क्या है वो करेंसी जो दुनियाभर में 'कागज की करेंसी' की जगह लेगी

आर्थिक मामलों की सचिव की अगुवाई में बनी कमेटी ने भी भारत सरकार को डिजिटल नोट लाने का सुझाव दिया है.

News18Hindi
Updated: December 6, 2018, 7:00 PM IST
क्या है वो करेंसी जो दुनियाभर में 'कागज की करेंसी' की जगह लेगी
आर्थिक मामलों की सचिव की अगुवाई में बनी कमेटी ने भी भारत सरकार को डिजिटल नोट लाने का सुझाव दिया है.
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Updated: December 6, 2018, 7:00 PM IST
किसी भी अर्थव्यवस्था में डिजिटल करेंसी के जगह लेने का मतलब है, कैश करेंसी का कम या खत्म होना. डिजिटल करेंसी लागू होने से आपका पैसा, आपके हाथ में न रहकर डिजिटली आपके पास रहेगा. उसे खर्च भी डिजिटली ही किया जाएगा. साधारण भाषा में कहे तो नकदी लेन-देन खत्म होने लगेगा. लंबे समय में जिसका असर ये होगा की देश में नोट छपने की संभावना कम या खत्म हो जाएगी.

मई 2018 में सेंट्रल बेंक ने कहा था कि यदि वह डिजिटल करेंसी जारी करेगा तो इसे Central Bank Digital Currency (CBDC) नाम दिया जाएगा. जिसे लॉन्च करने के प्लान पर इंग्लैंड, स्विडन और Uruguay ने हामी भरी थी. आइए जानते हैं किन देशों में खत्म हो रही है कागज की करेंसी, और जगह ले रही है डिजिटल करेंसी.

सेनेगल (Senegal)- वेस्ट अफ्रीका के इस देश ने डिजिटल करेंसी को दिसंबर 2016 में स्वीकार किया था.

ट्यूनीशिया (Tunisia- ट्यूनीशिया नॉर्थ अफ्रीका का देश है, ये देश डिजिटल करेंसी स्वीकारने वाला पहला देश था. यहां इस करेंसी को 2015 में स्वीकारा गया था.

मार्शल आइलैंड (The Marshall Islands)- ये द्वीप समूह, प्रशांत महासागर के केंद्र में हवाई और फिलीपींस के बीच है. यहां मार्च 2018 में नई करेंसी लाने की बात कही गई थी. जिसे वे डिजिटल फॉर्म में भी स्वीकारने को तैयार थे. यहां की फिजिकल ऑफिशियल करेंसी यूएस डॉलर है.

वेनेजुएला (Venezuela)- ये देश साउथ अमेरिका में है. वेनेजुएला सरकार की ओर से डिजिटल करेंसी फरवरी 2018 में लॉन्च की गई, जिसे उन्होंने Petro और Petromoneda नाम दिया. जिसकी घोषणा उन्होंने दिसंबर 2017 में की थी.


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क्या है डिजिटल करेंसी
यहां हम जिस डिजिटल करेंसी की बात कर रहे हैं वो एक पेमेंट मेथड है, जो कि सिर्फ इलेक्ट्रोनिक फॉर्म में किया जाता है. डिजिटल होती दुनिया में ऑनलाइन पेमेंट खास जगह बना रही है. यानी आप सेवाएं, वस्तुएं अपनी ज़रूरत के हिसाब से लेते हैं, और पेमेंट भी करते हैं. लेकिन भुगतान कैश नहीं, डिजिटली होता है. डिजिटल करेंसी को डिजिटल मनी, इलेक्ट्रॉनिक मनी, इलेक्ट्रॉनिक करेंसी और साइबर कैश कहा जाता है.

कैसे इस्तेमाल करते हैं
डिजिटल मुद्राएं अमूर्त होती हैं. इनका लेन-देन इंटरनेट या डेजिगनेटेड नेटवर्क्स जरिए, कंप्यूटर या इलेक्ट्रॉनिक वॉलेट्स से इंटरनेट के ज़रिए किया जा सकता है. इसके विपरीत भौतिक मुद्राएं यानी फिजिकल करेंसी, जैसे कि नोट, सिक्के इत्यादी से भुगतान सिर्फ उसे रखने वाला ही कर सकता है.

फिजिकल करेंसी की तरह भी डिजिटल करेंसी के भी अपने गुण-अवगुण हैं. इसका एक उदाहरण सिंगापुर में देखा जा सकता है. सिंगापुर में किसी भी अमेरिकन्स के लिए डिजिटल करेंसी के माध्यम से पेमेंट करना तब ही संभव है, जब पेमेंट करने वाला और जिसे पेमेंट की जा रही है वे दोनों एक ही नेटवर्क से जुड़े हों. हालांकि ये पेमेंट्स ज़ीरो कोस्ट पर होती है.



भारत और डिजिटल करेंसी
आर्थिक मामलों की सचिव की अगुवाई में बनी कमेटी ने भी भारत सरकार को डिजिटल नोट लाने का सुझाव दिया है. कमेटी की ड्राफ्ट रिपोर्ट में कहा फिजिकल रुपये के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक नोट भी जारी होने चाहिए. डिजिटल नोट जारी करने और सर्कुलेशन पर आरबीआई का कंट्रोल ही रहेगा. सुझाव में कहा गया था कि 2 तरह की डिजिटल करेंसी जारी हो.

एक तरह की करेंसी पर ब्याज मिले. दूसरी तरह ही करेंसी बगैर ब्याज वाली हो. डिजिटल करेंसी लाने के कमेटी के सुझाव पर वित्त मंत्रालय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के साथ मीटिंग सर सकता है. जिसका अंतिम फैसला पीएमओ करेगा. (मनीकंट्रोल हिंदी के इनपुट के साथ)



जिन देशों ने रिजेक्ट की डिजिटल करेंसी
जर्मनी- जुलाई में जर्मनी ने सैंट्रल बैंक के CBDC जारी करने के आइडिया को खारिज कर दिया था. उन्होंने वित्त मंत्रालय के हवाले से कहा था कि इसे जारी करना रिस्की हो सकता है.

Ecuador- साउथ अमेरिका का ये देश CBDC अडोप्ट करने वाले देशों में से एक है. यहां फरवरी 2015 में मोबाइल ऐप से ज़रिए मनी ट्रांस्फर किया जा रहा था. लेकिन दिसंबर 2017 से यहां इलेक्ट्रोनिक मनी सिस्टम को बंद कर दिया गया था.

इनके अलावा स्विट्जरलैंड, हॉन्ग कॉन्ग और जापान ने भी डिजिटल करेंसी रिजेक्ट करने वाले देशों में शामिल है.
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