Section 377 के डिक्रिमिनलाइज होने के बाद मीडिया की सुर्खियों में छाए ये गे कपल कौन हैं?

कुछ महीनों पहले ही इस कपल ने पेरिस जाकर शादी की थी. यह शादी बहुत चर्चित हुई थी.

News18Hindi
Updated: September 7, 2018, 1:47 PM IST
Section 377 के डिक्रिमिनलाइज होने के बाद मीडिया की सुर्खियों में छाए ये गे कपल कौन हैं?
कुछ महीनों पहले ही इस कपल ने पेरिस जाकर शादी की थी. यह शादी बहुत चर्चित हुई थी.
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Updated: September 7, 2018, 1:47 PM IST
ललित होटल के वारिस केशव सूरी भारत में गे अधिकारों के एक्टिविस्ट हैं. और उन्होंने ही 23 अप्रैल को भारतीय दंड संहिता (IPC) के Section 377 के मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. इसके बाद उन्होंने इसी साल जून में पेरिस (फ्रांस) जाकर अपने पार्टनर सीरिल फेउलिबोस से धूम-धाम से शादी की थी. जब उन्होंने यह याचिका दायर की थी तब भारत में एक ही लिंग के दो वयस्कों का सहमति से आपस में संबंध बनाना अपराध था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका की सुनवाई पर फैसला देते हुए अब सहमति से बनाए गए समलैंगिक संबंधों को अपराध के दायरे से बाहर हो गया है.

ललित सूरी हॉस्पिटैलिटी के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर केशव सूरी होटल मालिक ललित सूरी के बेटे हैं. इनकी कंपनी दिल्ली, मुंबई, गोवा, बेंगलुरू, लंदन और अन्य शहरों में करीब दर्जन भर लक्जरी संपत्तियों को चलाती है.

दोनों पार्टनर पिछले 10 सालों से रिलेशनशिप में थे. और दोनों ही केशव सूरी के दिल्ली स्थित वसंत विहार वाले घर में रह रहे थे. फेउलिबोस दिल्ली से बाहर एक ऑर्गेनिक कॉस्मेटिक कंपनी चलाते हैं जो भारतीय सामान को लेकर करार है.

इन्होंने अपनी शादी के बाद सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा करते हुए लिखा था, "10 साल दुखों के साथ रहते हुए भी मैंने इसके हर पल को चाहा. आगे के दस सालों के लिए जगह बनाते हुए, मैं चाहता हूं कि यह बुरा टॉर्चर होने वाला है लेकिन मैं इस बात सजाओं को आनंद लेने वाला इंसान हूं."

33 केशव सूरी भारत में LGBT कम्युनिटी के सक्रिय कार्यकर्ता रहे हैं. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अप्रैल में दाखिल की गई अपनी याचिका में कहा था कि वे अपनी जिंदगी उनपर झूठा केस लगा दिए जाने के दबाव में जी रहे हैं. इसलिए अपनी जिंदगी आत्मसम्मान के साथ जी पाने में असमर्थ हैं. जिससे वे अपने उस पार्टनर के साथ अपने जीवन गुजारने के चयन का अधिकार का प्रयोग नहीं कर पा रहे हैं, जिसके साथ वे पिछले एक दशक से रह रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा था कि इस याचिका को भी पांच सेलिब्रिटीज की दायर की गई याचिका के साथ मिलाकर ही सुनवाई की जायेगी. जिसे पहले ही संवैधानिक बेंच के सामने रखा जा चुका है.

परिवार की ओर से मिला है सहयोग
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सूरी जो कि होटल मालिक ललित सूरी के बेटे हैं. ललित सूरी ने ही भारत होटल्स की श्रृंखला की शुरुआत की थी. इस महीने की शुरुआत में कई अख़बारों ने यह ख़बर छापी थी कि ललित सूरी हॉस्पिटैलिटी ग्रुप, जो देश में और देश के बाहर कुल 13 होटल चलाता है ने आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के साथ मिलकर एक मेडिक्लेम पॉलिसी की शुरुआत की है. इसके जरिए एक ही लिंग के जोड़ों को मेडिकल बेनिफिट मिलेंगे. ये फायदे ऐसे जोड़ों के साथ ही, सरोगेसी आदि से पैदा हुए उनके बच्चों और सिंगल पेरेंट्स को भी मिलेंगे. इस योजना से उनके 3,000 कर्मचारियों को फायदा मिलना था. केशव कहते हैं कि उन्हें अपने परिवार का पूरा सहयोग मिला है.

भारतीय दंड संहिता (IPC) का सेक्शन 377 अंग्रेजों के दौर में सन् 1860 में बना था. जिसे पिछले कुछ सालों में हटाए जाने के बहुत से प्रयास हुए थे. इसके पीछे इसका संविधान में जिन मौलिक अधिकारों का वादा किया गया है, उनका उल्लंघन करने वाला बताया जाना था. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस कपल ने होटल ललित की छत पर LQBTQ अधिकारों से जुड़ने वाला झंडा फहराकर और अपने होटल में केक काटकर इस फैसले को इंज्वाए किया.



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