आम मास्क कोरोना से 77 फीसदी तक ही कर पाता है बचाव, ये मास्क सबसे कारगर

आम मास्क कोरोना से 77 फीसदी तक ही कर पाता है बचाव, ये मास्क सबसे कारगर
मास्क को लेकर हुई एक अहम रिसर्च में चौंकाने वाले नतीजे मिले हैं (Photo-pixabay)

कोरोना वायरस (coronavirus) को लेकर एक नई रिसर्च में पता चला है कि सर्जिकल या फिर कपड़े से बने मास्क (surgical mask) वायरस से केवल 77% तक बचाते हैं, जबकि N95 रेस्पिरेटर (n95 respirator) 96 फीसदी सुरक्षा दे सकता है.

  • Share this:
  • fb
  • twitter
  • linkedin
कोरोना वायरस के संक्रमण का आंकड़ा ग्लोबली 64 लाख से भी ऊपर जा चुका है. रहस्यमयी वायरस पर लगातार काम कर रहे वैज्ञानिक इस नई खोजें कर रहे हैं ताकि संक्रमण की दर कम से कम हो सके. इसी बीच मास्क को लेकर हुई एक अहम रिसर्च में चौंकाने वाले नतीजे मिले हैं. World Health Organization (WHO) द्वारा फंड की गई इस रिसर्च में साफ है कि सर्जिकल मास्क कोरोना वायरस का हमला रोकने में सक्षम नहीं, वहीं N95 रेस्पिरेटर से वायरस से 96 गुना तक बचाव हो सकता है. ये रिसर्च 172 स्टडीज के निष्कर्ष को मिलाकर की गई. बता दें कि इससे पहले सर्जिकल मास्क को भी काफी इफैक्टिव माना जा रहा था.

रिसर्च के नतीजे साइंस जर्नल द लैंसेट में आए. इसमें 172 स्टडीज के हवाले से साफ किया गया है कि सर्जकिल या फिर कपड़े के मास्क में वैसा फिल्टर ही नहीं होता, जो कोरोना या कई अन्य वायरस को नाक तक पहुंचने से रोक सके. ऐसे में मरीज के संपर्क में आए किसी भी व्यक्ति, चाहे वो हेल्थ एक्सपर्ट हो या फिर परिवार, सबको कोरोना का खतरा होता है. 1 जून को आई इस स्टडी में जोर दिया गया है कि WHO और Centers for Disease Control and Prevention को हेल्थ वर्कर्स को किसी भी मास्क की बजाए सिर्फ N95 रेस्पिरेटर पहनने की सलाह देनी चाहिए.

कपड़े के मास्क में वैसा फिल्टर ही नहीं होता, जो कोरोना या कई अन्य वायरस को नाक तक पहुंचने से रोक सके (Photo-pixabay)




बाल्टिमोर सन में छपी खबर के मुताबिक स्टडी में शामिल मुख्य शोधकर्ता और जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डेविड माइकल ने इसपर चिंता जताई कि अब तक WHO ने हेल्थ प्रोफेशनल्स के लिए सर्जिकल मास्क को काफी बताया है, जबकि वे खतरनाक हैं. वे कहते हैं कि सर्जिकल मास्क पर भरोसा करने के कारण बहुत से हेल्थ वर्कर्स कोरोना की चपेट में आ चुके हैं.



मास्क पर वैसे तो कोरोना के समय से लगातार ही स्टडी होती रही है लेकिन अब ये और भी ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि देश लॉकडाउन खोलने की ओर जा रहे हैं. स्वास्थ्य सुविधाओं के अलावा जैसे-जैसे जरूरी सेवाएं खुलती जाएंगी, संक्रमण का खतरा और बढ़ेगा. ऐसे में केवल 77 फीसदी सुरक्षा दे सकने वाले मास्क पर भरोसा काफी खतरनाक हो सकता है. रिसर्च में शामिल वैज्ञानिकों ने नतीजों के आधार पर माना है कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोगों के साथ-साथ कई दूसरे उद्योगों के लोगों को भी आम मास्क की बजाए N95 रेस्पिरेटर मुहैया कराया जाना चाहिए. खासतौर पर मांस की खरीदी-बिक्री से जुड़े लोगों के लिए, जहां संक्रमण का खतरा ज्यादा है.

