. जब घंटों के लिए विमान गायब हो गया तो पूरे देश में चिंता की लहर दौड़ गई

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29 मार्च 1949 के दिन जब आकाशवाणी से प्रसारित हुआ, वल्लभ भाई को दिल्ली से जयपुर ले जा रहे विमान से संपर्क नहीं हो पा रहा है, तो पूरे देश में हड़कंप मच गया. भय और चिंता की स्थितियां पैदा हो गईं. जो उड़ान मुश्किल से घंटे भर में पहुंच जानी चाहिए थी. उसका घंटों पता नहीं चला. आखिर हुआ क्या था. उस दिन वास्तव में सरदार पटेल मौत के मुंह से वापस लौटे थे.

उस दिन शाम 05.32 बजे पटेल डव नाम के दो इंजनों वाले जहाज में बेटी मणि बहन, जोधपुर के महाराजा और सचिव शंकर के साथ पालम एयरपोर्ट दिल्ली से जयपुर के लिए उड़े थे. जयपुर केवल 158 मील दूर था, जहां एक घंटे में पहुंचा जा सकता था. लेकिन वो इस बीच ही उनके विमान का संपर्क कंट्रोल रूम से टूट गया.

प्लेन कम ऊंचाई पर उड़ा
राजमोहन गांधी की किताब “पटेल ए लाइफ” में इस पर विस्तार से लिखा गया है. किताब के अनुसार, विमान छोटा था. ये जरूरी स्पीड नहीं पकड़ पाया. लिहाजा इसको हवा में जितने ऊपर जितने समय में पहुंचना था, वो भी नहीं हो सका. लेकिन ये इसलिए चिंताजनक बात नहीं थी क्योंकि पायलट को खास दिशानिर्देश दिए गए थे कि हृदयरोगी होने के कारण वल्लभभाई पटेल को 3000 फीट से अधिक ऊंचाई पर नहीं ले जाना है.

राजमोहन गांधी की किताब “पटेल ए लाइफ” में उनके जीवन के तमाम पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई है.

जोधपुर के महाराजा का था विमान
ये विमान महाराजा जोधपुर का था. वो देश में विमानों को लाने के मामले में मुख्य माने जाते थे. उन्होंने जोधपुर में खुद के खर्च पर एयरपोर्ट और उड़ान पट्टी बना रखी थी. उनके पास कई विमान थे. वो खुद भी विमान उड़ाने में सिद्ध थे.

एक इंजन ने काम करना बंद कर दिया और रेडियो संपर्क टूट गया
महाराजा जोधपुर ने एक घंटे बाद वल्लभ भाई को बताया कि विमान का एक इंजन काम नहीं कर रहा. रेडियो संपर्क टूट गया. विमान नीचे उतरने लगा. विमान जिस क्षेत्र में नीचे को उतर रहा था, वो पहाड़ी क्षेत्र था. ये खतरनाक था. पटेल की बेटी मणिबेन का दिल तेजी से धड़कने लगा. उन्हें लगा कि अब अंत करीब आ गया है.

विमान हादसे में मृत्यु की आशंका पैदा हो गई थी
वल्लभ भाई के मन की क्या प्रतिक्रिया थी, पता नहीं लेकिन वो बगैर विचलित हुए शांत बैठे हुए थे. संभव है कि उनके मन में विमान दुर्घटना में मृत्यु होने की आशंका भी पैदा हुई हो. जब जयपुर 30 मील की दूरी था, तब पायलट ने जहाज को नीचे उतारने का फैसला किया. यात्रियों को सूचित किया गया हो सकता है कि नीचे उतरने पर विमान के दरवाजे जकड़ जाएं और ये खुल नहीं पाए. ऐसी स्थिति में उन्हें छत पर बने आपातकालीन द्वार से बाहर निकलना होगा. ये काम जल्दी करना होगा. क्योंकि विमान की पेट्रोल टंकी में आग भी लग सकती है.

विमान में जो स्थितियां पैदा हो गईं, उसमें हर किसी को लग रहा था कि मौत सामने है लेकिन सरदार पटेल बगैर विचलित हुए चुपचाप बैठे रहे.

