दुनिया के वो देश, जहां दूसरे धर्म में शादियां प्रतिबंधित हैं

तनिष्क के विवादित विज्ञापन के साथ ही एक बार फिर दूसरे धर्म में शादी पर चर्चा चल पड़ी- सांकेतिक फोटो (needpix)
तनिष्क के विवादित विज्ञापन के साथ ही एक बार फिर दूसरे धर्म में शादी पर चर्चा चल पड़ी- सांकेतिक फोटो (needpix)

कुल 29 इस्लामिक देशों (Islamic nations) में मुस्लिम पुरुष अपने मजहब से बाहर क्रिश्चियन या यहूदी युवती से ही शादी कर सकता है. वहीं मुस्लिम महिला अपने धर्म से बाहर शादी नहीं कर सकती.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 16, 2020, 2:05 PM IST
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तनिष्क के विवादित विज्ञापन के साथ ही एक बार फिर दूसरे धर्म में शादी पर चर्चा चल पड़ी है. असल में तनिष्क ने अपने प्रमोशन के लिए एक विज्ञापन निकाला था. इसमें दो अलग-अलग समुदायों की शादी दिखाई गई थी. इसपर लव जेहाद की बात करते हुए तनिष्क को सोशल मीडिया पर ट्रोल कर दिया गया. आखिरकार गहनों के इस ब्रांड ने विज्ञापन हटा लिया. वैसे आमतौर पर उदार देश भारत में ये लहर उतनी पुरानी नहीं. कई देश हैं, जहां अंतर-धार्मिक विवाह पर सख्त पाबंदी है.

इस्लामिक देशों में मुस्लिम महिलाएं अपने धर्म से बाहर शादी नहीं कर सकतीं. वहीं मुसलमान पुरुष दूसरे धर्म की लड़की से शादी कर तो सकते हैं लेकिन जब वो एक खास शर्त पूरी करती है. इसे कितबिया या किताबी भी कहते हैं, जिसका मतलब है किताब में जिनका जिक्र हो. ये अमूमन कैथोलिक या यहूदियों से शादी की इजाजत देता है.

इस्लामिक देशों में मुस्लिम महिलाएं अपने धर्म से बाहर शादी नहीं कर सकतीं- सांकेतिक फोटो (pixist)




अफगानिस्तान में सुन्नी मुस्लिमों के लिए यही नियम है. इसके तहत मुस्लिम पुरुष तो गैर-मुस्लिम से शादी कर सकता है अगर वो कितबिया हो. लेकिन मुस्लिम महिला किसी दूसरे मजहब से शादी नहीं कर सकती. इसी तरह से अल्जीरिया का भी कानून है. वैसे तो इस देश में लॉ ऑफ पर्सनल स्टेटस 1984 लागू है जो शादी के बारे में अलग से कोई बात नहीं कहता. हालांकि इसकी धारा 222 में इस्लामिक शरिया को मानने की बात है. इसके तहत दोबारा वही बात आती है कि कोई मुस्लिम पुरुष मुस्लिम महिलाओं के अलावा केवल कैथोलिक या यहूदियों से शादी कर सकता है, जबकि मुस्लिम महिलाओं को ये छूट भी नहीं मिली है. बहरीन में भी यही नियम है.
अब बात करते हैं पड़ोसी देश बांग्लादेश की. यहां हनाफी मान्यता के मुताबिक मुस्लिम पुरुष, अपने मजहब की महिला के अलावा क्रिश्चियन या यहूदी महिलाओं से शादी कर सकता है. लेकिन मूर्ति पूजा करने वालों यानी हिंदुओं से शादी मना है. ये शादी अवैध होती है. दूसरी ओर महिलाएं केवल और केवल मुस्लिम युवक से ही शादी कर सकती हैं. हालांकि बांग्लादेश में हिंदू आबादी भी है और अगर हिंदू और मुस्लिम आपस में शादी करते हैं तो ये शादी Special Marriage Act, 1872 के तहत वैध हो जाती है.

मुस्लिम महिला किसी दूसरे मजहब में शादी नहीं कर सकती- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


ब्रुनेई में वैसे तो गैर मजहबी शादी पर अलग से बात नहीं है. खासकर Islamic Family Law Act (16) ऐसी कोई बात नहीं करता, जिससे से अनुमान हो सके कि वहां दूसरे मजहब में शादी नहीं हो सकती. वहीं फैमली लॉ एक्ट की धारा 47 में साफ है कि अगर शादी में कोई भी एक पार्टी धर्म छोड़ देती है या मुस्लिम से अलग धार्मिक मान्यता ले लेती है तो भी उसकी शादी तब तक मान्य नहीं होगी, जब तक खुद कोर्ट न कह दे.

ब्रुनेई में शफी मान्यता के मानने वाले हैं. इसके तहत मुस्लिम पुरुष, मुस्लिम महिलाओं के अलावा कितबिया यानी कैथोलिया या यहूदी महिला से ही शादी कर सकते हैं. वहीं दूसरे देशों की तरह ही मुस्लिम महिलाएं मुस्लिम पुरुष के अलावा किसी दूसरे धर्म में शादी नहीं कर सकती हैं.

स्टेट डिपार्टमेंट 2012 की रिपोर्ट के मुताबिक ब्रुनेई में मुस्लिम और नॉन-मुस्लिम के बीच शादी की इजाजत नहीं है. वहीं अगर कोई नॉन-मुस्लिम किसी मुसलमान से शादी करना चाहे तो इसे इस्लाम स्वीकारना होता है. अधिकारी इस नियम को किसी शादी को मान्यता न देकर पालन करवाते हैं. इस नियम की अलग से कोई कानूनी व्याख्या नहीं है.

इस्लामिक कानून मानने वाले ऐसे 29 मुल्क हैं, जो दो मजहबों के बीच शादी को मान्यता नहीं देते- सांकेतिक फोटो (pxhere)


इस्लामिक कानून मानने वाले ऐसे 29 मुल्क हैं, जो दो मजहबों के बीच शादी को मान्यता नहीं देते हैं. इनके साथ-साथ वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी भी हैं, जिसमें मुस्लिमों को दूसरे मजहबों में शादी की मनाही है, खासकर अगर वे मूर्ति पूजा करने वाले हों. ईरान और इराक में ये नियम काफी सख्त हैं और अगर कपल में से एक की धार्मिक मान्यता मुस्लिम न हो, तो उन्हें अलग कर दिया जाता है.

सैर-सपाटे के लिए ख्यात देश मलेशिया में भी नियम काफी सख्त हैं. यहां तक कि मलेशिया में कितबिया का अलग से जिक्र भी है. इसके अनुसार, अगर कोई मुस्लिम पुरुष अपने धर्म से बाहर किसी दूसरे धर्म में शादी करना चाहे, तो वो कितबिया से ही कर सकता है.

  • यहां कितबिया के मायने हैं- वो महिला, जिसके पूर्वज प्रॉफेट मुहम्मद के आने से पहले से कैथोलिक हो चुके हों.

  • वो यहूदी महिला, जिसके पूर्वज प्रॉफेट मुहम्मद के आने से पहले से कैथोलिक हो चुके हों.


वहीं अगर बात मुस्लिम धर्म की न हो तो मलेशिया में अंतर-धार्मिक शादी को मान्यता है. वे फिर चाहे कैथोलिक हों, हिंदू या जिस भी धर्म से हों, वे 1976 Act के तहत अपनी शादी कोर्ट में रजिस्टर करवा सकते हैं.
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