WHO ने अब तक भी सबके लिए मास्क पहनने की सिफारिश नहीं की है (Photo-pixabay)


बता दें कि WHO ने अब तक भी सबके लिए मास्क पहनने की सिफारिश नहीं की है. और न ही वो ये बता रहा है कि कौन सा मास्क ज्यादा प्रभावी है और रिस्क जोन में काम करने वालों को क्या पहनना ज्यादा सुरक्षा दे सकेगा. इसके बाद भी दुनिया के बहुत से देशों ने अपने नागरिकों के लिए बाहर निकलने पर मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया है. इन देशों में भारत भी एक है.

वैसे कई एक्सपर्ट N95 पर भी तर्क दे रहे हैं कि ये कोरोना वायरस से नहीं बचा सकता है. हालांकि Ending Pandemics के चेयरमैन लैरी ब्रिलियंट कहते हैं कि N95 मास्क अपने आप में बेहद कारगर है. मास्क में छेद तीन माइक्रॉन चौड़े होते हैं. वायरस 1 माइक्रॉन चौड़ा है. यानी लोग कहेंगे कि मास्क बेकार है. लेकिन अगर आप 3 कद्दावर खिलाड़ी, जो लंच के लिए दौड़ रहे हों, को एक दरवाजे से एक ही वक्त पर निकालने की कोशिश करेंगे तो वो पार नहीं जा सकेंगे. ये मास्क इसी तरह से काम करता है.

ये छोटे airborne particles को सांस में जाने से नहीं रोक पाते हैं क्योंकि ये पतले लेयर के होते हैं (Photo-pixabay)


वैसे सर्जिकल मास्क की कमी को लेकर पहले भी एक्सपर्ट चेता चुके हैं. वे मानते हैं कि सर्जिकल मास्ककुछ हद तक ही बीमारियों के संक्रमण से बचा पाते हैं. ये छोटे airborne particles को सांस में जाने से नहीं रोक पाते हैं क्योंकि ये पतले लेयर के होते हैं. इनकी तुलना में N95 रेस्पिरेटर बेहतर होते हैं. ये मोटे फेब्रिक से बने होते हैं और कई तरह के वाइरस से बचा पाते हैं. वैसे हवा में अगर कई किस्म के रोग फैलाने वाले वाइरस और बैक्टीरिया हैं तो ये मास्क बहुत कम ही प्रभावी होते हैं और एंटी-पॉल्यूशन मास्क बनकर ही रह जाते हैं.

इस तरह काम करता है मास्क
वाइरस नाक के जरिए श्वसन नाल से होते हुए शरीर में पहुंचते हैं और फेफड़ों से होते हुए सारे शरीर में फैल जाते हैं. वहीं मास्क पहनने पर मास्क की परतें हवा के लिए छन्नी का काम करती हैं और फिल्टर होकर हवा हमारी नाक के भीतर पहुंचती है. ये अपेक्षाकृत ज्यादा साफ होती है. माना जाता है कि N95 हवा से फैलने वाले लगभग 95% जर्म्स को फिल्टर कर देता है. लेकिन इसे पहनते हुए भी कई सावधानियां रखी जानी चाहिए, जैसे मास्क साफ हाथों से पहनें. अगर मास्क पहनते हुए ही आपके आसपास किसी को छींक आ जाए तो वो मास्क बेकार हो जाता है क्योंकि उसपर पहले ही जर्म्स आ चुके हैं. इसके अलावा हर मास्क की एक्सपायरी डेट भी होती है, जिसे जरूर चेक कर लें और कुछ घंटों या दिनों में एक्सपायर होने पर उसे फेंक दें.

ये भी पढ़ें:

किस खुफिया जगह पर खुलती है वाइट हाउस की सीक्रेट सुरंग

क्या है ट्रैवल बबल, जो आपको हवाई यात्रा के दौरान सेफ रखेगा?

कौन हैं काले कपड़ों में वे लोग, जिनसे डरकर डोनाल्ड ट्रंप को बंकर में छिपना पड़ा

कैसा है व्हाइट हाउस का खुफिया बंकर, जिसमें राष्ट्रपति ट्रंप को छिपाया गया

क्या है ट्रंप का वो नारा, जिसने अमेरिका में आग लगा दी
First published: June 3, 2020, 9:00 AM IST
अगली ख़बर

फोटो

corona virus btn
corona virus btn
Loading