कौन हैं वो प्राउड बॉयज, जिनका जिक्र ट्रंप ने प्रेसिडेंशियल डिबेट में किया

प्राउड ब्वाएज
प्राउड ब्वाएज

प्राउड बॉयज (Proud Boys) को चरमपंथी सोच वाला समूह माना जाता है, जो रंग और धर्म के आधार पर भेदभाव करता है. यहां तक कि उसपर हिंसा के आरोप भी लगते रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 2, 2020, 4:39 PM IST
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नवंबर में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव (presidential election in America) को देखते हुए मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) और उनके प्रतिद्वंद्वी जो बाइडेन (Joe Biden) के बीच डिबेट हुई. इसमें प्राउड बॉयज (Proud Boys) का जिक्र आया, जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा. दरअसल ये वो समूह है जो नस्ली आधार पर खुद को बेहतर (white supremacist) मानता है. बाद में विवाद छिड़ने पर ट्रंप ने वाइट हाउस में बयान दिया कि वे ऐसे किसी समूह को नहीं जानते. वैसे इस समूह का जिक्र अश्वेत मूल के अमेरिकी जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद से कई बार आ चुका है. जानिए, कौन हैं ये प्राउड बॉयज और इनका ट्रंप से क्या संबंध है.

कौन है ये समूह 
प्राउड बॉयज एक चरमपंथी मान्यता वाला समूह है, जो रंग के आधार पर खुद को बेहतर मानता है. इस निओ-फासिस्ट ग्रुप का गठन कुछ साल पहले ही हुआ. लोकप्रिय अमेरिकन कनाडियन मीडिया समूह Vice Media के को-फाउंडर ग्रेविन मेकेन्स ने इसकी शुरुआत की थी. समूह को मुख्य तौर पर मुस्लिम-विरोधी विचारों और तौर-तरीकों के लिए जाना जाता है. यहां तक कि खुद अमेरिकी खुफिया विभाग FBI ने इसे चरमपंथी समूह करार दिया है.

राष्ट्रपति चुनाव को देखते हुए मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रतिद्वंद्वी जो बिडेन के बीच डिबेट हुई-सांकेतिक फोटो (cnbc)

सिर्फ पुरुष मेंबर होते हैं


प्राउड बॉयज में, जैसा कि नाम से साफ है, केवल पुरुष सदस्य ही होते हैं. ये न केवल गोरे रंग के आधार पर भेदभाव करते हैं, बल्कि इनकी नफरत का शिकार महिलाएं, मुस्लिम, और ट्रांसजेंडर भी हैं. कुल मिलाकर प्राउड बॉयज वो समूह है, जो अपने से अलग दिखने या होने वाले हर इंसान या समुदाय को स्वीकार नहीं करता.

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हिंसा से नकारता है समूह
हालांकि समूह का दावा है कि वो नस्लभेदी नहीं है. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में यूएसए टुडे के हवाल से प्राउड बॉयज समूह के मौजूदा लीडर का बयान छपा है. अफ्रीकन-क्यूबन मूल के इसके वर्तमान लीडर एंट्रिक टेरिओ कहते हैं कि उनका ये समूह किसी भी तरह की रेसिस्ट गतिविधि का हिस्सा नहीं. और न ही वे खुद को बेहतर दिखाने के लिए किसी हिंसा का सहारा लेते हैं.

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क्या करता है ये समूह
प्राउड बॉयज के सदस्य अक्सर ऐसी रैलियों का हिस्सा बनते देखे गए हैं, जो वाइट सुप्रिमेसी के हक में हो. यहां तक कि वे अक्सर अमेरिका और कनाडा में अश्वेतों और मुस्लिमों पर हिंसा करते भी दिखते हैं. खुद को अलग दिखाने के लिए समूह का एक ड्रेस कोड भी है. वे लाल रंग की टोपी लगाए होते हैं, जिसपर लिखा होता है- Make America Great Again. बता दें कि ये साल 2016 में ट्रंप की पहली चुनावी रैली का चर्चित स्लोगन था.

