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1947 में यहां पाया गया था जीका वायरस का पहला मामला

1947 में यहां पाया गया था जीका वायरस का पहला मामला

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर

जीका वायरस के लिए कोई वैक्सीन नहीं है. मच्छरों से बचाव ही इसका बेहतर इलाज है.

    'जीका वायरस' जिस तेजी के साथ दुनिया भर में बढ़ रहा है. उससे कह सकते हैं कि ये ग्लोबल खतरा बनता जा रहा है. जीका का पहला मामला 1947 में युगांडा में बंदरों में देखा गया था.  तब ये अफ्रीका से एशिया तक फैला हुआ था. इसे पहली बार पहली बार इंसान में 1952 में युगांडा और यूनाइटेड रिपब्लिक ऑफ तंजानिया में डिटेक्ट किया गया था. ब्राजील में 15 लाख लोगों पर इसका खतरा मंडरा रहा है.

    ये भी पढ़ें- जीका वायरस से बचने के लिए क्‍या करें और क्‍या न करें

    वैज्ञानिकों ने दो साल पहले 2016 में ही एक अध्ययन के आधार पर लगाए आकलन में कहा था कि ज़ीका वायरस के भौगोलिक दायरे के अंदर रहने वाले लोगों की सबसे ज्यादा आबादी भारत 1.2 अरब, चीन 24.2 करोड़, इंडोनेशिया 19.7 करोड़, नाइजीरिया 17.9 करोड़, पाकिस्तान 16.8 करोड़ और बांग्लादेश 16.3 करोड़ में है.

    यह भी पढ़ें: गर्भवती महिलाएं जीका वायरस से रहें सावधान! ऐसे करें बचाव

    1952 में इस रहस्यमय बीमारी को जीका वायरस का नाम दिया गया. 1947 में वैज्ञानिक पूर्वी अफ्रीका के पीले बुखार पर शोध कर रहे थे. ये शोध अफ्रीका में जीका के जंगल में किया जा रहा था, इसलिए इसका नाम जीका वायरस रखा गया.

    ये हैं इसके लक्षण
    -बुखार
    - जोड़ों का दर्द
    - शरीर पर लाल चकत्‍ते
    - थकान
    - सिर दर्द
    - आंखों का लाल होना
    - यानि जो लक्षण डेंगू और वायरल के हैं, वही इस बीमारी के भी हो सकते हैं. लेकिन इसके वायरस का आरएनए अलग तरह का होता है.

    जीका वायरस के लिए कोई वैक्सीन नहीं है. यह बीमारी मच्छरों के जरिए फैलती है. मच्छरों से बचाव ही इसका बेहतर इलाज है. इससे बचने के लिए आप रूम में रुका हुआ पानी और कचरा न रखें. घरों के आस-पास पानी के कंटेनर न हों.

    यह भी पढ़ें:  क्या जीका वायरस से निपटने के लिए कोई वैक्सीन या दवा है?

    Tags: Health News, Health tips, Zika Virus

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