भारत और चीन भिड़े तो किसके साथ होगा इजरायल?

भारत और चीन भिड़े तो किसके साथ होगा इजरायल?
इजरायल को लेकर असमंजस के हालात हैं कि वो किसके साथ होगा (Photo-pixabay)

इजरायल (Israel) भारत और चीन (India and China) दोनों का ही दोस्त है. ऐसे में किसका पलड़ा भारी हो सकता है?

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भारत-चीन के बीच जैसा तनाव है, उसमें अनचाहे ही भिड़ंत के हालात बन सकते हैं. बहुत सारे देश चीन के विरोध में दिख रहे हैं. अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे समृद्ध देश भारत के लिए खुलकर सामने आए हैं. अनुमान लगाया जा रहा है कि अगर दोबारा तनाव बढ़ जाए तो कौन, किसके साथ रहेगा. खेमे में भारत के मित्र और शत्रु देश अलग-अलग समझ आ सकते हैं लेकिन इजरायल का क्या! जानिए, ये देश किस खेमे की ओर ज्यादा झुका हुआ है.

भारत और चीन के बीच तनाव
हफ्तों के तनाव और हिंसक झड़प के बाद आखिरकार चीन लद्दाख में पीछे हटने को राजी हुआ. अब भी हालांकि तनाव घटा नहीं है. माना जा रहा है कि आने वाले वक्त में चीन और ज्यादा आक्रामक हो सकता है. इस अनुमान को देखते हुए भारत अपने स्तर पर तैयारियों में जुटा हुआ है. तीनों ही सेनाओं को साजो-सामान से लैस किया जा रहा है. समुद्री रास्तों पर भी चौकसी बढ़ाई जा रही है ताकि चीन से कहीं भी कमजोर न पड़े. सैन्य स्तर पर तैयारी के अलावा देश कूटनीतिक तरीके से भी तैयारी कर रहा है. इसके तहत देशों को टटोला जा रहा है कि अगर लड़ाई के हालात बनें तो कौन किसके साथ या किसके विरोध में जा सकता है.

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद भारत यात्रा की (Photo-twitter)

कौन सा देश किसके पाले में


पाकिस्तान और नेपाल के बारे में साफ हो चुका है कि वो दोनों चीन के साथ होंगे. इसकी वजह वहां पर चीन का भारी-भरकम इनवेस्टमेंट तो है ही, साथ ही सामरिक और वैचारिक मतभेद भी हैं. कोरोना के कारण भन्नाया हुआ अमेरिका और कई सारे विकसित देश फिलहाल भारत के खेमे में दिख रहे हैं. बड़े देश साथ रहें तो चीन पर दबाव बढ़ेगा और इससे युद्ध जैसे हालात टाले जा सकते हैं. यही देखते हुए भारत ने हाल ही में देशों से हथियारों की खरीद भी शुरू की. जैसे हाल ही में अमेरिका की एक कंपनी को 72 हजार एसआईजी 716 असॉल्ट राइफल का ऑर्डर दिया गया. रूस से भी डिफेंस डील हुई है.

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इजरायल के बारे में असमंजस
कुल मिलाकर बहुत से देशों की स्थिति साफ है. लेकिन इजरायल को लेकर असमंजस के हालात हैं कि वो किसके साथ होगा. इजरायल के दोनों ही देशों से अच्छे संबंध हैं. भारत की बात करें तो दोनों ही देशों को लगभग एक साथ आजादी मिली. शुरुआती संबंध थोड़े उतार-चढ़ाव वाले रहे लेकिन बाद के सालों में दोनों देशों ने एक-दूसरे का साथ दिया. हथियारों के लिहाज से काफी एडवांस देश ने साल 1962 में चीन युद्ध के दौरान भारत को हथियार दिए. बाद में वक्त में पाकिस्तान से करगिल युद्ध में भी भारत को इस देश से अत्याधुनिक हथियार मिले.

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भारत-इजरायल की दोस्ती
जब भारत के इंटेलिजेंस एजेंसी की नींव डली, तब भी इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने मदद की थी. बाद के समय में संबंध और गाढ़े होते गए. नब्बे के दशक के बाद से दोनों देश एक-दूसरे को सहयोगी राष्ट्र कहने लगे. इजरायल और भारत ने रक्षा सौदों के लिए डील की हुई है, जिसके तहत वो देश भारत में अत्याधुनिक हथियार बनाने की ट्रेनिंग और मदद दे रहा है. इजरायल की कई सारी कंपनियां भारत के साथ पार्टनर हैं.

हथियारों के लिहाज से काफी एडवांस देश ने साल 1962 में चीन युद्ध के दौरान भारत को हथियार दिए (Photo-wallpaperflare)


कैसे हैं चीन और इजरायल के संबंध
अब चीन से इजरायल के संबंध की बात करें तो भी दिखता है कि दोनों के बीच ठीक-ठाक रिश्ते रहे. येरुशलम पोस्ट की एक रिपोर्ट में पत्रकार सेठ जे फ्रांट्जमैन ने लिखा कि चीन से संबंधों में लगातार गरमाहट आने के कारण अमेरिका ने इजरायल को चेतावनी तक दी. यूरेशियन टाइम्स में इस बारे में विस्तार से रिपोर्ट आई है. इसमें फ्रांट्जमैन ने लिखा है कि भारत और चीन दोनों ही अहम देश हैं. इजरायल दोनों के साथ ही दोस्ताना रिश्ते चाहता है. वर्तमान में जिस तरह से तनाव बढ़ा है, वो पक्का येरुशलम पर भी असर डाल सकता है.

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वैसे भारत-इजरायल के रिश्ते व्यापार और कूटनीति से ज्यादा भी हैं. इसकी वजह है भारत का साउथ कोरिया, जापान, सिंगापुर और यूएई जैसे देशों से अच्छा संबंध. चूंकि ये सारे देश इजरायल के साथी हैं इसलिए भी हमारे और इजरायल के संबंध बेहतर हालात में हैं.

भारत-इजरायल के रिश्ते व्यापार और कूटनीति से ज्यादा भी हैं (Photo-pixabay)


अमेरिका क्यों दबाव बना रहा 
अब इस रिश्ते की एक और कड़ी है इजरायल, चीन और अमेरिका के रिश्ते. बीते कुछ सालों में चीन ने एक रणनीति के तहत उन सारे देशों को जोड़ना शुरू किया, जो अमेरिका के साथी हों. ठीक वैसे ही, जैसे फिलहाल चीन भारत के साथ कर रहा है. अब चूंकि इजरायल को अमेरिका का लंबे समय से सपोर्ट रहा है. ऐसे में चीन और इजरायल के बीच बढ़ती मैत्री अमेरिका को खल रही है. चीन की कंपनियां इस देश में लगभग 20 बिलियन डॉलर की डील पर काम कर रही हैं. चीन का ये निवेश अमेरिका को सबसे बड़ा बाजार बनने से रोक सकता है. यही वजह है कि अमेरिका इजरायल पर जोर डाल रहा है कि वो चीन से न जुड़े. साथ ही कोरोना के लिए भी चीन को जिम्मेदार मानते हुए अमेरिका चाहता है कि इजरायल उसे अपने यहां रोके.

अब ये समझना बाकी है कि क्या इजरायल भारत और अमेरिका के साथ अपनी दोस्ती को ज्यादा तवज्जो देगा या फिर बीजिंग के इनवेस्टमेंट के कारण उससे रिश्ते को बनाए रखना चाहेगा. कुल मिलाकर इजरायल के लिए किसी एक पक्ष को चुनना आसान नहीं होगा.
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