ग्रेविन मेकेन्स प्राउड बॉयज के संस्थापक हैं- फोटो (youtube)


चुनावी बहस में प्राउड बॉयज का जिक्र कैसे आया
असल में बहस के दौरान फॉक्स न्यूज के एंकर ने ट्रंप से अश्वेत मूल के लोगों पर हिंसा की बात की. इस दौरान ट्रंप वाइट सुप्रीमेसी पर कुछ भी कड़ा बयान देने से बचते दिखे. इसी दौरान जो बिडेन बीच में आ गए. उन्होंने हिंसा के लिए प्राउड बॉयज को दोषी मानने की बात की. तभी ट्रंप ने कहा- प्राउड बॉयज- स्टैंड बैक एंड स्टैंड बाय...! ये जवाब भी नस्लभेद के दूसरे जवाबों की तरह बचता हुआ था. हालांकि इसके बाद ट्रंप ने एंटीफा का जिक्र करते हुए उसपर जरूरी लगाम कसने की बात की थी. वे इससे पहले भी एंटीफा पर हमलावर हो चुके हैं.

कौन है एंटीफा, जिससे ट्रंप चिढ़ते हैं
अमेरिका में फासीवाद के विरोधी समूह को एंटीफा के नाम से जाना जाता है. एंटीफा ग्रुप की शुरुआत साल 1920 से 1930 के बीच मानी जाती है. वैसे अमेरिका में इसकी शुरुआत साल 1930 में हुई. मार्क ब्रे की किताब Antifa: The Anti-Fascist Handbook में इसका जिक्र मिलता है. ये लोग नव-नाजी, फासीवाद और रंगभेद के खिलाफ खड़े रहने का दावा करते हैं.

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एंटीफा सदस्य अक्सर सिर से पैर तक काले कपड़े पहने होते हैं. और अश्वेतों के खिलाफ किसी भी हिंसा को अनाम तरीके से लीड करते हैं. आमतौर पर शांतिप्रिय माने जाने वाले ये संगठन हिंसा के भी परहेज नहीं रखते और जरूरत पड़े तो अपने साथ मिर्च पावडर, चाकू, डंडे और ईंटें लेकर चलते हैं.

अमेरिका में फासीवाद के विरोधी समूह को एंटीफा के नाम से जाना जाता है- सांकेतिक फोटो (CNN)


बंकर में भागना पड़ा था ट्रंप को
मई के आखिर में फ्लॉयड की मौत के बाद वाइट हाउस के सामने हुए प्रदर्शन के बाद ट्रंप को घबराकर बंकर में छिपना पड़ा था. बाद में बाहर आने के बाद उन्होंने एंटीफा पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया था. लेकिन चूंकि एंटीफा में हर कोई अनाम तरीके से जुड़ता है इसलिए उनकी पहचान नहीं हो सकी.

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खूंखार नस्लभेदियों का एक और समूह भी है
वैसे गोरे लोगों का एक समूह ऐसा भी है, जो अश्वेत मूल के लोगों पर अपने अत्याचार के लिए बदनाम रहा. इसे कू क्लक्स क्लान या संक्षेप में kkk (Ku Klux Klan) कहते थे. अश्वेत लोगों पर शारीरिक हिंसा को सही बताने और खुद को श्रेष्ठ (white supremacist) मानने वाला ये समूह अब भी दुनिया के कई देशों में खुफिया ढंग से चालू है. वैसे साल 1882 में अमेरिकी सरकार ने इस समूह को असंवैधानिक घोषित कर दिया था. इसकी वजह थी- समूह के हिंसक तौर-तरीके. ये समूह अपनी क्रूरता के लिए जाना जाता था. वे अफ्रीका के लोगों को कोड़ों या बेल्ट से तब तक मारते, जब तक कि उनका रंग गायब न हो जाए और वे खूनाखून न हो जाएं. रात में ये लोग समूह में निकलते और अश्वेत मूल के लोगों को टारगेट करते थे.
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