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जब UN मिशन ने इस देश में फैलाई थी महामारी, हुई कई हजार मौतें, लाखों संक्रमित

News18Hindi
Updated: March 26, 2020, 3:33 PM IST
जब UN मिशन ने इस देश में फैलाई थी महामारी, हुई कई हजार मौतें, लाखों संक्रमित
उत्तर अमेरिकी देश हैती में संयुक्त राष्ट्र मिशन ने हैजा फैलाया था.

कई साल तक सच्चाई से मुंह मोड़ने के बाद 2016 में संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने स्वीकार किया था कि हैती (Haiti) में हैजा (Cholera) फैलने के पीछे उसका दल जिम्मेदार है.

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  • Last Updated: March 26, 2020, 3:33 PM IST
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कोरोना वायरस की महामारी से इस समय दुनियाभर के देश जूझ रहे हैं. इस महामारी के फैलाव को लेकर चीन आरोप झेल रहा है. खुद चीन भी अमेरिका पर आरोप लगा रहा है. लेकिन इन सारी खबरों के बीच क्या आपको मालूम है कि महज 10 पहले संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के शांति मिशन (Peace Keeping Mission) की वजह से एक पूरा देश मुश्किल में पड़ गया था. हैजे (Cholera) की बीमारी ने पूरे देश में करीब 10 लाख लोगों को संक्रमित कर दिया था और 10 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी.

उत्तर अमेरिकी देश हैती (Haiti) में 2010 में 7.0 रेक्टर पैमाने का एक भीषण भूकंप आया था. इसकी वजह से देश में 2 लाख लोगों की मौत हो गई थी. भूकंप से उपजे हालातों में हैती की मदद के लिए संयुक्त राष्ट्र ने शांति मिशन के तहत अपने लोग भेजे. संयुक्त राष्ट्र द्वारा भेजे गए शांतिदूतों में एक दल नेपाल का भी था. माना जाता है कि इस दल की वजह से हैती में हैजा की महामारी पनपी जिसने पूरे देश को अपनी गिरफ्त में लिया.



कैसे फैलाई महामारी



हुआ ये कि भूकंप से उपजी त्रासदी के बाद दुनिया भर के देशों से वॉलंटियर हैती पहुंचे. इनमें कई ऐसे देशों के वॉलंटियर भी शामिल थे जहां पर हैजा महामारी पहले कभी फैली थी. हैजा फैलने का मुख्य कारण माना गया हैती की बड़ी नदी आर्टिबोनाइट के पानी में संक्रमण को. जब देश में हैजा फैलना शुरू हुआ तो शुरुआत में लोगों का मानना था कि ये भूकंप की त्रासदी की वजह से हो रहा है.

लेकिन कुछ महीने बाद यूएन कैंप के पास के किसानों से शिकायत की कि उन्हें मानव मल की असहनीय बदबू महसूस हो रही है. ये बदबू नेपाली पीसकीपर्स के बेस से पास से आ रही थी. ये बेस नदी के किनारे ही बनाया गया था. आस-पास के लोगों को शक होना शुरू हो गया कि हैजा की बीमारी इस बेस से पनप रही है. इस बेस की सीवर लाइन आर्टिबोनाइट नदी के भीतर ही खोल दी गई थी. नदी का पानी हैती में लाखों लोग पीन, नहाने और कपड़े धोने के लिए इस्तेमाल करते हैं.

संयुक्त राष्ट्र का झूठा बयान
धीरे-धीरे जब इस बीमारी ने विकराल रूप लेना शुरू किया और बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़ने लगे. स्थितियां देखते हुए संयुक्त राष्ट्र मिशन की तरफ से एक प्रेस स्टेटमेंट जारी किया गया जिसमें महामारी फैलाने के आरोपों से इंकार किया गया. स्टेटमेंट में कहा गया कि यूएन साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखता है और इस बीमारी के फैलने से उसके बेस कैंप का कोई लेना-देना नहीं है.

पहले कभी नहीं फैला था हैजा
इससे पहले हैती में कभी हैजा की बीमारी नहीं फैली थी. कम से कम एक सदी के भीतर तो बड़े पैमाने पर हैजा फैलने के कोई केस सामने नहीं आए थे. इसी वजह से जब इस बीमारी ने देश में पैर नहीं पसारे थे. एक्सपर्ट्स का मानना है कि देश के लोगों में इस बीमारी के प्रति हर्ड इम्यूनिटी नहीं थी. यही कारण था कि हैजा यहां और गंभीर रूप से फैला.

एक पत्रकार ने खोली पोल
यूनाइटेड नेशंस के स्टेटमेंट जारी करने के बाद एसोसिएटेड प्रेस के पत्रकार जोनाथन एम कात्ज ने नेपाली पीसकीपर्स के बेस का दौरा किया. जोनाथन ने देखा कि प्रेस स्टेटमेंट में किए गए दावों और हकीकत में जमीन आसमना का फर्क है. इसके बाद उन्होंने इसे लेकर संयुक्त राष्ट्र के खिलाफ रिपोर्ट करना शुरू किया. ये जोनाथन ही थे जिनकी वजह से पूरा मामला दुनिया के सामने आ पाया.

हजारों की मौत हुई, लाखों संक्रमित हुए
इन सबके बीच हैजा ने हैती को अपनी गिरफ्त में ले लिया. भूकंप की त्रासदी झेलते एक गरीब देश पर महामारी से लड़ाई की मूसीबत भी आ खड़ी हुई थी. इस महामारी से देश में करीब 10 हजार लोगों ने जाव गंवाई. करीब 10 लाख लोग संक्रमित हुए. ये भी आधिकारिक आंकड़ा है. गैरआधिकारिक आंकड़े इससे कहीं भयावह कहानी कहते हैं.

संयुक्त राष्ट्र के निवर्तमान महासचिव बान-की-मून के समय में संयुक्त राष्ट्र ने अपनी गलती स्वीकार की थी.


संयुक्त राष्ट्र ने मानी गलती
कई साल तक सच्चाई से मुंह मोड़ने के बाद 2016 में संयुक्त राष्ट्र ने स्वीकार किया था कि हैती में हैजा फैलने के पीछे उसका दल जिम्मेदार है. इसे लेकर हैती ने इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में मामला भी दायर कर रखा है. देश का तर्क है कि संयुक्त राष्ट्र को महामारी फैलाने का अपराधी माना जाना चाहिए. महामारी फैलान के लिए संयुक्त राष्ट्र को देश को जुर्माना देना चाहिए. वहीं अपनी गलती स्वीकार करने के बावजूद संयुक्त राष्ट्र जुर्माना देने से कतराता रहा है.

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First published: March 26, 2020, 2:45 PM IST
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