क्या है ट्रंप का वो नारा, जिसने अमेरिका में आग लगा दी

क्या है ट्रंप का वो नारा, जिसने अमेरिका में आग लगा दी
पुलिस की हिरासत में अश्वेत व्यक्ति जार्ज फ्लॉयड की मौत के बाद से अमेरिका में बवाल मचा हुआ है

लगभग 53 साल पहले अमेरिकी पुलिस चीफ वॉल्टर (American chief of police Walter Headley) का आदेश था कि अव्वल तो अश्वेत लोगों को पुलिस में लिया ही न जाए और ले भी लें तो उन्हें 'पुलिस' की बजाए 'पेट्रोलमेन' कहा जाए.

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पुलिस की हिरासत में अश्वेत व्यक्ति जार्ज फ्लॉयड की मौत (George Floyd death) के बाद से अमेरिका में बवाल मचा हुआ है. इसी दौरान प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) ने एक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने लिखा- 'वेन द लूटिंग स्टार्ट्स, शूटिंग स्टार्ट्स (When The Looting Starts, The Shooting Starts)'. इसके बाद से हिंसा (riots in America) और भड़क गई. माना जा रहा है कि ये बात ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों (Trump tweet on protectors) को डराने के लिए लिखी थी. वैसे 'वेन द लूटिंग स्टार्ट्स..., वाला नारा अमेरिका में साल 1967 में ही दिया जा चुका है. तब एक पुलिस ऑफिसर ने इसका इस्तेमाल किया था.

साल 1967 में मियामी के पुलिस चीफ वॉल्टर हेडले ने पहली बार ये नारा दिया था. एक न्यूज कॉफ्रेंस में वॉल्टर ने बढ़ते अपराध को रोकने के लिए हिंसा की जरूरत पर जोर देते हुए सीधे क्रिमिनल्स के खिलाफ जंग को घोषणा कर दी. ये उसी दौर की बात है. मियामी हेराल्ड में उस वक्त की रिपोर्ट भी है, जिसमें वॉल्टर ने अपराधियों के खिलाफ जंगली कुत्ते और गोलियां कुछ भी चलाने की बात की थी. बता दें कि तब अपराधी भी अश्वेत नस्ल के लोगों को ही माना जाता था और श्वेत तब तक अपराधी की श्रेणी में नहीं आते थे, जब तक कि उनका जुर्म बहुत बड़ा न हो.


मई 1905 में फिलाडेल्फिया में जन्मे वॉल्टर ने 15 साल की उम्र में स्कूल छोड़ दिया और अपनी उम्र ज्यादा बताकर U.S. Cavalry में भर्ती हो गया. साल 1923 में फ्लोरिडा आने और कई नौकरियां बदलने के बाद वो आखिरकार मियामी पुलिस में भर्ती हुआ और यहीं पर 20 सालों तक रहा. यहीं से उसका रंगभेद खुलकर सामने आया. वैसे रंगभेद के मामले में कुख्यात ये अफसर गे लोगों से भी खासी नफरत करता था. उसी ने गे समुदाय के लिए अलग से बार बनवाने की शुरुआत की. इसके पीछे उसका तर्क था कि बीमारी को अलग-अलग जगहों पर फैलने देने की बजाए एक ही जगह इकट्ठा रहने देना चाहिए.



साल 1967 में मियामी के पुलिस चीफ वॉल्टर हेडले ने पहली बार ये नारा दिया था


कथित तौर पर अपराधियों के साथ हिंसा को जायज मानने वाला ये पुलिस चीफ अक्सर प्रेस के साथ बातचीत में ढींगें हांकता कि उसी ने पुलिस में अश्वेत पुलिस की भर्तियां शुरू की हैं. हालांकि था इसका उल्टा. वॉल्टर ने जब तक लीड किया, तब तक सिर्फ श्वेत पुलिस को ही पुलिस कहलाने का हक था. अश्वेत पुलिस अधिकारियों तक को पेट्रोलमेन कहा जाता था. अगर पुलिस विभाग का कोई दूसरा अधिकारी अश्वेत लोगों के साथ नरमी से पेश आए तो उसे भी वॉल्टर का गुस्सा झेलना पड़ता.

