Mission Paani: 2050 तक भारत के कौन से शहर एक-एक बूंद के लिए तरसेंगे?

जलसंकट के खिलाफ मटके तोड़कर विरोध प्रदर्शन करती महिलाएं. (File Photo)
जलसंकट के खिलाफ मटके तोड़कर विरोध प्रदर्शन करती महिलाएं. (File Photo)

भारत में हर 5 में से 3 शहरों के सामने पानी की समस्या विकराल (Severe Water Crisis) है. ताज़ाा डेटा की मानें तो यूरोप और अफ्रीका के मुकाबले भारत के लिए चुनौतियां बेहद गंभीर (Water Risks) हैं. दुनिया में बेसिन रिस्क के मामले में फिलीस्तीन के बाद भारत का ही नंबर है.

  • News18India
  • Last Updated: November 4, 2020, 8:59 AM IST
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कहते हैं 'बिन पानी सब सून' और अब यह कहावत देश और दुनिया के कई शहरों पर लागू होने जा रही है. आपको पता है दक्षिण अफ्रीका (South Africa) के केपटाउन की बात हो या भारत के चेन्नई (Chennai) की, जलसंकट भारत ही नहीं, दुनिया भर में किस कदर गहरा चुका है. इस मुद्दे पर विश्व वाइल्डलाइफ फंड (WWF) के ताज़ा सर्वे ने चिंता की लकीरें और गाढ़ी कर दी हैं. इस सर्वे (Water Crisis Survey) में कहा गया है कि अगले 30 सालों में दुनिया के 100 शहरों में बेहद गंभीर जलसंकट होगा और इस लिस्ट में 30 शहर भारत के हैं.

जिन 100 शहरों में भयानक जलसंकट की चेतावनी WWF के रिस्क फिल्टर विश्लेषण में दी गई है, उनमें करीब 35 करोड़ की आबादी होगी, जो यह संकट झेलेगी. विश्लेषण में साफ कहा गया है कि अब भी वक्त है, लेकिन अगर क्लाइमेट चेंज की दिशा में सही और पुख्ता कदम नहीं उठाए गए तो 2050 तक करोड़ों लोगों को पानी के लिए तरसना होगा.

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भारत के 30 शहर हैं लिस्ट में
भयानक जलसंकट की चेतावनी जिन 100 शहरों के लिए जारी की गई है, उनमें भारत के ​दो शहर जयपुर और इंदौर क्रमश: 45वें और 75वें नंबर पर हैं. इस लिस्ट के समानांतर एक और लिस्ट बनाई गई है, जिन शहरों में कुछ दशकों बाद पानी की समस्या बहुत बढ़ सकती है. इस लिस्ट में भारत के 28 शहर शामिल हैं.

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भारतीय शहरों में जयपुर और इंदौर के सामने जलसंकट का खतरा सबसे भयानक बताया गया.


अमृतसर, पुणे, श्रीनगर, कोलकाता, बेंगलूरु, मुंबई, कोझिकोड, विशाखापटनम, ठाणे, वडोदरा, राजकोट, कोटा, नाशिक, अहमदाबाद, जबलपुर, हुबली धारवाड़, नागपुर, चंडीगढ़, लुधियाना, जालंधर, धनबाद, भोपाल, ग्वालियर, सूरत, दिल्ली, अलीगढ़, लखनऊ और कानपुर के नाम 28 शहरों की सूची में शामिल हैं. सभी तीस शहरों में से लुधियाना, चंडीगढ़, अमृतसर और अहमदाबाद लिस्ट में टॉप रहे हैं.

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WWF के इस सर्वे में जो बयान जारी हुआ, ​उसके हवाले से रिपोर्ट्स में कहा गया कि इन 100 शहरों में से करीब आधे चीन में हैं, जहां अगले 3 दशकों में जलसंकट भयावह होता दिख रहा है. इसके अलावा, दक्षिण एशिया, मध्य पूर्व, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका के भी कुछ शहर शामिल हैं. लेकिन, इन सबके बीच, भारत के शहरों का इतनी बड़ी संख्या में सामने आना वाकई एक बड़ी चेतावनी है.

कितनी आबादी के सामने होगी मुसीबत?
इन 100 शहरों में वर्तमान में करीब 35 करोड़ की आबादी रहती है. अनुमान के मुताबिक 2020 में इस आबादी में 2050 तक 51 फीसदी तक की वृद्धि हो सकती है. बयान में कहा गया है कि ये आंकड़े देने का मकसद यही है कि इनके आधार पर भविष्य के लिए योजनाएं और रणनीति बनाई जा सके. अब ध्यान देने की बात यह है कि भारत के लिए इसमें क्या महत्वपूर्ण है.

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स्मार्ट सिटी योजना पर ज़ोर क्यों?
WWF के विश्लेषण में भारत के स्मार्ट सिटी प्लान पर ज़ोर दिया गया है क्योंकि यहां भारी इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण कार्य ज़ोरों पर है. कहा गया है कि स्मार्ट शहरों में जल प्रबंधन के फ्रेमवर्क पर गौर किया जाना चाहिए. शहरी इलाकों में नम भूमि और वॉटरशेडों की भूमिका शहरों में पानी का संतुलन बनाए रखना ज़रूरी है. इस तरह की योजनाओं से भविष्य में बाढ़ जैसी समस्याओं से बचा जा सकेगा और जैव विविधता का खयाल रखना भी ज़रूरी होगा.

दुनिया में कहां है सबसे ज़्यादा खतरा?
भारत के शहरों के इतर इस लिस्ट में टॉप पर कौन है? मिस्र के शहर एले​ग्ज़ेंड्रिया को पानी संबंधी खतरे बढ़ने की इस लिस्ट में टॉप पर रखा गया है. इसके बाद मक्का, चीन के टांगशान और सऊदी अरब के ही अद दम्माम और रियाद शहर भी लिस्ट में शामिल हैं. इस लिस्ट में सबसे पीछे 10 शहरों में सिएरा लिओन के फ्रीटाउन, चीन के ताइयुआन, वेनलिंग, गुइयांग, यानताई और जियाग्ज़िंग के नाम हैं.

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भारत के 30 शहर 2050 तक भयानक जलसंकट की चपेट में होंगे.


100 शहरों की लिस्ट में अन्य प्रमुख शहरों में बीजिंग, जकार्ता, जोहानिसबर्ग, इस्तांबुल, हांग कांग और रिओ डि जेनेरियो के नाम भी हैं. इन तमाम शहरों में शहरी नम भूमि और वॉटरशेडों के सही प्रबंधन की सलाह दी गई है. ऑर्गेनाइज़ेशन फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट के मुताबिक वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट, पानी प्लांटों और सप्लाई नेटवर्कों के लिए ही कम से कम सालाना 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का खर्च करना ही समस्या का हल होगा.
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