विमान को आपात स्थिति में नदी के किनारे उतारा गया
आपातकालीन द्वार ज्यादा चौड़ा नहीं था. 6.20 बजे पायलट ने सबको सूचना दी कि वो अपनी कमरपेटियां कसकर बांध लें. 05 मिनट बाद उसने नदी के पास जहाज को सुरक्षित उतार दिया. आग नहीं लगी. दरवाजा भी नहीं जकड़ा. इसलिए सभी लोग सुरक्षित बाहर आ सकते थे. लेकिन किसी को नहीं मालूम था कि विमान जहां उतरा था, वो जगह क्या है और जयपुर से कितनी दूर है.

गांववालों ने चारपाई डालकर पटेल को बिठाया
एक ग्वाला पास आया. पूछताछ पर पता लगा कि वो शाहपुर नाम के गांव के करीब उतरे हैं. ग्वाला जाकर तीन लोगों को बुला लाया. फिर कुछ लोग और आ गए. चारपाइयां डाली गईं. पानी, दूध, मिठाइयां आईं. वो जमाना मोबाइल फोन का नहीं था. गांवों में लैंडलाइन फोन भी नहीं होते थे. अब समस्या ये थी कि पटेल के सुरक्षित होने का समाचार कैसे पहुंचाया जाए.

वल्लभ भाई पटेल को खेतों में होकर आधा मील चलना पड़ा
महाराजा और रेडियो अधिकारी किसी निकटतम मार्ग की खोज में निकले, ताकि सरदार पटेल के सुरक्षित होने का समाचार सब जगह पहुंचाया जा सके. वाहन की व्यवस्था की जा सके. अंत में एक गाड़ी मिली, मगर उसका घोड़ा एकदम मरियल और अड़ियल था. सूर्यास्त कभी का हो चुका था. अंधेरा हो रहा था. दो घंटे बाद वल्लभ भाई और उनके साथी जोते हुए खेतों से होकर आधे मील चलते रहने के बाद सड़क किनारे आये.

रात करीब 11 बजे जयपुर पहुंचे
तब तक वहां ग्रामीणों के अलावा एक अफसर केबी लाल पहुंचे. लाल को पटेल के विमान के शाहपुर में उतरने का समाचार मिल चुका था. वो अपने साथ आकाशवाणी के वाहन को भी ले आए थे ताकि ये खबर तुरंत पहुंचाई जा सके.

वल्लभ भाई और उनके साथियों के जयपुर पहुंचने तक रात के 11 बज चुके थे. पूरा भारत पटेल के विमान के टूट जाने की आशंका से शोकमग्न वाली स्थिति में था. जब उन्हें पटेल के जयपुर सकुशल पहुंचने की खबर मिली तो राहत मिली.

नेहरू के पास रात में फोन पहुंचा 
रात करीब 11.00 बजे परेशान होकर चक्कर काट रहे प्रधानमंत्री नेहरू के पास फोन आया. पटेल के सचिव शंकर ने उन्हें सकुशल होने की सूचना दी. पटेल रात में जयपुर में ही रुके. 30 मार्च को भी वह जयपुर में ही रहे. वहां उन्होंने वृहद राजस्थान संघ के कार्यक्रम में हिस्सा लिया. इसी दिन जयपुर, जोधपुर, बीकानेर और जैसलमेर राजस्थान में शामिल हुए थे. 31 मार्च को वापस दिल्ली पहुंचे.

संसद में जोरदार स्वागत हुआ
पालम में उनके स्वागत के लिए भारी भीड़ इकट्ठी थी. जब वो उस दिन दोपहर बाद संसद में घुसे तो वहां सभी साथी खड़े हो गए. सबने मेजें थपथपाकर ऊंचे स्वर से उनके दीर्घायु होने की कल्पना की. पूरे 03 मिनट तक हर्षनाद होता रहा. सरदार पटेल भी विह्वल हो गए. उन्होंने कांपती आवाज में सदन से कहा,

“आप सबके स्नेह और आदर का जो दर्शन मुझे अभी हुआ है, वह मेरे लिए चिर स्मरणीय रेहगा. नदी के तट पर मैने जो 03-04 घंटे बिताए, उसमें भी मैं मन ही मन यही सोचता रहा कि मैं देशवासियों को चिंता में डाल रहा हूं. “

Tags: Jaipur Airport, Plane Crash, Sardar patel, Sardar Vallabhbhai Patel

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