तब मियामी में रह रहे अश्वेत लोगों को आएदिन वॉल्टर की नफरत का शिकार होना पड़ता था. साल 1960 के दशक में पूरी मियामी के अश्वेत लोग परेशान थे. मियामी हेराल्ड अखबार के मुताबिक तब वॉल्टर छोटे से छोटे अपराध पर तुरंत अश्वतों को पकड़ लेता और उनके खिलाफ “shotguns, dogs and a ‘get tough’ policy” अपनाता था. किसी तरह की सुनवाई की कोई गुंजाइश नहीं थी.

जार्ज फ्लॉयड की मौत के बाद से अमेरिका में बवाल मचा हुआ है


तब मियामी हेराल्ड में 17 दिसंबर 1967 को वॉल्टर के रवैये को लेकर फ्रंट पेज लेख आया, जिसमें खुद वॉल्टर का नारा था- वेन द लूटिंग स्टार्ट्स...दरअसल दिसंबर महीने की शुरुआत में ही उसने मियामी में बढ़ते क्राइम के लिए अश्वेत मूल के लोगों को जिम्मेदार माना था और उनके खिलाफ जंग छेड़ दी थी. अश्वेत इलाकों से खोज-खोजकर 15 से 21 साल के लड़कों को निकाला जाने लगा और उनसे तहकीकात होने लगी.

पक्षपात के इसी रवैये के कारण साठ के दशक में मियामी में दंगे शुरू हो गए. माना जाता है कि इसके पीछे वॉल्टर का प्रेस वार्ता में दिया वो लूटिंग-शूटिंग वाला नारा भी था. इसकी वजह से अश्वेत लोगों में श्वेत समुदाय के खिलाफ गुस्सा पनपने लगा. दोनों तरफ गुस्सा बढ़ता ही गया. वैसे हिंसा की असल शुरुआत साल 1687 में हुई. दरअसल अगस्त 1968 में मियामी के बीच पर Republican National Convention चल रहा था. इस जगह के आसपास अश्वेत समुदाय की भरमार थी. इसी दौरान पुलिस की हिंसा के खिलाफ अश्वेत लोगों ने दंगे कर दिए. तब वॉल्टर छुट्टी पर था लेकिन फोन पर ही उसने पुलिस से सख्त एक्शन लेने को कहा. इस एक्शन में 2 अश्वेत मूल के लोग मारे गए और 18 लोग गंभीर रूप से घायल हुए. वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक तब पुलिस ने शक के आधार पर ही 222 अश्वतों को गिरफ्तार किया.

मिनीपोलिस के श्वेत पुलिस अधिकारी डेरेक चाउविन को गिरफ्तार कर लिया गया है और उस पर हत्या का आरोप लगाया गया है


इसके बाद वॉल्टर के आदेश और अश्वेतों के खिलाफ पक्षपात वाले रवैये पर कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई. इसके कुछ महीनों बाद ही नवंबर 1968 में वॉल्टर की मौत हो गई. इसके बाद आई नेशनल कमीशन की रिपोर्ट ने वॉल्टर के भेदभाव पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारी को यकीन नहीं था कि माइनोरिटी के साथ बातचीत से मामले सुलझाना भी पुलिस की जिम्मेदारी है.

वैसे लूटिंग-शूटिंग नारा काफी विवाद के बाद ट्विटर से हटाया जा चुका है. और ट्रंप ने सफाई देते हुए कहा कि उन्हें नहीं मालूम कि ये बात 60 के दशक में कोई पुलिस अधिकारी कह चुका है. साथ ही ट्रंप का ये भी बयान था कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया.

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