क्या है ट्रैवल बबल, जो हवाई यात्रा के दौरान आपको सेफ रखेगा?

दूसरे देश मिलकर तय करेंगे कि भारत से आवाजाही उनके लिए कितनी सुरक्षित है (Photo-pixabay)
दूसरे देश मिलकर तय करेंगे कि भारत से आवाजाही उनके लिए कितनी सुरक्षित है (Photo-pixabay)

हमारे यहां से अंतरराष्ट्रीय उड़ान (international travel) भरी जा सकती है या नहीं, अब ये सिर्फ हमारा फैसला नहीं होगा, बल्कि दूसरे देश मिलकर तय करेंगे कि भारत से आवाजाही उनके लिए कितनी सुरक्षित है.

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देश में कोरोना संक्रमण (coronavirus infection) के तेजी से बढ़ते आंकड़ों के बीच घरेलू उड़ानें (domestic flights) कई एहतियात के साथ शुरू हो चुकी हैं. इसी बीच अंतरराष्ट्रीय उड़ान (international flight) की भी बात हो रही है. हालांकि ये कब तक शुरू होंगी, अब ये अकेले देश का फैसला नहीं. खुद Directorate General of Civil Aviation ने फिलहाल 30 जून तक के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ानें स्थगित की हुई हैं. माना जा रहा है फिलहाल बढ़ते मामलों के साथ दूसरे देशों में आवाजाही से हालात और खतरनाक हो सकते हैं. वैसे अंतरराष्ट्रीय उड़ान के लिए अभी से कई नियम बनाए जा रहे हैं ताकि हालात थोड़े सुधरने के बाद सेवा जारी हो सके.

25 मार्च को पहली देशबंदी के साथ ही यात्री विमान सेवाएं स्थगित हो गईं जो पूरे 2 महीने बाद 1 मई को शुरू हुईं. इससे कुछ पहले से ही मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स ने इंटरनेशनल आवाजाही पर रोक लगाई हुई है जिसके हाल-फिलहाल में खुलने की कोई संभावना भी नहीं लग रही. होम मिनिस्ट्री भी अब अकेले ये तय नहीं करेगा, बल्कि जिस देश के लिए उड़ान भरी जा रही हो, वो इसके ग्रीन सिग्नल देगा, वो भी तब जब भारत में कोरोना संक्रमण में कमी आ चुकी हो. बता दें कि दुनिया के बहुत से देशों में कोरोना पीक पर पहुंचकर अब कम होता दिख रहा है, जबकि देश में अब भी संक्रमण का ग्राफ बढ़ता दिखाई दे रहा है. ऐसे में दूसरे देशों में आवाजाही वहां संक्रमण की दूसरी लहर को बुलावा दे सकती है.

पोस्ट-कोरोना उड़ान भरने के तरीके में अंतर आ सकता है जो ये तय करेगा कि संक्रमण कम से कम फैले (Photo-pixabay)




वैसे पोस्ट-कोरोना उड़ान भरने के तरीके में काफी अंतर आ सकता है जो ये तय करने के लिए होगा कि संक्रमण कम से कम फैले. इसी के तहत हाल ही में एयर इंडिया की एक उड़ान में पायलट के कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद उस विमान को आधे रास्ते से ही वापस दिल्ली बुला लिया गया. इसके अलावा एयरपोर्ट में चेकिंग के तौर-तरीके बदलेंगे. एक और शब्द भी सुनने में आ रहा है- ट्रैवल बबल. आखिर क्या है ये और कैसे काम करने जा रहा है!
सबसे पहले तो ट्रैवल बबल को समझते हैं. इस बबल यानी बुलबुले में वे देश आएंगे, जिनके यहां कोरोना संक्रमण पर कंट्रोल दिख रहा है. ये देश आपस में व्यापार-व्यावसाय और घूमना-फिरना भी शुरू कर देंगे ताकि कमजोर पड़ी अर्थव्यवस्था दोबारा शुरू हो सके. द इकॉनॉमिक में छपी खबर के मुताबिक अगर ट्रैवल बबल भी बन सके यानी संभल चुके देशों में दोबारा उड़ान संभव हो सके तो ये भी दुनिया के कुल जीडीपी का 35 प्रतिशत होगा. कई देश इस तरह के बबल का करार कर चुके हैं. जैसे ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड. और चीन और साउथ कोरिया.

बबल यानी बुलबुले में वे देश आएंगे, जिनके यहां कोरोना संक्रमण पर कंट्रोल दिख रहा है (Photo-pixabay)


क्या दूसरे देशों में इंटरनेशनल ट्रैवल शुरू हो चुका है?
यूरोप के कई सारे देशों में यूरोपीय सीमा के भीतर ही इंटरनेशनल उड़ान को इजाजत दे दी है लेकिन ये सेवाएं भी 15 जून से शुरू होंगी. इसमें इमरजेंसी ट्रैवल ही नहीं, बल्कि सैर-सपाटे के लिए भी उड़ान भरी जा सकती है. बता दें कि फिलहाल कई यूरोपियन देशों ने अपने पड़ोसी देशों के लिए सड़क सेवाएं खोल दी हैं लेकिन सीमा पार करने वाले को अपने आने का मकसद बताना होता है और उसका प्रूफ भी देना होता है. अब उड़ान भरने के लिए भी जर्मनी, हंगरी, रोमानिया, फिललैंड के अपनी सीमाएं यूरोपियन यूनियन के देशों के लिए खोलने का फैसला कर लिया है. इन देशों के अलावा अलग-अलग देश इंटरनेशनल सेवा शुरू करने के लिए अलग-अलग योजनाएं बना रहे हैं. जैसे कतर एयरवेज ने जून के मध्य तक 50 गंतव्य स्थानों के लिए फ्लाइट शुरू करने की योजना बनाई है.

कई एयर सेफ्टी प्रोटोकॉल भी बनाए गए हैं, जिसके तरह फ्लाइट में बोर्ड करने से पहले और गंतव्य पर उतरने के बाद ये भी देखा जाएगा कि यात्रा में कोरोना के कोई लक्षण तो नहीं. कई देशों में नियम बन चुका है कि अगर आप सेफ कंट्री या एयर बबल कंट्रीज से नहीं आए हैं तो आपको 14 दिनों के क्वारंटीन में रहना होगा. इसके बाद भी कई सख्त कायदे होंगे, जिनका पालन अनिवार्य होगा, इसमें देश के भीतर ही ट्रैवल रेस्ट्रिक्शन भी शामिल है.

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