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किसान आंदोलन को कहां से मिल रहा है फंड? प्रदर्शनकारियों ने खुद दिया जवाब

दिल्ली बॉर्डर पर 9 दिन से डटे हुए हैं किसान.
दिल्ली बॉर्डर पर 9 दिन से डटे हुए हैं किसान.

किसान अंदोलन (Kisan Andolan) का बहीखाता है. हर गांव से साल में दो बार चंदा इकट्ठा किया जाता है. हर छह महीने में ढाई लाख रुपये का चंदा इकट्ठा होता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 4, 2020, 9:53 AM IST
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नई दिल्ली. कृषि कानून (Agricultural Laws) को लेकर किसानों का प्रदर्शन (Farmer Protest)  लगातार सातवें दिन ​भी जारी है. दिल्ली कूच की तैयारी में जुटे किसानों ने सरकार को साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं हो जाती तब तक आंदोलन जारी रहेगा. ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि आखिर आंदोलन (Kisan Andolan) के लिए पैसा कहां से आ रहा है. ​जितनी संख्या में दिल्ली बॉर्डर (Delhi Border) पर किसान जमा हैं उनके राशन पानी की जिम्मेदारी कौन उठा रहा है. इसकी जब तहकीकात की गई तो पता चला कि किसान आंदोलन का बहीखाता है. हर गांव से साल में दो बार चंदा इकट्ठा किया जाता है. हर छह महीने में ढाई लाख रुपये का चंदा इकट्ठा होता है.

बता दें कि इस आंदोलन को सबसे बड़ी मदद पंजाब के डेमोक्रेटिक टीचर्स फेडरेशन ने की है. फेडरेशन की तरफ से किसानों की मदद के लिए 10 लाख रुपये की सहायता की गई है. भारतीय किसान यूनियन उग्राहां से 8 हजार किसान अलग अलग गाड़ियों से प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे हैं. बताया जा रहा है कि सभी 8 हजार किसानों का बहीखाता है. कौन सा किसान किस गाड़ी से यहां पहुंचा उसका भी पूरा रिकॉर्ड यहां पर मौजूद है. किसानों पर कहां कितना खर्च हो रहा है हर एक रकम को बहीखाते में दर्ज किया जा रहा है.

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भारतीय किसान यूनियन उग्राहा से जुड़े 1400 गांव साल में दो बार चंदा जुटाते हैं. एक चंदा गेहूं की कटाई के बाद इकट्ठा किया जाता है और दूसरा धान की फसल के बाद. यूनियन के उपाध्यक्ष झंडा सिंह बताते हैं कि पंजाब के गांवों में हर छह महीने में औसतन ढाई लाख रुपये इकट्ठे होते हैं.
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